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सीएम अखिलेश यादव के काम का एक ये भी अंदाज, टूरिज्म से साथ पर्यावरण का भी ख्याल

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01 February, 2017

अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री हुए है। इसके पहले प्रदेश में जो भी मुख्यमंत्री आए और गए उनकी उम्र तो बहुत थी, तजुर्बे भी बहुत थे लेकिन उनमें से किसी ने भी अपने उन तजुर्बों का प्रयोग गरीबों, आम आदमी और किसानों की भलाई के लिए प्रयोग नहीं किया।

कहते हैं कि सियासत के फलक पर वही सितारा चमकता है, जो समाज में खड़े अंतिम व्यक्ति तक रोटी कपड़ा और मकान पहुंचा देता है। खेत के खलिहानों से लेकर शहर के बाजारों तक वह एक समान रूप से विकास कार्य करता है। यही सियासत का वह फ़लसफ़ा है जो लोकतंत्र के ताने बाने को और मजबूत करता है।

अखिलेश यादव सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री भले हुए, लेकिन उनके कारनामे सियासत के बड़े बुजुर्गों को भी मात देते हुए दिखते हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि इसके पहले प्रदेश में मायावती की सरकार थी और उन्होंने पत्थर के शीश महल बनवाने के सिवा कुछ नहीं किया। उन बेजान पत्थरों पर इंसानों के लिए विकास की कोई इबारत नहीं लिखी गई। पर अखिलेश यादव ने अपनी समझ बूझ और अपनी दूरदृष्टि से प्रदेश का चौतरफा विकास किया है। चाहे आप किसानो के खलियानों की बात करें, गांव के मकानों की बात करें या शहर की बड़ी बड़ी दुकानों की बात करें, आपको उत्तर प्रदेश में एक चीज जो स्पष्ट रूप से नजर आएगी वह है- चौतरफा हुआ विकास।

आज ही की बात है जब उत्तर प्रदेश को दुनिया के फलक पर चमकने का एक और मौका मिला है और यह मौका इसी कम उम्र के मुख्यमंत्री ने दिया है। यह मौका है गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड में अपना नाम दर्ज कराने का।

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अखिलेश यादव जब सत्ता में आए तो उन्होंने सड़क पर चलने वाले राहगीरों के लिए अलग से साइकिल ट्रैक बनाने की घोषणा की इस घोषणा से ना सिर्फ आवागमन की सुविधा मजबूत हुई बल्कि सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में भी काफी कमी आई। आज जब आप अपने शहर में निकलते होंगे तो सड़क के किनारे आपको हरे और लाल रंग में पुते हुए साइकिल ट्रैक बड़ी खूबसूरती के साथ दिखते होंगे और आपको जानकर खुशी और हैरानी दोनों होंगी कि ये साइकिल ट्रैक अब बढ़ते बढ़ते इतना बढ़ गए हैं कि इनकी दूरी कुल 207 किलोमीटर की हो चुकी है। जो प्रदेश के कुल 90 से ज्यादा गांवों को आपस में जोड़ देता है और अब यह साइकिल ट्रैक गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा करके दुनिया का सबसे बड़ा साइकिल ट्रैक  बन गया है

यह ट्रैक उत्तर प्रदेश के आगरा से लेकर इटावा तक तैयार करवाया गया है। इस अंतर्राष्ट्रीय साइकिल रैली में शामिल होने के लिए स्वीडन, अमेरिका और जर्मनी के अलावा भारत के 12 राज्यों से प्रतिभागी आये थे। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी इस साइकिल हाईवे पर कुचले चलाकर इस रैली का शुभारंभ किया था।

नोटबंदी से जब पूरा देश परेशान था और बैंकों के बाहर लंबी लंबी लाइनें लगी थीं तब अखिलेश यादव ने प्रदेश के सभी जिलों के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिया कि नोटबंदी से जनता को आ रही समस्या जल्द से जल्द दूर कर ली जाए और खास तौर से बैंक में खड़े या लाइन में लगे किसी भी आदमी के साथ पुलिस या किसी भी अधिकारी के द्वारा बुरा बर्ताव ना किया जाए। उन्होंने आगाह किया कि किसान खेतों में अपनी फसल बोने के लिए तैयार खड़ा है। ऐसे में सभी अधिकारियों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह यह तय करें कि किसान को सही समय पर बीज मिल जाए और सही समय पर खाद मिल जाए जिससे वह अपनी बुआई कर सकें।

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अखिलेश यादव ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि किसानों को कोई समस्या आई तो वह संबंधित अधिकारी को कड़े से कड़ा दंड देने में पीछे नहीं रहेंगे। अखिलेश यादव ही हैं जिन्होंने नदियों के महत्व को समझा है। आप अगर लखनऊ में है तो जाके गोमती नदी को देख आइये। ऐसा लगता ही नहीं कि यह वही गोमती नदी है जिसको दस साल पहले लोग देख कर के नाला कहा करते थे। आज गोमती नदी विश्व की तमाम चमचमाती हुई और खूबसूरती से सजी नदियों को भी मात देती हुई नजर आती है अखिलेश यादव ने इस परियोजना के काम को अब आगे बढ़ाया है और गोमती रिवर फ्रंट की तर्ज पर ही फैजाबाद में अयोध्या की सरयू नदी पर बने घाटों को अब गोमती रिवर फ्रंट की तर्ज पर बनाये जाने का फैसला लिया गया है।

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