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प्रगति के साथ प्रकृति संरक्षण: सीएम अखिलेश ने की ग्रीन मैनिफेस्टो की पहल

 

 

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June 29, 2016

कल्पना कीजिए चुनाव के दौरान राजनीतिक दल जब जनता के बीच विकास के मुद्दों के साथ जाएं तो उनके पास ऐसे प्रस्ताव हो कि अमुक कार्य के दौरान पर्यावरण के नुकसान को रोका जाएगा या अमुक योजना में प्रकृति के भले के लिए प्रावधान किए गए हैं। अपने तरह के इस अनूठे अभियान की पहल की है उत्तर प्रदेश के पर्यावरण प्रेमी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने। पिछले दिनों मे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के महोबा प्रवास के दौरान उनके साथ जाने माने पर्यावरणविद् राजेंद्र सिंह भी मौजूद थे। सीएम के बुंदेलखंड सहित प्रदेश भर में प्रगति के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों के साथ ही पर्यावरण को लेकर उनकी सर्तकता और संवेदनशीलता से वह आह्लादित नजर आए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तालाबों के जीर्णोद्धार और जल संचयन के लिए जो कार्य किए हैं, उसके बारे में सभी को सोचना चाहिए। इस कार्य ने सभी को एक सन्देश दिया है और चेतना जगी है। उनके इस कार्य के लिए मैं उन्हें सलाम करता हूं। अब राजेंद्र सिंह की मांग पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में वॉटर यूनिवर्सिटी खोलने की घोषणा की है। यह यूनिवर्सिटी जल प्रबंधन पर काम करेगी।

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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ‘हिंडन नदी यात्रा’ कार्यक्रम में कहा कि हम चाहते हैं कि प्रदेश में ऐसा विश्वविद्यालय हो जो जल प्रबंधन पर काम करे। साथ ही यूपी में शीघ्र ही जल प्राधिकरण बनाने की भी घोषणा की। जल संरक्षण को लेकर मुख्यमंत्री की ओर से ऐसी घोषणाएं और उन पर प्रभावी अमल कोई नई बात नहीं हैं। तालाबों को पुनर्जीवित करने की समाजवादी संचय योजना हो पौधे लगाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना, मुख्यमंत्री की ये योजनाएं ग्राउंड वॉटर लेबल को स्थिर करने की दिशा में अहम कदम हैं। वैसे अखिलेश यादव का यह भी मानना है कि नदियों को साफ रखना सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। उनकी सरकार ने हिंडन, गोमती, यमुना तथा वरुणा नदी के पुनर्जीवन की पहल की है। गाजियाबाद में हिंडन नदी को गोमती नदी की तरह ही सुंदर बनाने की उन्होंने घोषणा की है। वाराणसी में वरूणा नदी का संवारा जा रहा है।

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दरअसल मौजूदा दौर में जल संरक्षण, नदियों का पुनर्जीवन और तालाबों के पुनरुद्धार समय की मांग है साथ ही जन कल्याण के लिए बेहद जरूरी भी है। शायद यही वजह है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसे रेखांकित करते हुए आगामी 2017 के चुनाव ग्रीन मैनिफेसटो बनाने पर जोर दिया है। ग्रीन मैनिफेस्टो से उनका आशय ऐसे विकास कार्यक्रमों से है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण का ख्याल रखा जाए। लिहाजा अखिलेश ने घोषणा की है कि इस मुद्दे की गम्भीरता को देखते हुए उनकी पार्टी अपने चुनाव घोषणा पत्र में इसे प्रमुखता के साथ शामिल करेगी। क्या बेहतर होता कि दूसरी पार्टियों भी इसी तरह सोचतीं।

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जलपुरुष राजेन्द्र सिंह ने कहा कि अखिलेश सरकार की ओर से पर्यावरण संरक्षण तथा नदियों व तालाबों इत्यादि के संरक्षण के साथ-साथ उनके पुनर्जीवन तथा पुनरुद्धार की दिशा में गम्भीर प्रयास किए जा रहे हैं, जो सराहनीय हैं। पिछले एक माह के अन्दर बुन्देलखण्ड में 100 तालाबों की डी-सिल्टिंग का कार्य किया गया है, जो एक रिकॉर्ड है। इसके लिए भी उन्होंने अखिलेश यादव को बधाई दी। उन्होंने सीएम को बताया कि हिंडन नदी में विभिन्न औद्योगिक संस्थानों, डिस्टिलरियों तथा सीवर का गन्दा पानी गिरने से यह नदी बहुत प्रदूषित हो गई है। साथ ही महोबा में चन्द्रावल नदी के पुनर्जीवन का जिक्र करते हुए हिंडन को नया जीवन मिलने की उम्मीद जताई। सीएम ने भी उन्हें निराश नहीं किया और गोमती की तर्ज पर हिंडन को संवारने की मंच से ही घोषणा कर दी।

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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का मानना है कि विकास सिर्फ बड़े-बड़े निर्माण या जीडीपी से ही नहीं हो सकता है, इसके लिए पर्यावरण का संरक्षण भी जरूरी है। निसंदेह उनकी ऐसी कोशिशें रंग ला रही हैं। जिससे यह प्रगति वर्तमान पीढ़ी के साथ ही हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी लाभकारी साबित होगा।

 

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