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अपने लक्ष्य की ओर हर पल नया कदम बढ़ाते अखिलेश यादव

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उत्तर प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी ताजपोशी के पहले की तमाम भविष्यवाणियों को गलत साबित करते हुए पांच साल में यह सिद्ध कर दिया कि समाजवादी पार्टी के मुखिया का निर्णय गलत नहीं था। इस कार्य के लिए लोगों ने पार्टी के प्रमुख महासचिव प्रो. राम गोपाल के भी कान फूंके, लोगों की शिकायतों को उन्होंने भी बड़े ध्यान से सुना, और थोड़े समय के लिए विचलित हुए। जिसकी पुष्टि उन्होंने खुद 10 जनवरी, 2014 को इटावा में दिए गये एक भाषण में की। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत ही इस बात से की कि 2012 में हुए चुनाव में जब समाजवादी पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की, विधायकों ने अखिलेश यादव को अपना नेता चुना, उस समय बहुत सारे लोगों ने कहा था कि अभी अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाना ठीक नहीं होगा, क्योंकि उन्हें शासन चलाने का कोई अनुभव नहीं है। उस समय ऐसी आशंका जताई जा रही थी, देश के सबसे बड़े राज्य की कमान सँभालने वाले अखिलेश यादव असफल मुख्यमंत्री साबित होंगे। पर मुझे गर्व है कि अखिलेश यादव से बतौर मुख्यमंत्री हम लोगों ने जो अपेक्षाएं रखी थीं, उन सभी को उन्होंने पूरा किया।

तत्कालीन परिस्थतियों का वर्णन करते हुए प्रो. राम गोपाल ने कहा कि अखिलेश यादव ने जब उत्तर प्रदेश की बागडोर संभाली थी, उन्हें विरासत में काँटों भरा ताज मिला था। बसपा शासन काल में सूबे को लूट कर खोखला बना दिया गया था, चारो तरफ अराजकता, लूट-खसोट, कमीशनखोरी, रिश्वतखोरी का माहौल था। सूबे में क़ानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं थी। एक तरफ जहाँ राज्य का खजाना खाली था, दूसरी तरफ प्रदेश पर अरबो रूपये का कर्ज था। राज्य में विकास का पहिया पूरी तरह ठप पड़ा हुआ था। मुख्यमंत्री पद का कार्यभार सँभालने के बाद उन्होंने सबसे पहले प्रदेश के माहौल को सकारात्मक बनाया। लोगों के खोये हुए विश्वास को वापस लाये। इसके बाद काम करना शुरू किया। समाजवादी सरकार ने जनता के हित में अनेक कार्यक्रम चलाये, अपने चुनावी वायदे को पूरा करने के लिए अखिलेश सरकार ने युवाओं को लैपटाप बांटना शुरू किया। जिसका विरोधियों ने जम कर मजाक बनाया। उनके मजाक के पीछे आधारभूत कारण प्रदेश के खजाने में के कौड़ी का न होना। लेकिन अब तक लाखों लोगों को लैपटाप देकर यह सिद्ध कर दिया कि यदि मन से किसी राज्य का मुख्यमंत्री कोई कार्य करने का निश्चय कर ले, तो वह अवश्य पूरा किया जा सकता है।

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सरकार की छवि ख़राब करने के लिए कुछ कालेजों के प्राध्यापकों और प्राचार्यों ने एक-दो हजार रूपये भी ले लिए, जब इसकी सूचना अखिलेश यादव को मिली, तो जाँच करवा कर उन्हें दण्डित करने में भी पीछे नहीं हटे। अखिलेश सरकार के काम-काज की प्रशंसा करते हुए ममता बनर्जी कहा कि उत्तर प्रदेश की कई योजनायें ऐसी है, जिनसे समाज के सभी वर्गों को फायदा नहीं पहुंचेगा। सभी राज्यों को चाहिए कि वे भी इस तरह की योजनाओं को अपने यहाँ लागू करें। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है, कि अखिलेश यादव ने प्रदेश के विकास के लिए जमीनी योजनायें तैयार की। जिससे प्रदेश का चहुमुखी विकास हो सके। इसी कारण इस समय विकास के नाम पर कटु आलोचक भी अखिलेश सरकार के विकासात्मक कार्यों की प्रशंसा करते हैं। समाजवादी पार्टी ने लोहिया के सिद्धांतों का अनुसरण करते हुए वर्ष 2015-16 किसान वर्ष घोषित किया। डॉ।

राम मनोहर लोहिया कहा करते थे कि अगर भारत को खुशहाल बनाना है, तो सबसे पहले गांवों और किसानों को सुखी बनाना होगा। इसी सूत्र वाक्य के आधार पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री काम कर रहे हैं। इसी कारण इस वर्ष का 75 प्रतिशत बजट किसानों और गांवों के विकास के लिए संरक्षित कर दिया। किसानों के कर्जे माफ़ कर दिए। कृषक दुर्घटना बीमा योजना की धनराशि 5 लाख रूपये कर दी।

प्रदेश सरकार ने किसानों के लिए नहरों और सरकारी टयूबेलों से सिचाई मुफ्त कर दी। सिचाई सुविधा बढ़ाने के लिए विश्व बैंक से ढाई हजार करोड़ रूपये प्राप्त किया। जिस पर शिवपाल सिंह यादव के नेतृत्व में कार्य किया जा रहा है, अभी पिछले महीने विश्व बैंक के अधिकारी आये थे, शिवपाल उनसे मिले, और कार्य और योजना को देख-सुनकर बड़े प्रसन्न हुए। अगली बार आने पर उन्हें हेलीकाप्टर द्वारा सभी सिचाई परियोजनाओं को दिखाने का वायदा भी सिचाई मंत्री ने किया।

इसके अलावा लखनऊ, कानपुर, बनारस में मेट्रो ट्रेन, आगरा एक्सप्रेस वे काम बड़ी तेजी से अखिलेश सरकार चला रही है। बिजली संकट भी उत्तर प्रदेश की एक बड़ी समस्या है, इस दिशा में भी सरकार काम कर रही है, सरकार ने गांवों में 18 घंटे और शहरों में 24 घंटे बिजली देने की अपनी प्रतिबद्धता को पूरा किया है।

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