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सियासत के अखाड़े में विरोधियों को चित करने में जुटे सीएम अखिलेश

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यूपी के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सियासत के चतुर खिलाड़ी के रूप में उभरे हैं। विकास कार्यों को लेकर जनता ने यदि इस बार भी उनका साथ दिया तो उनकी सरकार दोबारा से सूबे में सत्ता में होगी। युवा सीएम अखिलेश यादव ने अब सियासती दांवपेंच से सत्ता के समर में बीजेपी, बसपा को पटकनी देना शुरू भी कर दिया है। राजनीतिक मैदान में सीएम अखिलेश यादव के दांव का बीजेपी-बसपा को जवाब नहीं सूझ रहा है।

सूत्रों के मुताबिक अखिलेश यादव जहां प्रदेश के विकास की बात कर रहे हैं तो बीजेपी-बसपा अभी भी धर्म और जाति के गुणा-भाग में अटकी हैं। ऐसे में विकास के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की दोबारा सरकार बनने से कोई दल नहीं रोक सकता है। इसी को लेकर साधु संतों से लेकर समाज के हर वर्ग का समर्थन समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को मिलता दिख रहा है। यह बात अखिलेश यादव भी खूब समझते हैं। ऐसे में सूबे में उन्हें बिना किसी भेदभाव के हर बिरादरी और धर्म और संप्रदाय का ख्याल रखा है।

सूत्रों के मुताबिक अखिलेश को अपनी इस योजना से कुछ हद तक तो लाभ मिल रहा है, लेकिन उनकी यह योजना अगर सफल हो जाती है तो बीजेपी का वोटर भी टूटकर उनके पाले में आ जायेगा। बताया जाता है कि अखिलेश यादव कि इसी योजना के तहत पिछले दिनों एक कार्यक्रम के मंच से अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के प्रमुख और अयोध्या की हनुमान गढ़ी के महंत ज्ञान दास ने यह बयान दिया है कि उन्हें “खून में सना राम मंदिर” नहीं चाहिए। दास मानते हैं कि अयोध्या में राम मंदिर तभी बनेगा जब “भगवान राम चाहेंगे।”

दास ने तब मीडिया से कहा था कि विश्व हिन्दू परिषद (वीएचपी) जैसे सगंठन कभी अयोध्या में राम मंदिर नहीं बनवाएंगे। दास ने कहा कि वीएचपी जैसे संगठन राम मंदिर के नाम पर “अपना कारोबार चलाते हैं।” उन्होंने कहा कि कुछ दूसरे लोग इस मुद्दे से “राजनीतिक फायदा” उठाने की कोशिश कर रहे हैं। दास उत्तर प्रदेश के सीएम अखिलेश यादव की सम्मान सभा में बोल रहे थे।

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बहरहाल इससे साफ जाहिर है कि अखिलेश यादव अब साधु संतों को पार्टी की ढाल बनाकर बीजेपी पर सीधे हमला कर रहे है। जानकार बताते है कि राजनीति के धुरंधर खिलाडी कहे जाने वाले सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव को भी उनके बेटे अखिलेश ने सियासत के दांवपेंच यह चाल चलकर उनको भी पीछे छोड़ दिया है। बताया जाता है कि अपने बेटे के इस राजनीतिक दांवपेच को लेकर नेताजी यानि मुलायम सिंह यादव बहुत खुश है और इसको लेकर वह अखिलेश की पीठ भी थपथपा चुके है। समझ जाता है कि अगर अखिलेश को अपनी इस रणनीति में कामयाबी मिलती है तो वह दुबारा से अपनी सरकार यूपी में बना लेंगे।

बहरहाल चुनाव के नतीजे क्या होते हैं ये तो भविष्य के गर्त में छुपा है लेकिन ये तय है कि जिस तरह से अखिलेश यादव ने सभी वर्गों और समुदायों के लेकर और उनके लिए काम किये हैं, उसका नतीजा ही है कि वे जनता के सीएम के रूप में लोगों के बीच स्थापित हो चुके हैं। अब अपने चुनावी घोषणा पत्र में भी अखिलेश ने एक बार भी सभी के कल्याण और उन्नति का रोडमैप सामने रख दिया है। ऐसे में पिछले विधानसभा चुनाव की तरह इस बार में जनता अखिलेश को सिर म्मठे पर बिठाती है तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

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