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जनता के सुख-दुःख के हर पहलू पर बारीक नज़र रखते हैं सीएम अखिलेश

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14 December 2016

ये बात भले ही बेहद मामूली लगे, लेकिन उतनी ही गंभीर है। और सुकून इस बात का भी है कि कहीं तो एक ऐसी सरकार है जो जनता के दर्द को जमीनी स्तर तक समझती है, उनका समाधान करती है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ऐसी ही खूबियाँ उन्हें मौजूदा दौर के राजनेताओं से अलहदा बना देती हैं। वह भी तब जब आज का छोटा या बड़ा हर नेता खुद को हाकिम समझने लगता है। जनता की मदद के बजाय सत्ता को सिरपरस्ती मान बैठता है।

पिछले दिनों देश में जगह-जगह से ऐसी ख़बरें आ रहीं थी कि कैसे अस्पतालों ने मरीज की मौत के बाद शव को उनके घर तक पहुँचने से इंकार कर दिया तो विपदा की घड़ी में परिवारीजनों को खुद अपने कन्धों या ठेलों पर लाश ढोने पड़े। सवाल ये भी उठे कि अस्पतालों का काम जान बचाना है, एम्बुलेंस मरीज से लिए ज्यादा जरूरी होते हैं। ऐसे में शव को उनके परिवारीजनों तक पहुँचाना सीधे तौर पर उनकी जिम्मेदारी भी नहीं है। पर उसका का क्या जिसने किसी अपने को खोया हो? अपने प्रिय की मौत से भी बड़ा कोई दुःख हो भी सकता है क्या? मुसीबत में परेशानी का सबब बनना क्या मानवता है? इसे कौन समझेगा?

उड़ीसा के मांझी की दर्द भरी दास्ताँ के बाद तो दर्जनों ऐसी कहानियां सामने आने लगीं। हर बार सवाल उठता कि क्या गरीब, बेसहारा का कोई भी सहारा नहीं होता? हो-हल्ला होता रहा, पर सरकारों की कान पर तो जूं भी नहीं रेंगा।।। शिवाय उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार के। सीएम अखिलेश यादव वैसे भी देश-दुनिया में अपने उदार व्यक्तित्व के लिए जाने जाते हैं। सो इस पीड़ा को भी उन्होंने समझा। उन्होंने अपने सरकार में मातहतों को निर्देश दिया है कि सरकारी अस्पतालों में मरने वाले मरीजों के शव को इनके घर तक पहुँचाने के लिए नि:शुल्क वाहन का इंतजाम किया जाये। इसके साथ ही ऐसी घटनाओं के लिए निःशुल्क परिवहन सेवा शुरू करने का भी निर्देश दिया है। इस सेवा के सफल संचालन हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। शव परिवहन सेवा के सुचारू संचालन के लिए सभी जिलों में नोडल अधिकारी नामित करने को कहा गया है। साथ ही यह भी ताकीद की गयी है कि नोडल अफसरों के मोबाइल नम्बर का व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाये, ताकि मृतक के परिजन या परिचित आसानी से नोडल अधिकारी से सम्पर्क कर सकें और उन्हें किसी तरह की मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़े।

प्रमुख सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य, अरूण कुमार सिन्हा ने बताया कि शव परिवहन सेवा को निर्धारित प्रक्रिया के तहत लोगों को उपलब्ध कराने के लिए जनपदों के प्रमुख व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक द्वारा एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जा रहा है, जो चिकित्सा अधीक्षक स्तर का होगा। नोडल अधिकारी से सम्पर्क के लिए उनके टेलीफोन व मोबाइल नम्बर का व्यापक प्रचार भी कराया जाएगा।

जनपदीय चिकित्सालयों में आपातकालीन दूरभाष संख्या को भी शव परिवाहन सेवा के उपयोग में लाया जायेगा। आपातकालीन दूरभाष नम्बर अटेंड करने वाले कार्मिक शव परिवहन सेवा से सम्बन्धित काल रिसीव करेंगे और वे मृतक के परिजनों को इस सेवा से संबंधित समस्त जानकारियों भी उपलब्ध कराएंगे। यह सेवा बिल्कुल निःशुल्क है। इसमें किसी भी प्रकार की अनियमितता न होने पाए, इसके लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को कड़े निर्देश भी दिए गये हैं।

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