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कामयाबी की नई इबारत लिखने को तैयार सीएम अखिलेश

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उत्तर प्रदेश की राजनीति नई करवट लेने जा रही है। अखिलेश यादव के नेतृत्व में जहां समाजवादी पार्टी में नयी ऊर्जा का संचार हुआ है, वहीं प्रदेश की राजनीति में भी कायाकल्प के संकेत मिल रहे हैं। चुनाव आयोग ने अपने निर्णय में समाजवादी पार्टी की साइकिल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नाम कर दी है। हाल के इस घटनाक्रम के बाद अखिलेश यादव और मजबूत व दृढ प्रतिज्ञ साबित हुए हैं।  इन सब घटनाक्रम के बाद एक चीज साफ है कि वो अपनी छवि को मतदाताओं के सामने रखने में सफल हो पाए हैं कि वो वो बड़े निर्णय ले सकते हैं और समाजवादी पार्टी आने वाले चुनाव में विजयी भी बना सकते हैं।

अखिलेश यादव को साइकिल सिंबल मिलने से पहले जो भी ओपिनियन पोल आये थे उसमे समाजवादी पार्टी को उत्तर प्रदेश जीतते हुए नहीं दिखाया गया था। इंडिया टुडे के ओपिनियन पोल ने तो समाजवादी पार्टी को मात्र 92-97 सीट जीतते हुए ही दिखाया है। जबकि बीजेपी को 206-216  सीट जीतकर विजयी होने का अनुमान लगाया गया है। अब सवाल ये है कि पिछले कुछ दिनों में जो घटनाक्रम हुए हैं इससे क्या नहीं लगता है कि चुनावी लहर धीरे-धीरे अखिलेश के पक्ष में होती जा रही है, और आने वाले चुनाव में वो बीजेपी को पटखनी देने में सफल साबित हो सकती है।

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अब जो स्थिति बनती जा रही है उससे लग रहा है कि आने वाले चुनाव में अखिलेश की सीधी टक्कर बीजेपी से ही है। बीजेपी ने पहले भी कहा है कि उसकी लड़ाई समाजवादी पार्टी से ही है। समाजवादी पार्टी के अंदरूनी उठापटक के बीच बीएसपी ने उत्तर प्रदेश में अपनी जगह बनाने की पूरी कोशिश की थी। लेकिन अब बदले हुए माहौल में उत्तर प्रदेश की लड़ाई एक बार फिर से समाजवादी पार्टी और बीजेपी के बीच होती जा रही है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति नई करवट लेने जा रही है। अखिलेश यादव की तैयारी बिलकुल साफ है, कांग्रेस और आरएलडी के साथ गठबंधन हो या ना हो, उनका मुख्य मकसद यही है कि बीजेपी को प्रदेश में सत्ता बनाने से रोका जा सके। कुछ समीक्षक भी अब मानने लगे हैं कि पूरे प्रकरण में अखिलेश यादव की छवि एक मजबूत नेता के रूप में उभरकर सामने आई है। उन्हें मालूम है कि समाजवादी पार्टी अकेले दम पर भी विधान सभा चुनाव जीत सकती है, फिर भी वे गठबंधन से वोटों का बटवारा होने से रोकना चाहते हैं।

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अखिलेश यादव की नजर इस चुनाव में युवाओं पर है। पिछले 5 सालों में समाजवादी पार्टी को अखिलेश यादव ने आधुनिक लुक देने में कामयाबी हासिल की है। पार्टी को युवाओं से जोड़ने में भी वह काफी हद तक कामयाब रहे हैं। इस चुनाव में अखिलेश की नजर इन युवाओं पर ही है। वे अपने कार्यकाल की विकासवादी छवि को भुनाने में भी कोई कसर छोड़ना नहीं चाह रहे हैं। वे अपनी पार्टी में अपराधी ताकतों को भी कोई जगह देने के पक्ष में नहीं है।

समाजवादी दंगल से उभर कर अखिलेश यादव ने अब अपना पूरा जोर इस चुनाव में झोक दिया है। पूरे प्रकरण में अखिलेश यादव बिलकुल विजयी साबित हुए हैं। अब ऐसा लग रहा है कि ओपीनियन पोल के रिजल्ट के विपरीत नतीजे हमें देखने को मिल सकते हैं। समाजवादी पार्टी पूर्ण बहुमत नहीं ले पायी तो कम से कम सबसे ज्यादा सीटें लाने में कामयाबी जरूर हासिल करेगी।

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