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बुंदेलखंड में हरियाली का रोडमैप तैयार कर रहे सीएम अखिलेश

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव 4 जून को बुंदेलखंड के 100 चयनित तालाबों में से चरखारी स्थित 8 तालाबों का लोकार्पण करते हुए। photo_uttamup.com

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव 4 जून को बुंदेलखंड के 100 चयनित तालाबों में से चरखारी स्थित 8 तालाबों का लोकार्पण करते हुए। photo_uttamup.com

June 7, 2016

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तालाबों के जीर्णोद्धार और जल संचयन के लिए जो कार्य किया है, उसके बारे में सभी को सोचना चाहिए। इस कार्य ने सभी को एक सन्देश दिया है और चेतना जगी है। उनके इस कार्य के लिए मैं उन्हें सलाम करता हूं।

– राजेन्द्र सिंह, जल संरक्षण के लिए प्रख्यात समाजसेवी

बुंदेलखंड में सूखे की समस्या गंभीर है, इसमें कोई दो राय नहीं है। उत्तर प्रदेश सरकार इसे दूर करने की कोशिशें भी पूरे मनोयोग और गंभीरता से कर रही है। इस बात के प्रमाण पिछले दिनों में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के महोबा के चरखारी भ्रमण में भी मिले, जब उन्होंने पुनर्जीवित किए गए आठ तालाबों का लोकर्पण किया। पानी की जरूरत पूरी करना यहां के लिए बेहद अहम बात है, सो तालाबों का लोकार्पण तो लोगों को खुश ही कर गया, पर एक और बात सुर्खियों में छा गई। ये सुर्खियां थीं मुख्यमंत्री अखिलेश की बुंदेलखंड को दीर्घकालीक रूप से हराभरा बनने की मंशा। चर्चा का अहम बिंदु रहा-पीनी के पानी की समस्याओं का समाधान करने के लिए सौर ऊर्जा से चलने वाले नलकूपों का निर्माण।

पानी की किल्लत और बिजली उत्पादन एक दूसरे के पूरक है। आज दुनिया भर में पानी की किल्लत दूर करने के लिए बिजली बचाने और ऊर्जा के परंपरागत स्रोतों को बढ़ावा देने पर विचार किया जा रहा हैं। ऐसे में सौर ऊर्जा से चलने वाले नलकूपों का निर्माण निश्चित तौर पर सराहनीय कदम है।

युद्धस्तर पर पूरी की जा रहीं पानी की जरूरतें

 बुंदेलखंड में समाजवादी जलसंचय योजना के तहत युद्ध स्तर पर तालाबों की खुदाई की जा रही है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पिछले दिनों में इन्हीं कार्यों का जायजा लेने के लिए महोबा के चरखारी पहुंचे थे। यहां उन्होंने तालाबों के पुनर्जीवन कार्यों की जमीनी हकीकत की पड़ताल की। साथ ही 8 तालाबों का लोकार्पण भी किया। चरखारी के ये आठ तालाब- जयसागर, कोठीताल, बंसिया ताल, मलखान तालाब, रपट तलैया, गुमान बिहारी तालाब, रतनसागर और गोलाघाट तालाब अब इस क्षेत्र की जनता की पानी की जरूरतों को एक बार फिर पूरा करने के लिए सक्षम हो गए हैं। पूरे प्रदेश में 32 हजार तालाबों की खुदाई कराई जा रही है। इनमें से बुंदेलखंड में 100 तालाबों की खुदाई का काम चालू है और इनमें से भी 8 तालाब सिर्फ चरखारी नगर के हैं। अगर बारिश नहीं हुई तो अर्जुन नहर से लिफ्ट कैनाल से यहां के तालाबों को भरा जाएगा।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव 4 जून, 2016 को जनपद महोबा के चरखारी भ्रमण के दौरान तालाबों के निर्माण कार्यों का निरीक्षण करते हुए। photo_uttamup.com

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव 4 जून, 2016 को जनपद महोबा के चरखारी भ्रमण के दौरान तालाबों के निर्माण कार्यों का निरीक्षण करते हुए। photo_uttamup.com

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40 दिन में तैयार हो जाएंगे 100 तालाब

चरखारी के तालाबों का दो सौ वर्ष पुराना इतिहास रहा है। चन्देल राजाओं द्वारा जल संरक्षण तथा पेयजल समस्या के निराकरण हेतु तालाब बनवाए गए थे। तब से उनका कभी जीर्णोद्धार नहीं किया गया। जबकि वर्तमान सरकार में सिंचाई विभाग द्वारा मात्र 15 दिनों के अन्दर चरखारी में तालाबों की खुदाई का ऐतिहासिक कार्य किया गया है। बुंदेलखंड के चयनित 100 तालाबों में से 94 तालाबों पर कार्य प्रगति पर है। यह कार्य 40 दिन में पूरा किया जाएगा। जयसागर ताल में लगे सोलर पम्प से चरखारी में पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बुंदेलखंड के अधिकारियों को निर्देश दिया कि जहां कहीं भी तालाबों की भूमि पर अतिक्रमण है उसे सख्ती से हटवाएं तथा खुदाई का कार्य कराएं। इसके साथ-साथ नदियों की स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान दिया जाए।

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तालाबों के साथ बांध बनाने की भी तैयारी

बुंदेलखंड सूखे की समस्या करीब एक दशक से झेल रहा है, लेकिन उसे इस समस्या से तात्कालिक और दीर्घकालिक निजात दिलाने के जैसे प्रयास समाजवादी सरकार के कार्यकाल में हो रही हैं, वैसे पहले कभी नहीं हुए। शायद यही वजह है कि इस क्षेत्र में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की लोकप्रियता भी ज्यादा है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यहां की जनता को बताया कि उनकी पानी की जरूरतें पूरी करने के लिए समाजवादी सरकार सिर्फ तालाबों का ही निर्माण नहीं करा रही, बल्कि यहां बांधों का भी निर्माण कराया जाएगा और यह कार्य भी तेजी से पूरा कराया जाएगा। यहां गौर करने वाली बात यह है कि तालाबों का जलस्तर बना रहे और वे हमेशा पानी से लबालब रहे, इसलिए मुख्यमंत्री ने इसके चारों ओर पौधरोपण करने का भी निर्देश दिया है।

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तालाबों के निर्माण में भी बनाया कीर्तिमान

चरखारी में तालाबों के निर्माण कार्य रिकॉर्ड अवधि में पूरा कराया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इतनी तेज गति से तालाबों का निर्माण पूरा होना पूरी दुनिया में एक कीर्तिमान है। यह काम हर हाल में 15 जून तक पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। यहां ये बात जानना भी जरूरी है कि इन तालाबों का निर्माण राज्य सरकार खुद अपने संसाधनों से करा रही है, केंद्र सरकार से इस काम में कोई सहयोग नहीं मिल सका है। सीएम ने कहा कि अर्जुन सहायक परियोजना में केंद्र सरकार ने दो साल से दो रुपये नहीं दिए हैं। जिससे अर्जुन सहायक परियोजना का काम अधर लटक गया था। इसके बाद अर्जुन परियोजना के लिए 60 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। जिससे इस साल अर्जुन सहायक परियोजना पूरी हो जाए। उन्होंने बताया कि अर्जुन सहायक परियोजना में केंद्र सरकार को 70 और प्रदेश सरकार को 30 फीसदी धनराशि देनी थी।

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पानी की किल्लत दूर करने के लिए दिए 1000 टैंकर

पेयजल समस्या के निराकरण हेतु 1000 टैंकर दिए गये हैं। 5,500 हैण्डपम्प रिबोर किए गए हैं। मनरेगा के तहत हर जरूरतमंद को काम दिया जा रहा है तथा शत-प्रतिशत लक्ष्य भी प्राप्त किया गया है। पूरे प्रदेश में 32,000 तालाबों में से बुन्देलखण्ड में 20,000 तालाब चिन्हित किए गए हैं, जिन पर कार्य कराया जाएगा। उन्होंने तालाबों के साथ-साथ नदियों के पुनर्जीवन पर जोर दिया तथा महोबा की चन्द्रावल नदी को जीवन धारा के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए।

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बुंदेलखंड के 50 गांवों में लगेंगे सोलर साइकिल पेयजल संयंत्र

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुंदेलखंड में समाजवादी साइकिल पेयजल योजना के अन्तर्गत सौर ऊर्जा एवं यांत्रिक ऊर्जा से संचालित संयंत्र स्थापित करने के भी निर्देश दिए है। पहले चरण में पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर 50 गांवों में ऐसे संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। लखनऊ के सरोजनी नगर विकास खंड के ग्राम कुरौनी में राज्य सरकार द्वारा स्थापित सोलर साइकिल पेयजल संयंत्र की उपयोगिता को देखते हुए उन्हें यह निर्देश दिया। इस संयंत्र को चलाने के लिए विद्युत ऊर्जा की जरूरत नहीं होगी। बल्कि यह संयंत्र सौर ऊर्जा से चलाया जा सकेगा। सौर ऊर्जा न होने पर सूर्यास्त के बाद इस पम्प को साइकिल पैडल से पैडलिंग करके चलाया जा सकता है तथा संयंत्र में लगे अल्ट्रा फाइन फाइबर फिल्टर एवं क्लोरीनेटर के माध्यम से शुद्ध पेयजल प्राप्त होता रहता है। कुरौनी ग्राम में स्थापित किए गए इस संयंत्र से 24 घण्टे में लगभग 20 हजार लीटर शुद्ध पेयजल ग्रामवासियों को उपलब्ध हो रहा है।

 

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