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सीएम अखिलेश ने पहले खुद परखा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे, फिर जनता को सौंपा

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02 February 2017

पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के बारे में विकिलीक्स ने खुलासा किया था कि वे अपना भोजन पहले दूसरों से टेस्ट कराती थी, फिर खुद करती थीं। इसके बिलकुल ही विपरीत वर्तमान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सामने जब आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे को जनता को सौंपने की बात आई तो उन्होंने कहा- एक्सप्रेस वे पर पहले मैं गाड़ी चलाकर देखूंगा, सब सही हुआ तब जनता के लिए खोलूँगा।

दरअसल अपने प्रदेश की जनता के लिए कुछ भी कर गुजरने का जो जज्बा अखिलेश यादव ने दिखाया है वो आज तक किसी भी मुख्यमंत्री ने नहीं दिखाया। बहुत आये और बहुत गए पर सब के सब सियासत के उसी भेडचाल के शिकार बनते गए जिसमें हमारी लोकतान्त्रिक व्यवस्था न जाने कब की फंसी हुई है। जहाँ भ्रष्टाचार था, घोटाले थे, और गिरे हुए राजनीतिक मूल्य थे। पर अखिलेश यादव ने इन सबसे इतर अपनी एक अलग छवि बनाई और खुद की पहचान एक ऐसे इंसान के रूप में बनाई जो सिर्फ विकास की सियासत करता है, जो दिलों को जीतने की सियासत करता है। अखिलेश यादव के पूरे कार्यकाल में एक भी घोटाला आज तक सामने नहीं आया। सही मायनों में यही है लोकतंत्र की विजय।

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आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे से एक रिकॉर्ड यह भी जुड़ा है कि इसके निर्माण में भूमि अधिग्रहण को लेकर कहीं पर भी कोई शिकायत सुनने में नहीं आई, जबकि यमुना एक्सप्रेस वे के निर्माण में भूमि अधिग्रहण को लेकर तमाम बवाल हुए थे और राज्य सरकार को स्वयं आगे आना पड़ा था। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए 10 जिलों के 232 गांवों में 3,420 हेक्टेयर भूमि 30,456 किसानों से हासिल की गई। इस एक्सप्रेस वे की गुणवत्ता भी अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। इस एक्सप्रेस-वे पर भारतीय वायु सेना ने अपने विमानों को अपरिहार्य परिस्थितियों में उतारने में रुचि व्यक्त की थी, जिस पर इसके डिजाइन में जरूरी पर्वितन करके वायु सेना के विमान उतारने लायक बनाया जा रहा है, यह भी एक रिकार्ड है।

लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे के बन जाने पर देश की राजधानी दिल्ली और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सीधा संपर्क हो चुका है। यह एक्सप्रेस वे यूपी के 10 जिलों से होकर गुजरेती है। इस एक्सप्रेस वे के खुल जाने से इससे जुड़ने वाले आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, औरैया, कन्नौज, कानपुर, मैनपुरी, हरदोई, उन्नाव और लखनऊ जिलों में निकट भविष्य में व्यावसायिक गतिविधियां तेज होंगी। किसान भी अपनी उपज आसानी से और सीधे मंडी तक पहुंचा सकेंगे। क्योंकि एक्सप्रेस-वे के किनारे कृषि मंडियों, स्मार्ट सिटीज, लाजिस्टिक पार्क और फिल्म सिटी की भी स्थापना की जा रही है, जिससे रोजगार के अतिरिक्त अवसर पैदा होंगे। यूपीडा द्वारा ईपीसी मोड पर निर्मित किए जा रहे आगरा-लखनऊ प्रवेश नियंत्रित ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे पर हैंडलूम तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों, शीतगृहों के निर्माण एवं भंडारण तथा दुग्ध आधारित उद्योगों के विकास में उत्प्रेरक का कार्य करेगा। इस मार्ग के निर्मित हो जाने से विभिन्न उद्योगों जैसे-कृषि, हैंडीक्राफ्ट, पर्यटन उद्योग के विकसित होने से रोजगार के नए अवसर खुलेंगे तथा चिकित्सा सेवाओं एवं शैक्षिक गतिविधियों के साथ-साथ फलों, सब्जियों तथा डेयरी उत्पादों का त्वरित परिवहन भी संभव हो सकेगा।

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एक्सप्रेस वे के बीच बीच में सुरक्षा के इंतजाम भी किए हैं। सरकार ने लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर पीएसी की तीन बटालियन को स्थापित किए जाने का फैसला लिया है। पीएसी की तैनाती पर डीजीपी मुख्यालय ने काम करना शुरू कर दिया है। नया एक्सप्रेस-वे होने की वजह से इसके इर्द-गिर्द पीएसी की बटालियन की स्थापना कर रास्ते पर निगरानी रखी जाएगी। एक्सप्रेस-वे पर पुलिस की गाडियों की आवाजाही आम जनता को सुरक्षा का अहसास कराएगा। आने वाले तीन बरसों में डीजीपी मुख्यालय प्रदेश में पीएसी की दस बटालियन का इजाफा करने का रोडमैप तैयार कर रहा है।

आप सोचिये ऐसे कितने नेता हैं देश में जो पहले खुद को आगे रख जनता जनार्दन के लिए काम करते हैं। फिलहाल अखिलेश के इस फैसले की चारों तरफ जमकर तारीफ हो रही है। और दूसरी तरफ विपक्ष हैरान है। उन्हें विरोध के लिए मुद्दे नहीं मिल रहे हैं। जबकि दूसरी तरफ अखिलेश यादव अपने कामों की बदौलत जनता के मुख्यमंत्री के रूप में उनके दिल पर छाए हुए हैं।

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