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तरक्की में युवाओं को सीएम अखिलेश ने बनाया हमराही, अब कौशल यूनिवर्सिटी देगी विकास को नई ऊंचाई

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June 8, 2016

उत्तर प्रदेश के कौशल विकास मिशन की अपार सफलता और देश-दुनिया में इसकी सराहना के बाद अब अखिलेश सरकार कौशल यूनिवर्सिटी खोलने की महत्वाकांक्षी योजना को अंजाम देने में जुट गई है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश रोजगारपरक शिक्षा देने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा। कौशल यूनिवर्सिटी की स्थापना डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के बाराबंकी स्थित परिसर में की जाएगी। प्रदेश सरकार ने इसके लिए जरूरी कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं। दरअसल उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार ने राज्य के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में कौशल विकास मिशन के महत्व को पहले ही पहचान लिया था, इसलिए इस पर विशेष बल दिया गया। मुख्यमंत्री अखिलेश की यह सोच है कि यदि प्रदेश के नौजवानों को हुनरमंद बनाकर उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध करा दिए जाएं, तो देश एवं प्रदेश तरक्की के मामले में दुनिया के अन्य देशों को पीछे छोड़ सकते हैं।

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कक्षा नौ से बीटेक तक के समकक्ष मिलेंगी डिग्रियां

कौशल यूनिवर्सिटी में छात्रों को कक्षा-09 एवं 10 के समकक्ष प्रमाण-पत्र भी दिए जाएंगे। सरकार की मंशा है कि स्किल यूनीवर्सिटी में विभिन्न विधाओं में स्किल ट्रेड की शिक्षा छात्रों को दिलाकर उन्हें सीधे रोजगार से जोड़ा जा सके। इस कौशल यूनिवर्सिटी में विभिन्न विधाओं में स्किल ट्रेड की शिक्षा दी जाएगी। यहां बीई और बीटेक के समकक्ष स्किल डेवलपमेंट की शिक्षा प्राप्त कर युवाओं को उच्चतम रोजगार भी प्राप्त हो सकेंगे। अभी तक ऐसी व्यवस्था देश के किसी भी राज्य में लागू नहीं हुई है। उत्तर प्रदेश रोजगारपरक शिक्षा प्रदान करने वाला देश का पहला राज्य होगा।

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2013 में लागू हुई थी कौशल विकास नीति

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कौशल विकास नीति जुलाई 2013 में लागू की गई थी। उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है जहां कौशल विकास नीति के अंतर्गत केंद्र सहायतित पांच योजनाओं और राज्य सरकार की एक योजना को समेकित रूप से उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। मिशन के कार्यक्रमों की मदद से 14 से 35 वर्ष के युवाओं को प्रशिक्षित करते हुए उन्हें रोजगार दिलाने की हरसंभव कोशिश की जा रही है।

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हर वर्ग और क्षेत्र के लोगों को मिल रहा है लाभ

कौशल विकास कार्यक्रमों के लाभार्थी युवाओं में महिलाएं, अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति, जनजाति, शारीरिक रूप से अक्षम, गरीब और कम पढ़े-लिखे लोग सम्मिलित हैं। कौशल विकास मिशन के अंतर्गत शामिल योजनाओं के लिए केंद्र और राज्य सरकार से प्राप्त धनराशि के अलावा जरूरत पड़ने पर मदद के लिए स्टेट स्किल डेवलपमेंट फंड बनाया गया है। कौशल विकास मिशन द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं का मूल्यांकन और प्रमाणीकरण राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त संस्थाओं डीजीईएंडटी और एनएसडीसी द्वारा कराया जाता है।

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1817 प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से हुनरमंद बन रहे युवा

एमईएस कोर्स का मूल्यांकन डीजीईएंडटी और आरडीएटी कानपुर के माध्यम से कराया जाता है। यूपीएनओएस कोर्सेज का एसेसमेंट कराने के लिए एनएसडीसी से उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने अनुबंध किया है। प्रशिक्षणार्थियों के मूल्यांकन और प्रमाणीकरण के लिए अभी तक 16 एसएससी से सर्विस लेबल एग्रीमेंट किया जा चुका है। अभी तक 110 बड़े निजी प्रशिक्षण प्रदाता, 15 लघु निजी प्रशिक्षण प्रदाता, 13 फ्लैक्सी एमओयू और 142 राजकीय प्रशिक्षण प्रदाता मिशन के साथ जोड़े जा चुके हैं। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा निजी प्रशिक्षण प्रदाताओं के प्रदेश के समस्त जनपदों में वर्तमान में 1817 प्रशिक्षण केंद्र स्थापित कराए जा चुके हैं।

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एक लाख युवाओं को मिल चुका है रोजगार

कौशल विकास मिशन के कार्यक्रमों के माध्यम से अब कुल 23.18 लाख युवाओं को कौशल विकास मिशन के अंतर्गत यूपी में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। समय-समय पर कौशल विकास मिशन परिसर में रोजगार मेलों का आयोजन किया जा रहा है। प्रशिक्षण प्रदाताओं द्वारा अब एक लाख से अधिक युवाओं को रोजगार भी दिया जा चुका है।

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मिशन से लोहिया ग्राम भी लाभांवित

कौशल विकास मिशन के सचिव ने बताया कि खास बात यह है कि इस मिशन के जरिए लोहिया ग्राम समग्र विकास योजना को लाभ दिया जा रहा है। 94 फीसदी गांवों को इसका लाभ मिल चुका है। यही नहीं लंबे समय के तकनीकी प्रशिक्षण वाले कोर्स यानी कि आईटीआई के लिए भी सरकार ने नई योजनाएं शुरू की हैं। मसलन नॉन-पॉपुलर कोर्स बंद करके पॉपुलर कोर्स को बढ़ावा देना और नए राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं में करीब ढाई हजार अनुदेशकों की तैनाती करना।

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यूपी के कौशल विकास मिशन का कायल हुआ केंद्र

उत्तर प्रदेश में कौशल विकास मिशन के क्षेत्र में किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों का कायल केंद्र सरकार भी है। उत्तर प्रदेश को इस मिशन के माध्यम में हुनरमंद बनाने के मामले में सर्वोत्तम राज्य बताते हुए केंद्र सरकार मिशन को पहले ही पुरस्कृत कर चुकी है। ऐसोचैम द्वारा दिल्ली में आयोजित ‘समिट कम अवार्ड्स ऑन स्किलिंग इण्डिया-द वे फॉरवर्ड’कार्यक्रम में केन्द्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री श्री राजीव प्रताप रूडी ने कौशल विकास के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के कार्यों की तारीफ की और देश भर में उत्तर प्रदेश को सर्वश्रेष्ठ राज्य चुना, जिसके आधार पर प्रदेश को पुरस्कृत किया गया था।

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यूनेस्को भी दे चुका है बेस्ट स्टेट का खिताब

हाल ही में कौशल विकास मिशन में अहम योगदान देने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की शैक्षिक इकाई यूनेस्को ने उत्तर प्रदेश को बेस्ट स्टेट का खिताब दिया है। यूनेस्को की ओर से 16 मई को पेरिस में उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि को सम्मानित किया गया। यूपी को बेस्ट स्टेट का खिताब देते हुए यूनेस्को ने कहा कि राज्य में युवाओं को स्किल डेवलपमेंट के जरिए हुनरमंद बनाने की कोशिश काबिल-ए-तारीफ है। यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक संगठन) संयुक्त राष्ट्र संघ की शैक्षिक इकाई है। इसका कार्य शिक्षा, प्रकृति तथा समाज विज्ञान, संस्कृति तथा संचार के माध्यम से अंतराष्ट्रीय शांति को बढ़ावा देना है। इसका मुख्यालय पेरिस, फ्रांस में है।

 

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