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अल्पसंख्यकों की बेहतरी का रास्ता तैयार कर रहे सीएम अखिलेश

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उत्तर प्रदेश की आबादी में अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व करीब 20 फीसदी है। यानी उत्तर प्रदेश का हर पांचवां व्यक्ति अल्पसंख्यक है। ऐसे में इस वर्ग के विकास के बिना उत्तर प्रदेश की तरक्की की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। यहां एक बात और जान लेना महत्वपूर्ण है कि अल्पसंख्यकों में मुस्लिमों के अलावा सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी समुदाय के लोग भी आते हैं। हालांकि उत्तर प्रदेश की आबादी का लगभग 95 फीसदी हिस्सा मुस्लिमों का है और उसमें से बड़ी तादाद ऐसे मुसलमानों की है जो पिछड़ा वर्ग से ताल्लुक रखते है और सामाजिक व आर्थिक रूप से हाशिए पर हैं, जबकि इस वर्ग का उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान है। वाराणसी के बनारसी साड़ी के निर्माता हों, या फिर भदोही का कालीन उद्योग, मुरादाबाद का पीतल उद्योग हो या लखनउ की चिकनकारी, बाराबंकी की जरदोजी हो या फिर गोरखपुर का हथकरघा उद्योग, अल्पसंख्यकों या कहें मुस्लिम समुदाय का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन उपेक्षा और राजनीति के चलते समाजवादी पार्टी की सरकारों के अलावा इस समुदाय को मुख्यधारा में लाकर प्रदेश की खुशहाली से जोड़ने के प्रयास कम ही हुए हैं। जबकि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अल्पसंख्यकों की बेहतरी सुनिश्चित करते हुए उनके सर्वांगीण विकास के कार्यक्रम तैयार किए। राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रहीं विभिन्न योजनाओं में निर्धारित लक्ष्य में से 20 फीसदी काम को इस तरीके से डिजाइन किया, जिससे अल्पसंख्यकों का कल्याण हो सके। प्रदेश के 30 विभागों में संचालित 85 योजनाओं में अल्पसंख्यक समुदाय को इस योजना का लाभ मिल रहा है। ये योजनाएं प्रदेश के सभी जिलों में चलाई जा रही हैं।

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अल्पसंख्यकों की बेहतरी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की कोशिशें यहीं तक सीमित नहीं हैं। हाल ही में उनकी कैबिनेट ने इस वर्ग विशेष के कल्याण से जुड़े कई कार्यक्रमों को मंजूरी दी है, जो इस वर्ग की सामाजिक व आर्थिक रूप से मुख्यधारा में शामिल होने का रास्ता खोलेगा। अन्य योजनाओं के माध्यम से अल्पसंख्यकों को फायदा तो पहुंचाया ही जा रहा है। इसके अलावा इस वर्ग के छात्र-छात्राओं की शिक्षा और उनकी बेटियों की शादी के लिए भी प्रभावी काम किए जा रहे है।

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अल्पसंख्यकों की बेटियों की शादी के लिए अनुदान हुआ दोगुना

अल्पसंख्यक समुदाय के गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को बेटियों की शादी के लिए अब अखिलेश सरकार 20 हजार रुपये अनुदान देगी। यही नहीं, अनुदान के लिए आवेदकों की आय सीमा भी बढ़ा दी गई है। मौजूदा समय में मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, बौद्ध, पारसी एवं जैन समुदाय के गरीब अभिभावकों की पुत्रियों की शादी के लिए 10 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जा रही है। इसे बढ़ाकर 20 हजार रुपये कर दिया गया है। आर्थिक मदद के लिए अभी तक ग्रामीण क्षेत्र में 19,884 रुपये और शहरी क्षेत्र के लिए 25,546 रुपये आय की सीमा तय थी। इसे बढ़ाकर शहरी क्षेत्र में 56,460 और ग्रामीण क्षेत्र में 46,080 रुपये प्रतिवर्ष निर्धारित की गई है। यह अनुदान एक परिवार की अधिकतम दो पुत्रियों के विवाह के लिए दिया जाएगा योजना के तहत पति की मृत्यु के बाद निराश्रित महिला अथवा दिव्यांग आवेदक को वरीयता दी जाएगी। योजना के तहत लाभार्थियों को अनुदान ई-पेमेंट के जरिए सीधे लाभार्थी के खाते में ट्रांसफर की जाएगी।

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छात्र-छात्राओं छात्रवृत्ति में तीन गुना इजाफा

इस समुदाय के छात्र-छात्राओं की शिक्षा में धन की बाधा को दूर करते हुए इनकी छात्रवृत्ति में करीब तीन गुना वृद्धि की है। अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को अब सालाना 2250 रुपये की छात्रवृत्ति मिलेगी। यह व्यवस्था चालू शैक्षणिक सत्र से ही लागू हो जाएगी। इसमें भी अल्पसंख्यक वर्ग के अभिभावकों की वार्षिक आय की सीमा बढ़ाकर अधिकतम दो लाख रुपये की दी गई हैं। इससे इस फैसले का लाभ अब ज्यादा विद्यार्थी उठा सकेंगे। पहले अल्पसंख्यक वर्ग के विद्यार्थियों को अधिकतम 720 रुपये सालाना दिए जाने की व्यवस्था थी। कैबिनेट के फैसले के बाद अब पूर्व दशम छात्रवृत्ति के पात्र अभ्यर्थियों को 150 प्रति माह अधिकतम दस माह के लिए 1500 रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा इन्हें भत्ते के रूप में 750 रुपये एकमुश्त मिलेंगे। यानी छात्रों को 2250 रुपये सालाना दिया जाएगा। छात्रवृत्ति सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में राज्य कोषागार से आनलाइन भेजी जाएगी। इससे पहले भी मुख्यमंत्री ने अपने बजट में अल्पसंख्यकों की शिक्षा को लेकर खास ध्यान दिया था।

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अरबी-फारसी मदरसों के मुलाजिमों को मिलेगा नियमित वेतन

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के मंत्रिपरिषद ने राज्य सहायता प्राप्त अरबी, फारसी मदरसों के मुलाजिमों को नियमित वेतन देने का भी रास्ता साफ कर दिया है। इसके लिए उत्तर प्रदेश मदरसा विधेयक 2016 को विधानसभा में पारित कराया जाएगा। कैबिनेट ने विधेयक के पारित होने के बाद वेतन की पूरी राशि का भुगतान राज्य सरकार करेगी। इससे पहले भी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने बजट में मान्यता प्राप्त मदरसों व मकतबों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा प्रदान किए जाने हेतु 394 करोड़ रुपये की व्यवस्था की थी।

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बुनकरों को रियायत

इससे पहले मुख्यमंत्री ने हथकरघा और पावरलूम को बढ़ावा देने की घोषणा भी अपने बजट में की थी। जिस पर काम चल रहा है। पावरलूम विकास योजना के लिए 15 करोड़ रुपये की व्यवस्था बजट में की गई है। वहीं, बुनकरों का आर्थिक सुरक्षा देने की भी तैयारी है। 60 वर्ष से अधिक आयु के हथकरघा बुनकरों के लिए पेंशन योजना की घोषणा की गई है। तो उनके कारोबार को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने बुनकरों को रियायती दरों पर बिजली देने का ऐलान किया हैं।

मुख्यमंत्री की ये कोशिशें निश्चित तौर पर अल्पसंख्यक वर्ग को विकास में मुख्यधारा में शामिल करने का रास्ता तैयार कर रही हैं। सभी वर्ग की तरक्की के साथ उत्तर प्रदेश के सर्वांगीण विकास का यह सूत्र उन्हें दूसरे नेताओं से अलग व विशिष्ट बनाता है।

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