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बुंदेलखंड की तस्वीर और तकदीर बदल रहे सीएम अखिलेश

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July 12, 2016

काले-गोरे, रंग-बिरंगे पत्थरों सहित ग्रेनाइट, एल्युमिनियम, क्रिस्टल के अकूत भंडारा वाला बुंदेलखंड पिछले 10 वर्षों से बूंद-बूंद पानी को तरसता रहा था। पर उसे पानी मुहैया कराने के बजाए यहां मनमाने तरीके से खनन होते रहे। इन सबके बीच दुखद रहा तंत्र की बेरूखी। एक तो बुंदेलखंड की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां के विकास पर पानी की कमी और भूमि अनुपजाऊ दो तरफा प्रहार करते हैं। वहीं बिजली और रोजगार की दिक्कतें भी यहां आम रही हैं। विकास के प्रतिकूल चौतरफा स्थिति होने के साथ पूर्ववर्ती सरकारों ने भी यहां की बेहतरी के लिए कभी पूरे मनोयोग से नहीं सोचा। हां, यहां की त्रासदी पर सियासत की बात जमकर हुई। पर सुविधाओं की बात हुई तो केंद्र की सरकारों ने भी कदम पीछे खींच लिए। ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार को अपने दम पर बुंदेलखंड की बदहाली दूर करने के लिए आगे आना पड़ा। सही सोच और पूरे मनोयोग से बढ़ाया गया कदम न सिर्फ बुंदेलखंड को अभी तात्कालिक तौर पर राहत पहुंचा रहा है। बल्कि आने वाले वर्षों में सूखे से निपटने का रास्ता भी तैयार कर रहा है।

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दरअसल बुंदेलखंड के सूखे की जब भी बात होती है तो एक बार सीधे तौर पर सामने आती है कि लंबे असरे से यहां पेड़ों की बेतहाशा कटाई की गई। लगातार पेड़ों की कटाई से इस क्षेत्र की वनस्पति को भारी नुकसान पहुंचा है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में बारिश की मात्रा में लगातार कमी आई है और यह क्षेत्र लगभग हर साल सूखे की चपेट में आ जाता है। जानकारों का मानना है कि अगर इस क्षेत्र को सूखे से बचाना है तो लगभग एक तिहाई क्षेत्र में पौधरोपण करना ही होगा। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुंदेलखंड की इस जरूरत पर गौर किया और इस वर्षा के सीजन में अकेले बुंदेलखंड क्षेत्र में ही 5 करोड़ पौधे लगाने का निर्णय लिया। निसंदेह पौधे लगाने से सूखे का तत्काल तो कोई हल नहीं निकलने वाला है। शायद यही वजह भी रही है कि पिछले सरकारों में अपने वोटों के लोभ के चलते बुंदेलखंड के दीर्घकालिक लाभ के बारे में नहीं सोचा और यहां सघन पौधरोपण को कभी अपनी योजना में शामिल नहीं किया। दूसरी ओर शायद अपनी इन्हीं सोच की वजह से भी अखिलेश यादव इस क्षेत्र की जनता के चहेते हैं कि उन्होंने सियासी फायदे के बजाय बुंदेलखंड के लाभ के बारे में और ऐसे लाभ के बारे में सोचा जो आने वाले वर्षों में भी बुंदेलखंड को सूखे की त्रासदी से छुटकारा दिलाने में मददगार साबित हो। इसी क्रम में बुंदेलखंड क्षेत्र में वर्षा जल को संरक्षित करने और सूखे से निपटने के लिए सरकार ने एक एनजीओ के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का मन बनाया है।

ये भी पढ़ें : तत्काल राहत के साथ-साथ मुख्यमंत्री आखिलेश ने तैयार कर दिया है बुंदेलखंड को सूखे से उबारने का रास्ता

पांच करोड़ पौधे दिलाएंगे सूखे से निजात

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुंदेलखंड क्षेत्र में पांच करोड़ पौधे लगाने का आदेश पारित किया है। वन विभाग के अनुसार सरकार ने इसके लिए बजट का आवंटन भी कर दिया है। बुंदेलखंड में काम कर रहे पर्यावरणविद् संजय सिंह का मानना है कि उत्तर प्रदेश सरकार की इस योजना के अमल होने से क्षेत्र में न सिर्फ सूखे से निजात मिलेगी बल्कि जानवरों के लिए चारे और पेयजल जैसी समस्याओं से भी मुक्ति मिल जाएगी। हालांकि यह ध्यान देना होगा कियह एक या दो वर्ष की योजना नहीं है बल्कि यह लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। ऐसे में पांच से 10 साल तक इस योजना को चलाते रहना होगा। साथ ही जो पौधे लगाए जाएंगे उनकी देखभाल और निगरानी की व्यवस्था, उनकी उचित देखभाल भी जरूरी है, क्योंकि इन सबके बाद भी एक तिहाई पौधे ही उच्च वृक्षों में परिवर्तित हो पाते हैं। इसलिए सरकार एक लंबी योजना पर काम कर रही है। इस योजना से निश्चित ही आने वाले समय में बुंदेलखंड की तस्वीर और तकदीर बदलने वाली है।

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संवर रहे हैं जल संरक्षण के प्राकृतिक स्रोत

बुंदेलखंड में पेड़ लगाना सूखे से निजात दिलाने की दिशा में एक कदम है तो दूसरा महत्वपूर्ण कदम है यहां जल संरक्षण के प्राकृतिक स्रोतों के संरक्षण का। अखिलेश सरकार यहां किसानों के सहयोग से सूखा प्रभावित सभी सातों जिलों में दो हजार तालाब बना रही है, जो आने वाले दिनों में बुंदेलखंड को सूखे के अभिशाप से छुटकारा दिलाने में मील का पत्थर साबित होंगे। खेत किसान के होंगे तो आधी लागत सरकार भी देगी। किसान चाहें तो मशीन से तालाब की खोदाई न कराकर खुद अपने ट्रैक्टर से खोदाई कर सकते हैं। इससे खोदाई की लागत भी सरकार वाले 50 फीसदी खर्च से उनको मिलेगी। इतना ही नहीं, अगर मानसून धोखा दे गया तो लघु सिंचाई विभाग द्वारा तालाबों में बोरिंग की जाएगी। इसका खर्च सरकार की ओर से 50 फीसदी से दिया जाएगा।

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तालाबों को लबालब करने की भी योजना

तालाबों की गुणवत्ता का ख्याल रखते हुए खोदाई के दौरान निकलने वाली मिट्टी से ही इनकी मेड़ तैयार की जाएगी, जिस पर बहुवर्षीय घास लगाई जाएगी। इनमें नैपियर घास, लैमन ग्रास और सीओ-4 घास होंगी। ताकि तालाब के आसपास का वातावरण हरियाली भरा हो और मेड़ को मजबूती भी मिल सके। इन तालाबों का किसान सिंचाई के लिए पानी लेने के साथ पशुपालन और मछली पालन में भी उपयोग कर सकेंगे।

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विकास का रास्ता भी तैयार

बुंदेलखंड के अकेले चित्रकूटधाम मंडल की सड़कों पर सरकार 52.68 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। अखिलेश सरकार की ओर से बुंदेलखंड विकास निधि से इस मंडल के चारों जनपदों के लिए धनराशि आवंटित कर दी है। सबसे ज्यादा 17 करोड़ 16 लाख रुपये से हमीरपुर में सड़के बनाई जा रही हैं। बांदा में 16 करोड़ 51 लाख 76 हजार, महोबा में 11 करोड़ 62 लाख 91 हजार रुपये और सबसे कम चित्रकूट में सात करोड़ 37 लाख 21 हजार रुपये से सड़कें बनेंगी। पिछले वित्तीय वर्ष 2015-16 में बुंदेलखंड विकास निधि से मंडल को  25 करोड़ रुपये मिले थे। एक बार फिर शासन ने विधायकों और विधान परिषद सदस्यों को उनके प्रस्ताव के मुताबिक सड़कें बनवाने का मौका दिया है।

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