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शुक्र है कालाधन और नोटबंदी के शोर में किसी ने तो समझा दुखियारी बेटी का दर्द

 

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30 November 2016

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की सरकार के नोटबंदी के फैसले से कालाधन पर रोक लग पाएगी या नहीं यह तो भविष्य ही बताएगा। पर इसका फैसले का शोर इतना है कि एक दुखियारी बेटी की आवाज को प्रधानमंत्री मोदी ने अनसुना कर दिया। वह भी तब जब प्रधानमंत्री सीना ठोंक कर खुद के प्रधानसेवक होने का दावा करते हैं। शुक्र है अभी कुछ राजनीतिज्ञों में मानवता और उदारता बची हुई है। जी हां हम बात कर रहे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) की। जहां जूही की पीढ़ा पीएम मोदी या उनके सिपहसालारों के कान तक नहीं पहुँच सकी, वही सीएम अखिलेश ने उसके दर्द का अहसास करते हुए मदद का हाथ बढ़ाया है । पहले भी ऐसे कई मौके आ चुके हैं जब मोदी सरकार से मदद की आस टूटने से व्यथित लोगों को अखिलेश यादव में सहारा दिया है ।

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नोटबंदी के फैसले के बाद आगरा की जूही प्रकाश को कैंसर के पीड़ित पिता नित्य प्रकाश के इलाज में जब दिक्कतें आने लगी तो उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) से मदद की गुहार लगाई। 25 साल की जूही ने अपना दर्द साझा करते हुए उन्हें बताया कि उसके पिता अस्पताल में भर्ती हैं। लेकिन नोटबंदी की वजह से वह अपने बीमार पिता के इलाज के लिए भी पैसा नहीं निकाल पा रही। उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) को ट्वीट किया कि उसकी मां की मौत तीन साल पहले ही कैंसर से हो चुकी है, अब वह अपने पिता को खोना नहीं चाहती है।

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मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले के बाद बीमार पिता की दवाएं खरीदने के लिए जब कई दिनों तक कोशिश करने पर भी बैंक से पैसा नहीं निकला, तो जूही ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) से मदद मांगने के लिए ट्विटर का सहारा लिया। जूही ने पत्र लिखकर ट्विटर के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी से अपनी पीड़ा जाहिर की कि वह अस्पताल में कैंसर से जूझ रहे पिता को अकेला छोड़कर पैसे के लिए बैंक की लंबी लाइन में खड़ी नहीं रह सकती। क्योंकि पिता का ख्याल रखने के लिए वह परिवार की अकेली सदस्य है। परिवार में दो भाई भी हैं, लेकिन उनमें से एक भाई भी बहुत ज्यादा बीमार है और उसका हरिद्वार के एक आश्रम में इलाज चल रहा है। जबकि दूसरे भाई की कमाई से ही घर का खर्च और पिता व भाई का इलाज हो रहा है।

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जूही ने बताया कि वह तीन महीने से पैसे की कमी से जूझ रही है। लेकिन नोटबंदी ने उसकी मुश्किल और ज्यादा बढ़ा दी है। उसके पास पिता के लिए दवाएं खरीदने के लिए भी पैसा नहीं बचा है। जूही के पिता जूतों का कारोबार करते थे, लेकिन मां के इलाज में बहुत खर्च होने से उनकी माली हालत पहले ही खराब हो चुकी थी। अब जो कुछ जमा पूंजी पिता के खाते में है उससे उनका मुश्किल से इलाज हो पा रहा था। ऑपरेशन कराने को तो पहले भी पैसे नहीं थे। अब नोटबंदी से दवाएं खरीदना भी मुश्किल हो गया है।

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जूही के इस ट्वीट के बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi)  या उनकी सरकार का कोई भी सदस्य उसकी मदद को आगे नहीं आया। हालांकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तुरंत इसका संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने फौरन आगरा के डीएम गौरव दयाल को मदद करने का निर्देश दिया। इस आदेश के बाद तहसीलदार सदर विश्वेश्वर सिंह ने जूही को राजीव गाँधी कैंसर इंस्टिट्यूट, नई दिल्ली में उसके पिता के इलाज के लिए 6.5 लाख रुपये सौंपे हैं।

नोटबंदी के बाद मोदी सरकार भले ही दावा कर रही हो कि इस फैसले से आम लोगों को आने वाले समय में फायदा होगा। लेकिन इस वक्त का सबसे बड़ा सच तो ये है कि इस फैसले ने कई लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शुक्र है कि उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के रूप में एक ऐसा उदार मुख्यमंत्री है, जो जनता के दर्द को अपना समझता है और हर वक्त मदद के लिए तत्पर रहता है।

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