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सीएम अखिलेश ने दिए बेहतर शिक्षा के अवसर, छात्र-छात्राओं को मिला विकास का नया आकाश

June 14, 2016

कोई भी देश शिक्षा के बिना प्रगति नहीं कर सका है। ऐसे में उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की तरक्की के लिए यह बात और महत्वपूर्ण हो जाती है। नई सोच और नए जोश के साथ उत्तर प्रदेश की बागडोर संभालते ही उत्तर प्रदेश की प्रगति में शिक्षा के अहम योगदान की इस बात को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बखूबी भांप लिए थे, लिहाजा अपनी सरकार के पहले ही बजट में उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में करीब 20 प्रतिशत बजट आवंटित किया। इसके नतीजे भी सामने दिखने लगे है। आज समाजवादी सरकार विद्यार्थियों को तकनीकी रूप से आगे बढाने के लिये लैपटॉप दे रही है तो वहीं माध्यमिक स्कूलों में उन्हें व्यवसायिक शिक्षा भी दी जा रही है। इंटर पास करने वाली गरीब परिवारों की छात्राओं को एकमुश्त तीस हजार रुपये की मदद दी जा रही है ताकि आगे पढाई जारी रखने में उन्हें कोई दिक्कत ना आए। दूसरी ओर बेसिक और माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए भी अखिलेश सरकार ने विशेष प्रयास किए हैं। आइए गौर करें उन बुनियादी बातों पर जो अखिलेश सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में की हैं।

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15 लाख से अधिक मेधावियों को दिए लैपटॉप, 80 हजार और देने की तैयारी

तकनीकी और सूचना क्रांति के दौर में उत्तर प्रदेश के मेधावी कहीं पीछे नहीं रहें, इसलिए समाजवादी सरकार ने फ्री लैपटॉप वितरण की योजना शुरू की। अब प्रदेश में करीब 15 लाख छात्र-छात्राओं को लैपटॉप वितरित किया जा चुका है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इतनी बड़ी संख्या में फ्री लैपटॉप वितरित कर कीर्तिमान स्थापित किया है। खुद लैपटॉप निर्माता कंपनी मान चुकी है कि दुनिया में इतनी बड़ी संख्या में कभी भी लैपटॉप का वितरण नहीं किया गया। वैसे समाजवादी सरकार ने अब 80 हजार और फ्री लैपटॉप वितरण का निर्णय लिया है।

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गरीब छात्राओं को मिल रहा कन्या विद्याधन का लाभ

प्रदेश में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अखिलेश सरकार गरीब परिवारों की बेटियों को एकमुश्त 30 हजार रुपये देने की योजना चला रही है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की छात्राओं को इंटरमीडिएट पास करने पर यह रकम दी जाती है। जिन परिवारों की सालाना आय 36000 रुपये तक है, वे इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। वर्ष 2015-16 में इस योजना के तहत 237 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इस वित्तीय वर्ष में भी इतनी ही रकम खर्च करने की तैयारी है।

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न्याय पंचायतों में खुल रहे कन्या माध्यमिक विद्यालय

छात्राओं को शिक्षा का अवसर उनके घरों के आसपास ही मिले, इसलिए सरकार ने सेवित विकास खंडों की दूसरी न्याय पंचायत में निजी प्रबंध तंत्र द्वारा एक कन्या माध्यमिक विद्यालय की स्थापना की योजना लागू की है। इस योजना के तहत हर विद्यालय को दो किस्तों में 20 लाख रुपये दिए जाते हैं। इसके अलावा स्कूलों के भवन निर्माण पर भी भारी-भरकम रकम खर्च की जा रही है। वर्ष 2014-15 में स्कूलों के भवन निर्माण या पुनर्निर्माण के मद में 14 करोड़ रुपये दिए गए थे। वर्ष 2015-16 में 50 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई। मौजूदा वित्तीय वर्ष में भी 10 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

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1247 उच्च प्राथमिक विद्यालयों को बनाया राजकीय हाईस्कूल

प्रदेश ने नेशनल सेकंडरी एजुकेशन के अभियान के तहत 1247 उच्च प्राथमिक विद्यालयों को उच्चीकृत कर राजकीय हाईस्कूल बनाया गया। दूसरी ओर, शिक्षा अवसरों ने बढ़ोतरी के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद ने 2634 वित्तविहिन विद्यालयों को मान्यता प्रदान की गई है। इसके अलावा केंद्रीय विद्यालयों की तर्ज पर मॉडल स्कूलों का भी निर्माण किया जा रहा है। शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े 680 विकासखंडों में एक मॉडल स्कूल की स्थापना की व्यवस्था की गई है।

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1.14 लाख शिक्षकों का रिकॉर्ड हुआ कम्प्यूटरीकृत

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की महत्वाकांक्षा वाली इस योजना के तहत 1 लाख 14 हजार शिक्षकों और शिक्षणेतर कर्मचारियों के वेतन, जीपीएफ और पेंशन आदि सेवा संबंधी आंकड़ों का शत-प्रतिशत कम्प्यूटराइजेशन किया जा चुका है। सभी शिक्षकों को कम्प्यूटराइज्ड बिल के माध्यम से वेतन का भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है। इसके अलावा प्रदेश के सभी राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में 6645 रिक्त पदों के सापेक्ष भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। राज्य सरकार ने हर पांच किलोमीटर पर एक राजकीय स्कूल स्थापित करने का भी निर्णय लिया है।

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व्यावसायिक स्कूल खोले, ताकि आत्मनिर्भर बनें हमारे होनहार

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छात्र-छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने 892 माध्यमिक विद्यालयों में इंटरमीडिएट स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा देने की भी काम किया है। 100 राजकीय विद्यालयों में 4 नवीन रोजगारपरक पाठ्यक्रम – आॅटोमोबाइल, रिटेल, सिक्योरिटी और आईटी लागू किए जाने का भी फैसला किया गया है। दूसरी ओर, व्यावायिक शिक्षा योजना के तहत 892 राजकीय और सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में इसकी शिक्षा दी जा रही है। योजना के तहत 16 पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। करीब 50 हजार छात्र-छात्राएं इससे हर साल लाभांवित हो रहे हैं।

 

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