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सीएम अखिलेश यादव ने आबादी के अनुपात में अल्पसंख्यकों को दिया योजनाओं में लाभ

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02 February 2017

अल्पसंख्यकों को देश के तमाम राजनीति दल अक्सर ही वोटबैंक की तरह इस्तेमाल करते हैं, पर इस मामले में अगर किसी एक पार्टी ने उनकी जरूरतों को समझा है तो वो है समाजवादी पार्टी और उसके मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने। उत्तर प्रदेश की आबादी में अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व करीब 20 फीसदी है। यानी उत्तर प्रदेश का हर पांचवां व्यक्ति अल्पसंख्यक है। ऐसे में इस वर्ग के विकास के बिना उत्तर प्रदेश की तरक्की की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। यहां एक बात और जान लेना महत्वपूर्ण है कि अल्पसंख्यकों में मुस्लिमों के अलावा सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी समुदाय के लोग भी आते हैं। हालांकि उत्तर प्रदेश की अल्पसंख्यकों आबादी का लगभग 95 फीसदी हिस्सा मुस्लिमों का है।

इस बात का ध्यान रखते हुए अखिलेश यादव ने अपनी सरकार की सभी योजनाओं में अल्पसंख्यकों के लिए बीस प्रतिशत का कोटा दिया है, जिससे ये तय हो सके कि गरीब और जरूरतमंद अल्पसंख्यकों तक सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। अखिलेश यादव का मानना है कि प्रमुख सरकारी योजनाओं में अल्पसंख्यकों को बीस प्रतिशत कोटे को संविधान में भी शामिल किया जाना चाहिए। एक कार्यक्रम में बोलते हुए सीएम अखिलेश ने कहा था कि अल्पसंख्यकों को सम्मान के साथ जीवन जीने का मौका मिल सके इसके लिए हमने बहुत सारी योजनायें लागू की, उन्हें सही समय पर पूरा किया और आज जनता के बीच में हम अपने कामों को लेकर जा रहे हैं क्योकि हमारे पास बताने और दिखाने को बहुत कुछ है।

सीएम अखिलेश ने बताया था कि अल्पसंख्यकों को बीस प्रतिशत कोटा देने की बात पर कुछ लोग कोर्ट चले गए थे लेकिन हमने वहां भी लड़ाई लड़ी, और अंत में कोर्ट ने भी हमारे फैसले को सही माना।

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उत्तर प्रदेश की अल्पसंख्यकों आबादी में से बड़ी तादाद ऐसे मुसलमानों की है जो पिछड़ा वर्ग से ताल्लुक रखते है और सामाजिक व आर्थिक रूप से हाशिए पर हैं, जबकि इस वर्ग का उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान है। वाराणसी के बनारसी साड़ी के निर्माता हों, या फिर भदोही का कालीन उद्योग, मुरादाबाद का पीतल उद्योग हो या लखनऊ की चिकनकारी, बाराबंकी की जरदोजी हो या फिर गोरखपुर का हथकरघा उद्योग, अल्पसंख्यकों या कहें मुस्लिम समुदाय का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन उपेक्षा और राजनीति के चलते समाजवादी पार्टी की सरकारों के अलावा इस समुदाय को मुख्यधारा में लाकर प्रदेश की खुशहाली से जोड़ने के प्रयास कम ही हुए हैं। जबकि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अल्पसंख्यकों की बेहतरी सुनिश्चित करते हुए उनके सर्वांगीण विकास के कार्यक्रम तैयार किए। राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रहीं विभिन्न योजनाओं में निर्धारित लक्ष्य में से 20 फीसदी काम को इस तरीके से डिजाइन किया, जिससे अल्पसंख्यकों का कल्याण हो सके। प्रदेश के 30 विभागों में संचालित 85 योजनाओं में अल्पसंख्यक समुदाय को इस योजना का लाभ मिल रहा है। ये योजनाएं प्रदेश के सभी जिलों में चलाई जा रही हैं।

अल्पसंख्यक समुदाय के गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को बेटियों की शादी के लिए अब अखिलेश सरकार 20 हजार रुपये अनुदान दे रही है। यही नहीं, अनुदान के लिए आवेदकों की आय सीमा भी बढ़ा दी गई। मौजूदा समय में मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, बौद्ध, पारसी एवं जैन समुदाय के गरीब अभिभावकों की पुत्रियों की शादी के लिए 10 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जा रही है। इसे बढ़ाकर 20 हजार रुपये कर दिया गया है। आर्थिक मदद के लिए अभी तक ग्रामीण क्षेत्र में 19,884 रुपये और शहरी क्षेत्र के लिए 25,546 रुपये आय की सीमा तय थी। इसे बढ़ाकर शहरी क्षेत्र में 56,460 और ग्रामीण क्षेत्र में 46,080 रुपये प्रतिवर्ष निर्धारित की गई है।

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इस समुदाय के छात्र-छात्राओं की शिक्षा में धन की बाधा को दूर करते हुए इनकी छात्रवृत्ति में करीब तीन गुना वृद्धि की है। अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को अब सालाना 2250 रुपये की छात्रवृत्ति मिलती है। इसमें भी अल्पसंख्यक वर्ग के अभिभावकों की वार्षिक आय की सीमा बढ़ाकर अधिकतम दो लाख रुपये की दी गई। पहले अल्पसंख्यक वर्ग के विद्यार्थियों को अधिकतम 720 रुपये सालाना दिए जाने की व्यवस्था थी। अखिलेश सरकार ने इसे बढ़ाकर 1500 रुपये कर दिए। इसके अलावा इन्हें भत्ते के रूप में 750 रुपये एकमुश्त भी दे रही है, यानि छात्रों को 2250 रुपये सालाना दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के मंत्रिपरिषद ने राज्य सहायता प्राप्त अरबी, फारसी मदरसों के मुलाजिमों को नियमित वेतन देने का भी रास्ता साफ किया। वहीं, बुनकरों का आर्थिक सुरक्षा देने के लिए 60 वर्ष से अधिक आयु के हथकरघा बुनकरों के लिए पेंशन योजना शुरू की।

उत्तर प्रदेश में सियासी समर का रण तैयार हो चुका। ऐसे अल्पसंख्यक समुदाय भी यह जानने समझने की कोशिश करेगा कि आखिर किसने उनके कल्याण के काम किये तो इसे सबसे आगे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव नज़र आते हैं।

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