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सैनिक स्कूल में सीखा अनुशासन का पाठ शासन चलाने में भी आजमाया

 

Akhilesh in army school

27 January 2017

वाकया उस वक्त का है जब अखिलेश यादव राजस्थान में धौलपुर के सैनिक स्कूल में पढ़ाई करते थे। तब उनके पिता मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। स्कूल में उन्हें बतौर मुख्यमंत्री अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। एक तरह से वह पहली बार अपने बेटे से मिलने स्कूल गए थे। स्कूल का पूरा लाव-लश्कर मुलायम सिंह की आगवानी में लगा हुआ था। उनका हेलिकॉप्टर स्कूल के मैदान में उतरा, तो सीनियर क्लास के बच्चे उनके स्वागत के लिए एक कतार में पंक्तिबद्ध खड़े थे, ताकि मुलायम सिंह बारी-बारी से उनसे मिल सकें।  खुद अखिलेश यादव भी कतार में खड़े रहे और मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के आने पर सावधान की मुद्रा में ही उनका स्वागत किया। स्कूल के शिक्षक यह देखकर हैरान रह गए कि अखिलेश यादव भी अपने पिता से मिलने के लिए कतार में सावधान की मुद्रा में खड़े हैं। स्कूल के एक स्टाफ ने इसकी तस्वीर भी कैमरे में कैद कर ली। कार्यक्रम के दौरान भी अनुशासन का पालन करते हुए वह छात्रों के लिए तय स्थान पर ही बैठे रहे। जबकि अखिलेश को पिता मुलायम सिंह यादव के स्कूल में आने का पता था। वह चाहते तो बिना किसी औपचारिकता का पालन किए पिता मुलायम सिंह यादव से अकेले में मिल सकते थे। लेकिन अनुशासन का पाठ जो स्कूल में उन्होंने पढ़ा था, उसके जीवन में पालन पर अडिग रहे।

अनुशासन का यह पाठ अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री बनने के बाद भी अपने कामकाज पर अप्लाई की। विकास की योजनाएं तैयार करने में उन्होंने इसी पाठ का अनुपालन किया और हर साल के लिए विकास का ठोस एजेंडा तैयार किया। सैनिक स्कूल में सीखा अनुशासन का पाठ जीवन और फिर कामकाज में लागू करने का नतीजा था कि उत्तर प्रदेश में शायद पहली बार ऐसा हो रहा है कि जिन योजनाओं का शिलान्यास हुआ वे इसी एक कार्यक्राल में लोकार्पित हो गईं।

अखिलेश यादव की कार्यशैली में अनुशासन का समावेश होने से अधिकारियों का कामकाज भी उसी के अनुरूप हुआ। इससे पूरा उत्तर प्रदेश सिस्टमेटिक कार्य पद्यति से संचालित होने लगा। इसी का नतीजा रहा है कि आगरा‘-लखनए एक्सप्रेस वे हो या फिर लखनए मेटोे का काम तमाम योजनाएं समय से पहले पूरी हो सकीं।

Akhilesh in army school1

अनुशासन कामकाज में ईमानदारी ही नहीं लाती है, बल्कि उसे सही ढंग से क्रियांवित करने में भी देखी जा सकती है। समाजवादी पेंशन योजना हो या फिर कौशल विकास मिशन, अखिलेश सरकार की इसी कार्यशैली का परिणाम रहीं। एक योजना जहां देश की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा बन गई तो दूसरा देश में सर्वश्रेष्ठ। अनुशासित तरीके से संपन्न हुए काम के चलते पहली योजना से 55 लाख परिवारों में खुशियां फैलीं तो दूसरी से 25 लाख युवाओं के लिए रोजगार-स्वरोजगार के द्वार खुल गए।

इस अनुशासन ने ही अखिलेश यादव को सुशासन के लिए प्ररेणा दी। कामकाज में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार दूर करने के लिए उन्हें पूरे प्रदेश में डिजिट लोकतंत्र का बढ़ावा दिया। चाहे किसानों के लिए डीबीटी योजना हो या फिर विभिन्न पेंशन योजना का लाभ देना हो, अखिलेश यादव ने सुनिश्चित किया कि लाभार्थियों के खाते में सीधे पैसा पहुंचे। इसी तरह जनसुनवाई पोर्टल के जरिए नागरिकों को अपनी शिकायतें के सही समाधान की सुविधा दी गई। यूपी 100, और वीमेन पाॅवर लाइन 1090 भी इसी अनुशासित और ईमानदार कोशिश का परिणाम हैं।

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