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लखनऊ मेट्रो का आगाज कर सीएम अखिलेश ने जोड़ा यूपी के इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय

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31 January, 2017

लखनऊ मेट्रो अखिलेश यादव का वो सपना था जिसने उन्होंने मुख्यमंत्री बनने के बाद दिन रात देखा और इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने दिन रात एक करके काम किया और आज आखिरकार वो घड़ी आ गयी जब उन्होंने आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे के बाद प्रदेश को लखनऊ मेट्रो की सबसे बड़ी सौगात से नवाजा है।

दिसम्बर में लखनऊ मेट्रो का आगाज होने के साथ वह दिन लखनऊ वासियों के लिए एक यादगार पल बन गया, जब लोगों ने अपने शहर में मेट्रो को दौड़ते देखा। लखनऊ मेट्रो के उद्घाटन पर हुए भव्य कार्यक्रम में अखिलेश यादव, उनकी पत्नी संसद डिंपल यादव, आजम खान और समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव मौजूद थे। उदघाटन के मौके पर अखिलेश यादव की एक और मानवीय चेहरा देखने को मिला जब उन्होंने इस मेट्रो को बनाने वाले तमाम इंजीनियरों के साथ उनके माता-पिता को भी आमंत्रित किया और काम करने वाले मजदूरों से भी मुलाकात की।

लखनऊ मेट्रो महिला सशक्तिकरण की भी पहचान है। इसीलिए तब सांसद डिम्पल यादव ने लखनऊ मेट्रो की चाबियां इलाहाबाद की रहने वाली महिला पायलेट प्रतिभा और प्राची को सौंपी और फिर मुख्यमंत्री ने हरी झंडी दिखा कर मेट्रो को रवाना किया।

लखनऊ मेट्रो का ये ट्रायल करीब तीन महीने तक चलेगा और मार्च के अंत में इसे आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। लखनऊ मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन महज दो साल दो महीने के रिकॉर्ड समय में इसे उतार कर एक कीर्तिमान स्थापित किया है। देश में इसके पहले कभी कोई मेट्रो इतनी जल्दी न तो बनाई गयी और न ही चलाई जा सकी। अभी इसका ट्रायल रन ट्रांसपोर्ट नगर से चारबाग़ के बीच होगा। इसमें कुल 8 स्टेशन होंगे। लखनऊ मेट्रो में एक बार में 1100 से ज्यादा लोग सफर कर सकेंगे।

मेट्रोमैन ई. श्रीधरन इस मौके पर मौजूद थे। इन्हीं की देखरेख में पूरी मेट्रो बनाई गई है। तय समय के भीतर ही लखनऊ में मेट्रो दौड़ाने को लखनऊ मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के एमडी कुमार केशव एक बड़ी उपलब्धि मानते हैं। कुमार केशव ने इस प्रोजेक्ट से जुड़ने का फैसला भावुकता में लिया था। दरअसल अपने ही शहर के लोगों को मेट्रो का तोहफा देने के लिए उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में ज्यादा कमाई वाली जिम्मेदारी छोड़ दी। लखनऊ मेट्रो के लिए काम करने का ऑफर मिला तो वे ऑस्ट्रेलिया में एक मेट्रो प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। अच्छा पैसा भी मिल रहा था, पर अपने शहर के लिए काम करने का मौका मिला तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वह बताते हैं – ‘लखनऊ मेट्रो का सिविल वर्क 27 सितंबर 2014 को शुरू हुआ। एक दिसंबर को ट्रायल रन का लक्ष्य दिया गया। दो साल दो महीने में काम पूरा करना बड़ी चुनौती थी। अब तक किसी ने ऐसा नहीं किया था। हमें शून्य से शुरूआत करनी थी। हमने अब कर दिखाया है। 26 मार्च से लखनऊ के लोग मेट्रो में यात्रा करा सकेंगे।’

नार्थ साउथ कॉरिडोर के बाद अब ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के चारबाग से बसंतकुंज पर काम होना है। दिल्ली की तरह लखनऊ को भी अगले चरण के मेट्रो प्रोजेक्ट की जरूरत होगी। नार्थ-साउथ कॉरिडोर को रेड लाइन का नाम दिया गया है। ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर का रंग क्या होगा, इसका फैसला प्रोजेक्ट की शुरूआत के साथ ही होगा। कहने की ज़रुरत नहीं है कि लखनऊ मेट्रो ने उत्तर प्रदेश के इतिहास में चार चाँद लगा दिए हैं और अखिलेश यादव ने वो कर दिखाया है जो आज तक इस प्रदेश का कोई मुख्यमंत्री नहीं कर पाया।

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