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स्मार्ट एजुकेशन देकर नए दौर की कहानी लिख रहे सीएम अखिलेश

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Photo_ www.prokerala.com

July 26, 2016

समय बदल रहा है। हर ओर सूचना क्रांति से बदलाव आ रहे हैं। इसका सबसे गहरा असर शिक्षा प्रणाली पर पड़ रहा है। परंपरागत कक्षाएं स्मार्ट क्लास रूम में परिवर्तित हो रही हैं। अब शिक्षा महज कुछ किताबों तक सीमित नहीं हैं। सूचना का दायरा इस कदर बढ़ा है कि दुनिया भर का ज्ञान और जानकारियां कम्यूटर या लैपटॉप के जरिए घर के आंगन तक आसानी से पहुंच रही हैं। ऐसे में पढ़ाई-खिलाई के तौर-तरीकों में बदलाव भी लाजिमी है। इन सभी बदलावों में उत्तर प्रदेश कहां खड़ा होता है? क्या उत्तर प्रदेश ने इन बदलावों को आत्मसात किया है। आइए पड़ताल करते हैं कि पिछले सवा चार साल में आधुनिक या हाईटेक होती शिक्षा को लेकर उत्तर प्रदेश में क्या काम हो रहे हैं-

 ई-लर्निंग और ई-लेक्चर

पहले डिप्लोमा सेक्टर की बात करते हैं। देश में पहली बार उत्तर प्रदेश में डिप्लोमा स्तरीय पाठ्यक्रमों की शिक्षा के लिए ई-लेक्चर की व्यवस्था की गई है। इसके लिए पहले चरण में छह पाठ्यक्रमों को चयनित किया गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिग के चार विषयों के ई-लेक्चर की रिकॉर्डिंग कर 270 डीवीडी तैयार की गई है। इनमें से 100 डीवीडी आईआरडीटी कानपुर को मुहैया करा दी गई है। और उन्हें संस्थान की वेबसाइट www.irdt.up.nic.in पर अपलोड किया जा चुका हैं। दो कामन विषयों- एप्लाएड मैथ्स प्रथम व द्वितीय की रिकॉर्डिंग का कार्य एनआईटीटीटीआर चंडीगढ़ में किया जा रहा है। वर्तमान में 77 ई-लेक्चर की रिकॉर्डिंग का काम पूरा हो चुका है।

 वर्चुअल क्लास रूम्स की स्थापना

यह योजना प्रदेश की 101 पॉलीटेक्निक संस्थाओं में शुरू किए जाने की तैयारी की जा रही है। पहले चरण में 13 संस्थाओं में इस योजना को शुरू किया जाएगा। इसके अंतर्गत आईआरडीटी, कानपुर और राजकीय पॉलीटेक्निक, गाजियाबाद में एक-एक ईएमआरसी यानी स्टूडिया स्थापित किए गए है। इनमें 13 संस्थाएं जुड़ी हुई है। इनके माध्यम से छात्र-छात्राओं को ई-कंटेंट उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

 नए पॉलीटेक्निकों की स्थापना

तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में 74 पॉलीटेक्निक संस्थाओं के निर्माण करा ए जा रहे हैं। इनमें से 40 पॉलीटेक्निक संस्थाएं संचालित करा दी गई हैं। 30 को अपने भवन में शिफ्ट कराकर संचालित कराया जा चुका है। 19 संस्थाएं अपने निजी भवनों में संचालित हो गई है। जबकि 11 संस्थएं पास के पॉलीटेक्निक में संचालित कराई जा रही है। अन्य संस्थानों की स्थापना का काम भी तेजी से हो रहा है। जबकि 2016-17 के वित्तीय बजट में 7 नई पॉलीटेक्निकों की स्थापना के लिए धनराशि जारी की जा चुकी है।

 इनोवेशन एंड इन्क्यूवेशन सेंटरों की स्थापना

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय लखनऊ के आर्थिक संसाधनों से एचबीटीआई कानपुर में सिविल और केमिकल इंजीनियरिंग, यूपीटीटीआई कानपुर में टेक्सटाइल इंजीनियरिंग, आईईटी लखनऊ में इलेक्टिकल और इलेक्टानिक, कम्प्यूटर साइंस और इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी और एमएमएमयूटी गोरखपुर में मैकेनिकल इंजीनियरिंग विधाओं में इनोवेशन एव इनक्यूबेशन नोडल सेंटरों की स्थापना की जा रही है। विश्वविद्यालयों द्वारा इन्हें वित्तीय सहायता देने के साथ साथ उद्योगों, शोध केंद्रों आदि के लिए सिस्टम तैयार कर इनोवेशन के संवर्धन में योगदान दिया जाएगा।

तीन नए इंजीनियरिंग कॉलेजों की स्थापना

डिग्री सेक्टर की बात करें तो प्रदेश सरकार तीन नए राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेजों की स्थापना करा रही है। राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज मैनपुरी, राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज कन्नौज और राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज सोनभद्र स्थापित किए जा रहे हैं। इनके भवनों का निर्माण तेज गति से जारी है। इन संस्थाओं में पठन-पाठन और प्रशिक्षण का काम फिलहाल एचबीटीआई कानपुर और केएनआईटी सुल्तानपुर में कराया जा रहा है। नए सत्र से ये निजी भवनों से यहां कक्षाएं संचालित हो जाएंगी।

इसके अतिरिक्त लखनऊ में आईआईआईटी की स्थापना की जा रही है तो एपीटीयू लखनऊ सेंटर आफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है। ये सभी प्रयास उत्तर प्रदेश के युवाओं को सूचना क्रांति के माध्यम से तकनीकी शिक्षा में हो रहे बदलावों से जोड़ना है। सीएम अखिलेश का मानना है कि एक जमाने में उपकरणों को बेरोजगारी के लिए जिम्मेदार माना जाता था, लेकिन सूचना प्रौद्योगिकी के विस्तार से उपकरण अब रोजगार के साधन बने हैं। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश आज के दौर में देश और दुनिया में आईटी क्षेत्र के मामले में कदमताल करने की ओर अग्रसर है। देश की चैथी बड़ी आईटी कंपनी एचसीएल की मानें तो उत्तर प्रदेश भारत में अगले आईटी हब की ओर अग्रसर है। इसका श्रेय अखिलेश यादव को जाता है।

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1 Comment

  • धर्मेन्द्र मलिक राष्ट्रीय महासचिव प्रभारी युपी says:

    बहुत बहुत धन्यवाद मा०मुख्य मन्त्री जी क्या ।

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