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किसानों के नाम दो साल कर उन्होंने खुशहाल बना रहे सीएम अखिलेश

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July 09, 2016

किसानों की खुशहाली के बिना राज्य का विकास सम्भव नहीं है। इसीलिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 2015-16 के बाद वर्तमान वित्तीय वर्ष 2016-17 को भी ‘किसान वर्ष’ घोषित करके गांव एवं किसान की तरक्की का रास्ता तैयार किया है। इस दौरान किसानों की आर्थिक तरक्की सुनिश्चित करने के लिए उन्हें वैज्ञानिक तौर-तरीकों से खेती करने हेतु प्रशिक्षित दिया जा रहा है। साथ ही, उन्हें लाभकारी कृषि मूल्य दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। किसानों को जागरूक करने एवं कृषि आधारित अन्य गतिविधियों को अपनाने पर बल देने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। लगातार दूसरे वर्ष को किसान वर्ष घोषित करने के पीछे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का मानना ळे थ्क् पर्यावरण में बदलाव का सबसे अधिक असर किसानों को झेलना  पड़ता है। इसलिए उनकी बेहतरी के लिए कदम उठाना बेहद जरूरी है।

किसान वर्ष मनाने के पीछे सरकार का मकसद है कि इससे प्रदेश के अधिक से अधिक किसानों को लाभ मिले और प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो। इसी क्रम में राज्य सरकार ने प्राथमिकताएं निर्धारित करते हुए कई कदम उठाए हैं। उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अग्रिम धनराशि की व्यवस्था की गई, जिसके फलस्वरूप पूरे प्रदेश में कहीं भी किसानों को कतार में लगकर खाद लेने की नौबत नहीं आयी। उनकी जरूरत के हिसाब से उन्हें उर्वरक उपलब्ध कराया गया। पहली बार गन्ना पेराई सत्र में राज्य सरकार ने एकमुश्त प्रति कुन्तल 40 रुपए गन्ना खरीद मूल्य निर्धारित करने का काम किया। पहले से बंद और बिकने के लिए तैयार खड़ी चीनी मिलों को पुनः चालू कराया। राज्य सरकार ने चीनी मिलों एवं किसानों के बीच संतुलन बनाने का काम किया। इसीलिए किसानों को अतिरिक्त मूल्य देने के लिए लगभग 03 हजार करोड़ रुपए बजट में व्यवस्था की गई। इस प्रकार का कदम अन्य राज्य सरकारों जैसे महाराष्ट्र और कर्नाटक आदि द्वारा नहीं उठाया गया।

इसी प्रकार पिछली समाजवादी सरकार में शुरू की गई किसान दुर्घटना बीमा को बढ़ाकर 05 लाख रुपये किया गया। इस प्रकार की आर्थिक सहायता किसी राज्य सरकार द्वारा किसानों के असामयिक मृत्यु पर उनके परिजनों को नहीं दी जाती है। निःशुल्क सिंचाई की व्यवस्था, सोलर इनर्जी को बढ़ावा देने के लिए सोलर पम्प पर अनुदान तथा कामधेनु डेयरी परियोजना को चलाकर किसानों को राहत पहुंचाई जा रही है।

अखिलेश सरकार की इन कदमों के चलते ही खेती के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने के लिए संचालित अन्य योजनाओं के फलस्वरूप ही प्रदेश में जींसों के साथ-साथ आलू, फल एवं सब्जियों के उत्पादन में बढ़ोत्तरी हुई है। उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन करने वाला राज्य बन गया है। सरकार द्वारा संचालित योजनाएं किसानों तक वास्तव में पहुंचें, इसको जानने के लिए समय-समय पर उनके स्तर से फोन के माध्यम से किसानों से फीडबैक ली जाती है। सोलर पम्प के मामले में करीब 900 किसानों से सीधे फीडबैक लिया गया। कृषि निवेशों में दिए जाने वाले अनुदान को पारदर्शी बनाने के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर स्कीम शुरू की गई, जिसकी तारीफ पूरे देश में हो रही है।

किसानों को अधिक से अधिक लाभ देने के लिए आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के साथ मण्डियों की स्थापना की जा रही है। इस एक्सप्रेस-वे को अब बलिया तक ले जाने का काम शुरू किया गया है। सरकार के इस कदम से किसानों को उपज बड़े बाजारों तक ले जाने में सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही, वर्तमान मण्डियों की स्थिति सुधारने, नई मण्डियों की स्थापना करने के साथ-साथ मण्डी की कार्यप्रणाली आधुनिक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

 

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