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बुंदेलखंड की प्यासी धरती को हराभरा बनाने में जुटे सीएम अखिलेश

13 बड़ी परियोजनाओं पर एक साथ शुरू किया काम, चार पूरी बाकी का काम 60 से 80 प्रतिशत पूरा

 UP CM Akhilesh Yadav Photo_ www.tahlkanews.com

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June 2, 2016

कभी गौरवशाली इतिहास का गवाह रहा बुंदेलखंड दशक से सूखे की मार झेल रहा है। यह खुद में दुखद पहलु है ही, साथ ही इससे भी दुखद है उत्तर प्रदेश की पिछली सरकार और केंद्र की वर्तमान सरकार का इस इलाके के प्रति भेदभाव का रवैया। राज्य सरकार जब सूखे से प्रभावित इलाकों में राहत कार्य के लिए केंद्र से धन की अपेक्षा की तो पहले तो पैसे देने में बेवजह लेटलतीफी की गई और जब देने का वादा किया तो वो बुंदेलखंड को राहत के बजाय ऊंट के मुंह में जीरा के समान साबित हुआ। बहरहाल, इन बिडंबनाओं से अलग एक सुखद हकीकत भी है। जी हां, बुंदेलखंड को सूखे की समस्या से राहत दिलाने के लिए मौजूदा अखिलेश सरकार द्वारा जिस तरह की योजनाएं चलाई जा रही हैं, वे इस क्षेत्र को तात्कालिक समाधान तो दे ही रही हैं, दीर्घकालिक रूप में भी उनकी दिक्कतें दूर करने में कारगार साबित होने वाली है। उम्मीद है कि मानसून के बाद से ही उनके प्रयास रंग दिखाने लगेंगे। ऐसे में यह बात स्वाभाविक रूप से दिमाग में कौंधती है कि इतने बिगड़े हालात में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बुंदेलखंड की जनता का मर्म महसूस कर वहां की समस्या दूर करने और उसका गौरवशाली स्वरूप लौटाने के लिए प्रयास कर सकते हैं तो केंद्र या पिछली सरकार इस दिशा में थोड़ी भी गंभीर होतीं तो शायद बुंदेलखंड के ये हालात न होते है। बहरहाल ये जानना भी जरूरी है कि उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार आखिर बुंदेलखंड के लिए आखिर क्या काम कर रही है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की लोकप्रियता वहां की जनता में दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है |

अब कोई नहीं सोएगा भूखे पेट

बुंदेलखंड के हालात किसी से छिपे नहीं हैं। लंबे समय से विपदा झेल रहे लोगों के साथ सामने जब परिवार का पेट पालने में दिक्कत सामने आने लगी तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सरकारी खजाने का मुहं उनकी ओर मोड़ दिया। इसकी क्रम में सूखे से प्रभावित बुंदेलखंड में निःशुल्क समाजवादी सूखा राहत सामग्री का वितरण किया जा रहा है। मकसद साफ है। कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं रहे। इस योजना के अंतर्गत बुंदेलखंड में पीड़ित लोगों को उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से 10 किलो आटा, पांच किलो चावल और 5 किलो चने की दाल, 25 किलो आलू, 5 लीटर सरसो का तेल और 1 किलो शुद्ध देसी घी के साथ एक किलो मिल्क पाउडर हर महीने उपलब्ध कराया जा रहा है। इसका लाभ यहां 2 लाख 30 हजार अंत्योदय कार्ड धारकों को मिल रहा है। मुख्यमंत्री में इस योजना को चार माह तक जारी रखने का आदेश दिया है। साथ ही यह भी आदेश दिया है कि भुखमरी से यदि किसी व्यक्ति की मौत होती है तो सम्बन्धित जिलाधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी।

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कृषक दुर्घटना बीमा योजना 2 लाख से बढ़ा कर 5 लाख किया

उत्तर प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसले में सूखे की समस्या से जूझ रहे किसानों की राहत हेतु कृषक दुर्घटना बीमा योजना की राशि को 2 लाख से बढ़ा कर 5 लाख रुपये कर दिया है। इसका सबसे ज्यादा फायदा बुंदेलखंड की जनता को मिलेगा। इस योजना के चलते उन्हें फसल चौपट होने पर भी कर्ज के तले दबने या भुखमरी की नौबत नहीं आएगी। साथ ही किसानों को आत्मविश्वास भी बना रहेगा। इसके साथ ही, बुन्देलखण्ड क्षेत्र के समाजवादी पेंशन योजना के पात्र लाभार्थियों को शत-प्रतिशत आच्छादित किया जा रहा है।

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सिंचाई व्यवस्था को बनाया गया सुदृढ़

दो दशक से सूखे की मार झेलने के कारण बुंदेलखंड में सबसे अधिक खेती-किसानी ही चौपट हुई है। भूगर्भ जलस्तर काफी नीचे चला गया और पिछली सरकार की अनदेखी से सिंचाई के पुराने साधन-संसाधन भी बर्बाद हो गए। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किसानों के इस मर्म को महसूस किया। मौजूदा वित्तीय वर्ष के बजट में भी मुख्यमंत्री ने बुदंलेखंड के लिए अलग से प्रावधान कर इस क्षेत्र की स्थिति सुधारने के प्रति अपनी मंशा साफ कर दी। इस क्रम में बुंदलखंड में सिंचाई व्यवस्था को सृदढ बनाने की दृष्टि में 420 करोड़ की योजनाएं स्वीकृत की गई हैं।

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समाजवादी जलसंचय योजना

बुंदेलखंड में पानी की समस्या से निपटने के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रतिबद्धता दिखाते हुए समाजवादी जलसंचय योजन के तहत करीब 100 तालाबों के पुनर्जीवन के कार्य को तत्काल प्रभाव से शुरू करने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री के इस महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर युद्ध स्तर पर काम हो रहे है। इन तालाबों की खुदाई में 600 लाख घन मीटर मिट्टी निकाली जाएगी और जिनमें 60 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी स्टोर किया जा सकता है। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि अगर इतना पानी स्टोर करना होता तो एक बांध बनाना पड़ता जिसकी लागत 1200 करोड़ आती और तीन साल का समय लगता। इसके अलावा पानी को नहरों के द्वारा प्रभावित इलाकों में पहुंचाया जाता जिसकी लागत अलग से आती। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत महोबा और इसके आसपास के इलाके से की गई है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि इन तालाबों के पुनर्जीवन का काम मानसून आने से पहले ही समाप्त कर लिया जाये, ताकि इन तालाबों में बारिश का पानी संरक्षित किया जा सके।

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बारिश का पानी अब नहीं होगा बर्बाद

बुन्देलखण्ड क्षेत्र में वर्षा जल को संचयन हेतु 12.21 करोड़ रुपये की खेत-तालाब योजना स्वीकृत की गई है। इसके अन्तर्गत दो हजार तालाबों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह योजना बुन्देलखण्ड के सभी जनपदों में संचालित की जा रही है। पहले इस योजना में लोगों की ओर से कम दिलचस्पी दिखाई जा रही थी, लेकिन जैसे-जैसे लाभ सामने आने लगे, किसानों का इस योजना के प्रति रूझान भी बढ़ने लगा है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री जल बचाव अभियान के अन्तर्गत नदियों के पुनर्जीवन व पुनरोद्धार के कार्य कराए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री जल बचाव अभियान के अन्तर्गत बुन्देलखण्ड क्षेत्र में 10,705.74 लाख रुपये एवं पूरे प्रदेश में 87,197 लाख रुपये व्यय करके तालाबों पर कार्य कराया गया है।

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पानी पीने का संकट हो रहा दूर

समाजवादी सरकार ने पीने की पानी की किल्लत दूर करने के लिए बुंदलखंड  क्षेत्र  में जल आपूर्ति के लिए 3226 इंडिया मार्क-2 हैंड पंपलगाने की घोषणा की है। इसके लिए 21.57 करोड़ की धन राशि आवंटित की गई। वहीं, 440 पानी के टैंकर खरीदने  के लिए 9.94 करोड़ की राशि आवंटित  की गई। इतना ही नहीं पशुओं का भी ख्याल वर्तमान प्रदेश सरकार ने किया है। इसके लिए मवेशियों के चारे के लिए प्रत्येक सूखा प्रभावित जिले के लिए एक-एक करोड़ रुपये दिए गए हैं। पीने के पानी की समस्या को दूर करने के लिए टैंकर के माध्यम से भी पेयजल की आपूर्ति की जा रही है।

पाइपलाइन से भी पहुंचाया जा रहा पानी

बुन्देलखण्ड पैकेज के प्रथम चरण में 12 ग्रामीण पाइप पेयजल योजनाएं एवं द्वितीय चरण में 48 ग्रामीण पाइप पेयजल योजनाएं स्वीकृत की गई हैं। पहले चरण के निर्माण हेतु स्वीकृत कुल राशि 91.63 करोड़ रुपये अवमुक्त की जा चुकी है। इन 12 ग्रामीण पाइप पेयजल योजनाओं में से 11 योजनाओं में कार्य पूर्ण कर पूरी तरह उपयोग में लाया जा चुका है। द्वितीय चरण में स्वीकृत 48 योजनाओं हेतु स्वीकृत सम्पूर्ण धनराशि 181.283 करोड़ रुपये अवमुक्त की जा चुकी है तथा 18 योजनाओं के कार्य पूर्ण कर उन्हें संचालित किया जा चुका है।

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100 की जगह अब 150 मानव दिवस

बुन्देलखण्ड क्षेत्र के 7 जनपदों में वर्ष 2015-16 में 160.88 लाख मानव दिवस सृजन के वार्षिक लक्ष्य के सापेक्ष 198.26 लाख मानव दिवस सृजित किए गए। इसी प्रकार वर्ष 2016-17 में बुन्देलखण्ड में 3 मई, 2016 तक के लक्ष्य 7.66 लाख मानव दिवस सृजन के सापेक्ष 5.39 लाख मानव दिवस सृजित किए गए है। मुख्यमंत्री जल बचाव अभियान के अन्तर्गत बुन्देलखण्ड में 10,705.74 लाख रुपये एवं पूरे प्रदेश में 87,197 लाख रुपये व्यय करके तालाबों पर कार्य कराया गया है।

सिंचाई की हो रही समुचित व्यवस्था

 सिंचाई के लिए बुन्देलखण्ड के 07 जनपदों में 17 निःशुल्क बोरिंग, 583 मध्यम गहरी बोरिंग, 276 गहरी बोरिंग व 59 रिचार्जिंग चेकडैम बनाने की कार्य योजनाएं क्रियान्वित की जा रही है। इसके अलावा, 8098 डगवैल निर्माण के लक्ष्य के सापेक्ष 7926 परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं। मुख्यमंत्री जल बचाव अभियान के अन्तर्गत नदियों के पुनरोद्धार के कार्य कराए जा रहे है। जनपद महोबा की चन्द्रावल नदी के पुनरोद्धार हेतु विकास खण्ड चरखारी एवं कबरई में स्थित नदी व सहायक नालों पर 15 चेकडैम 615.89 लाख रुपये की लागत से निर्मित कराए जा रहे है। जनपद झांसी में लखेरी नदी एवं सहायक नालों पर विकास खण्ड गुरसराय एवं बंगरा में 29 चेकडैमों हेतु प्राप्त धनराशि 632.978 लाख रुपये के सापेक्ष निविदाएं आमंत्रित कर ली गई हैं।

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तैयार किए जा रहे हैं सिंचाई के साधन

सिंचाई विभाग के तहत अर्जुन सहायक परियोजना से हमीरपुर, महोबा एवं बांदा जनपदों के लिए अतिरिक्त सिंचन क्षमता सृजित करने का काम किया जा रहा है। वहीं, बाण सागर नहर परियोजना से मिर्जापुर एवं इलाहाबाद जनपद के लिए सिंचाई के साधन तैयार किए जा रहे हैं। इसी तरह, वाराणसी शहर में वरुणा नदी के चैनलाइजेशन एवं तटीय विकास की परियोजना का काम किया जा रहा है। इससे वरुणा नदी में पर्याप्त जल उपलब्ध रहेगा, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल प्राप्त हो सकेगा।

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73.64 प्रतिशत आबादी की मिली रही खाद्य सुरक्षा

राज्य सरकार ने वैसे तो पूरे प्रदेश खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू कर दिया है। लेकिन इस बड़ा लाभ बुंदेलखंड के लोगों को मिल रहा है। खाद्य एवं रसद विभाग द्वारा वर्तमान आवंटन के अनुसार बुन्देलखण्ड क्षेत्र में 39060.105 मी. टन खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। यह आवंटन 73.64 प्रतिशत जनसंख्या को आच्छादित करता है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 के अन्तर्गत बुन्देलखण्ड क्षेत्र में नियमानुसार अधिक से अधिक लाभार्थियों को चिन्हित किया जा सकता है।

पानी की 13 बड़ी परियोजनाओं पर एक साथ शुरू किया काम

पानी बुंदेलखंड की बड़ी समस्या है। इसे दूर करने के लिए 13 परियोजनाओं का कार्य शुरू कराया गया है। पिछले चार वर्षों में इनमें से चार योजनाएं पूरी हो चुकी है, अन्य पांच पर काम चल रहा है। उन पांच में से दो 80 प्रतिशत पूरी हो चुकी हैं। तीन 60 प्रतिशत पूरी हो चुकी हैं। पानी की समस्या के स्थायी समाधान के लिए मुख्यमंत्री ने झांसी के मोंठ तहसील के जुझारपुर में 612.04 करोड़ रुपये की लागत से एरच बहुउद्देशीय बांध परियोजना दिसंबर 2016 तक हो जाएगी पूरी। इस परियोजना के पूरी होने के बाद 1850 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई हो सकेगी। परियोजना से बुंदेलखंड में पीने और सिंचाई के लिए भरपूर पानी मिलेगा। एरच परियोजना 2 मेगावाट बिजली भी उत्पादन करेगी, इससे किसानों को लाभ मिलेगा।

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तीन गुना किया विकास कार्यों का बजट

सूखे से जूझ रहे बुंदेलखंड को पानी मुहैया कराने के साथ ही मुख्यमंत्री ने वहां विकास का खास ध्यान रखा है। अपने बजट में उन्होंने बुंदेलखंड के लिए खास पैकेज तैयार किया है। बुंदेलखंड के लिए खास तौर पर 2016-17 के बजट में विशेष योजनाओं के लिए निधि का आकार करीब तीन गुना कर दिया गया है। यहां विशेष योजनाओं का बजट 71 करोड़ 50 लाख रुपए से बढ़ाकर 200 करोड़ रुपए कर दिया गया है। इसके अलावा पेयजल की विशेष व्यवस्था के लिए 200 करोड़ रुपए देन की घोषणा बजट में की गई है। इसके अलावा बुन्देलखंड और विंध्य क्षेत्र में सरफेस सोर्स आधारित ग्रामीण पेयजल योजना के लिए 500 करोड़ रुपये रखे गए है। टैंकर द्वारा पेयजल आपूर्ति के लिए 2 करोड़ रुपये और दूसरी विशेष योजनाओं के लिए 338 करोड़ रुपये की व्यवस्था भी बजट में की गई है। इसके अलावा यहां तिलहन प्लांट के लिए 15 करोड़ रुपए की बजट में घोषणा की गई है।

तरक्की की ओर बढ़ते कदम 

झांसी में सैनिक स्कूल की स्थापना के लिए बजट में 150 करोड़ रुपये की व्यवस्था तो मुख्यमंत्री ने की ही है। यहां लॉ लैब बनाने के लिए भी 40 करोड़ रुपये दिए है। इसके अलावा हमीरपुर में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए भी 10 करोड़ रुपये का बजट में इंतजाम किया गया है। यहां सड़कों के निर्माण पर राज्य सरकार काफी ध्यान दे रही है। जिला मुख्यालय को 4लेन की सड़कों से जोड़ने का काम किया जा रहा है। कालपी-हमीरपुर 4 लेन सड़क का निर्माण हो चुका है।

ये काम भी महत्वपूर्ण

  • बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को उत्तर प्रदेश सरकार पूरे देश की तुलना में सबसे अधिक मुआवजा दे रही है। अब तक अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के लिए लगभग 2500 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की जा चुकी है। बुंदेलखंड क्षेत्र में समग्र विकास के लिए कामधेनु डेयरी योजना, लोहिया ग्रामीण आवास, मंडियों की स्थापना आदि की योजनाएं चलाई जा रही हैं, ताकि यह क्षेत्र भी प्रगति कर सके।
  • बुन्देलखण्ड क्षेत्र में 07 विशिष्ट किसान मण्डियां तथा 133 ग्रामीण अवस्थापना केन्द्रों का निर्माण कराया जा रहा है। किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए परिवहन की सुविधा दी जा रही है। प्रथम चरण में पांच मंडियों- कन्नौज, बहराइच, कानपुर, महोबा और ललितपुर में सुगम परिवहन योजना प्रारंभ की गई है। किसान अपने उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचा सके, इसके लिए झांसी में किसान बाजार की स्थापना की जा चुकी है। यहां किसान अपना कारोबार सुगमतापूर्वक कर रहे हैं।

… पर दुखद यह कि केंद्र कर रहा असहयोग

बुंदेलखंड की स्थिति से दुनिया वाकिफ है। पर जब मदद की बात आई तो केंद्र आनाकानी करने लगा। फरवरी, मार्च एवं अप्रैल, 2015 में उत्तर प्रदेश के 73 जनपदों में ओलावृष्टि, अतिवृष्टि से फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था। करीब दो करोड़ किसान प्रभावित हुए थे। राज्य सरकार ने इस आपदा से लोगों को राहत दिलाने के लिए केंद्र सरकार से 7543.14 करोड़ रुपये की मांग की, लेकिन मिले सिर्फ 2801.59 करोड़ रुपये। भारत सरकार से सम्पूर्ण धनराशि प्राप्त न होने के कारण लगभग आधे किसान राहत से वंचित रह गए हैं। इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने अतिरिक्त भू-राजस्व की वसूली तथा ऋणों की वसूली की कार्रवाई नहीं करने के आदेश दिए, जिससे किसानों पर कोई अतिरिक्त बोझ न पड़े।

 

उत्तर हमारा

 

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