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जन्मदिन पर विशेष : समाजवाद के सुल्तान मुलायम सिंह यादव

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22 November 2016

अखाड़ा दंगल का हो या सियासत का, वो विरोधियों को अपने दांव से चित करने में माहिर हैं।  वो राजनीति के महारथी हैं तो उत्तर प्रदेश को समाजवाद की राह पर ले जाने वाले सारथी भी हैं।  सियासत उनके लिए सिर्फ सत्ता पाने का जरिया नहीं बल्कि गरीब, मजलूमों और जरूरतमंदों था समाज में हाशिये पर छूट गए लोगों के उत्थान का माध्यम है। ऐसे ही ‘मन से मुलायम लेकिन इरादों में फौलादी’ समाजवादी पार्टी के मुखिया और ‘धरती पुत्र’ के नाम से प्रसिद्ध मुलायम सिंह यादव का आज जन्मदिन है।

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मुलायम सिंह यादव का जन्म उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के सैफई में 22 नवम्बर, 1939 को हुआ था। वर्ष 1954 में 15 साल की किशोरावस्था में ही मुलायम के राजनीतिक तेवर देखने को मिले, जब उन्होंने डॉ. राम मनोहर लोहिया के आह्वान पर ‘नहर रेट आंदोलन’ में भाग लिया और पहली बार जेल गए। दरअसल 60 के दशक में डॉ. लोहिया समाजवाद के सबसे बड़े नेता थे और मुलायम सिंह यादव उनसे बेहद प्रभावित थे। तब डॉ। लोहिया ने फर्रुखाबाद में बढ़े हुए नहर रेट के विरुद्ध आंदोलन किया था और जनता से बढ़े हुए टैक्स न चुकाने की अपील की थी। इस आंदोलन में हजारों सत्याग्रही गिरफ्तार हुए। इनमें मुलायम सिंह यादव भी शामिल थे। आज वे भारतीय राजनीति में समाजवाद का पर्याय बन चुके हैं। ‘नेता जी’ न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि केन्द्र की राजनीति में भी अपना प्रभाव रखते हैं।

Lucknow: Samajwadi Party chief Mulayam Singh Yadav addresses a press conference in Lucknow on Oct 8, 2015. (Photo: IANS)

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अन्याय के खिलाफ लड़ना और हक़ की आवाज बुलन्द करना मुलायम सिंह के स्वाभाव से बचपन से शामिल था। बड़ा दिलचस्प वाकया है- वर्ष 1960 में मैनपुरी के करहल स्थित जैन इंटर कॉलेज में एक कवि सम्मेलन चल रहा था। जैसे ही उस समय के विख्यात कवि दामोदर स्वरूप ‘विद्रोही’ ने अपनी चर्चित रचना ‘दिल्ली की गद्दी सावधान’ सुनानी शुरू की, एक पुलिस इंस्पेक्टर ने उनसे माइक छीन कर कहा कि सरकार के खिलाफ कविताएं पढना बंद करो। इसी बीच उसी समय एक लड़का बड़ी फुर्ती से मंच पर चढ़ा और उसने इंस्पेक्टर को मंच पर ही उठाकर पटक दिया। बाद में लोगों ने पूछा कि ये यह साहसी नौजवान कौन था तो पता चला कि वह मुलायम सिंह यादव हैं। बाद में जब मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमन्त्री बने तो उन्होंने दामोदर स्वरूप ‘विद्रोही’ को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का साहित्य भूषण सम्मान से नवाजा।

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मुलायम सिंह यादव ने आगरा विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की और मैनपुरी के जैन इंटर काॅलेज करहल से बीटी। इसके बाद इंटर काॅलेज में कुछ दिन पढाया भी। जसवंत नगर और फिर इटावा की सहकारी बैंक के निदेशक भी चुने गए। सोशिलिस्ट पार्टी और फिर प्रजा सोशलिस्ट से विधानसभा चुनाव मैदान में उतरे और इन्हें 1967 में पहली बार विधानसभा पहुंचने का अवसर मिला। इमरजेंसी के दौरान मुलायम सिंह यादव को मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट (मीसा) के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। मुलायम सिंह करीब 18 महीनों तक (जून 1975 से जनवरी 1977 तक) इटावा जेल में रहे। अपने एक मित्र को लिखी चिट्ठी में नेता जी ने लिखा था, मुझे देश की आजादी की लड़ाई के समय तो जेल जाने का सौभाग्य नहीं मिल पाया था, लेकिन मुझे खुशी है कि मैं एक तानाशाही सरकार की मुखालफत कर पा रहा हूं।

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पहली बार 1977-78 में राम नरेश यादव और बनारसी दास के मुख्यमंत्रित्व काल में सहकारिता एवं पशुपालन मंत्री बनाए गए। मुलायम सिंह यादव के प्रयासों से उत्तर प्रदेश में डेयरी उद्योग को नई जान मिली। इसके बाद से ही वे करीबी लोगों के बीच ‘नेता जी’ के नाम से जाने जाने लगे। मुलायम सिंह यादव 1989 से 1991 तक, 1993 से 1995 तक और साल 2003 से 2007 तक तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। 2013 में समाजवादी पार्टी की जबरदस्त जीत के बाद उन्होंने यूपी की कमान बेटे अखिलेश यादव को सौंप दी और केंद्र की राजनीति में सक्रिय हो गए।

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वैसे ‘नेता जी’ 1996 से ही केंद्र की राजनीति में सक्रिय हो गए थे और उन्होंने अपनी महत्ता भी अन्य राजनैतिक पार्टियों को समझा दी थी। मुलायम सिंह यादव 1996, 1998, 1999, 2004 और 2009 में लोकसभा के सदस्य चुने गये। मुलायम सिंह यादव 1996 से 1998 तक एचडी देवेगौड़ा और इंद्र कुमार गुजराल की सरकारों में भारत के रक्षामंत्री के पद पर भी रहे। रक्षा मंत्री रहते उनके क्रांतिकारी क़दमों ने सेना का मनोबल बढ़ाने का भी काम किया। उन्हें अंतरराष्ट्रीय जूरी सम्मान भी दिया जा चुका है।

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मुलायम सिंह यादव के सिर पर वर्ष 1992 में एक और सेहरा बंधा जब समाजवादी पार्टी की स्थापना की गई। भारत के राजनैतिक इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण अध्याय था, क्योंकि लगभग डेढ़-दो दशकों से हाशिये पर जा चुके समाजवादी आंदोलन को मुलायम सिंह यादव ने पुनर्जीवित किया था। इससे पूर्व मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश लोकदल और उत्तर प्रदेश जनता दल के अध्यक्ष भी रहे।

60 साल की इस तपस्या में उन्होंने न सिर्फ उत्तर प्रदेश में समाजवाद और विकास का परचम फहराया है, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति को भी नई दिशा दी है। मुलायम सिंह यादव की इसी व्यक्तित्व, कार्यशैली और लोकप्रियता की वजह से वह लगभग सभी सेक्युलर दलों के चहेते हैं।  उत्तर हमारा नेता जी को उनके जन्मदिन की हार्दिक बधाई देने के साथ उनकी लंबी स्वस्थ आयु की कामना करता है।

उत्तर हमारा

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