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सेहत संवारने संग सहूलियतें बढ़ा रहे सीएम अखिलेश

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July 19, 2016

उत्तर प्रदेश में हर 10 मिनट पर एंबुलेंस उपलब्ध कराने के बाद अब अखिलेश सरकार मरीजों को घर पर ही अस्पताल की तमाम सुविधाएं मुहैया कराएगी। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की कैबिनेट ने प्रदेश के 36 जिलों में 170 मोबाइल मेडिकल यूनिट खोलने का निर्णय लिया है। इससे पहले सरकार मोबाइल एंबुलेंस चलाने की भी घोषणा कर चुकी है। प्रदेश भर में गर्भवती महिलाओं और कुपोषित बच्चों को सेहतमंद बनाने के लिए हौसला पोषण मिशन लागू करने के मजह तीन दिन बाद प्रदेश सरकार ने मरीजों की सहूलियत की दिशा में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया है। चार वर्ष पहले तक स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश बेहद कमजोर था। ऐसे में उत्तर प्रदेश में समाजवादी सरकार में लिए गए ये फैसले बेहद अहम माने जा रहे है। प्रदेश में पिछले साठ वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में जितना काम हुआ है, उससे कहीं ज्यादा अकेले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल में हो चुका है। समाजवादी सरकार गरीबों को अच्छा और सस्ता इलाज मुहैया कराने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है।

देश की सबसे बड़ी एंबुलेंस बेड़ा तैयार किया

अखिलेश सरकार ने अपने पहले ही बजट के साथ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की ओर ध्यान दिया। मरीजों, गर्भवती महिलाओं, दुर्घटना में घायल लोगों को करीब बार तत्काल स्वास्थ्य सेवा की जरूरत होती है। इस बात को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में 108 समाजवादी एंबुलेंस सेवा शुरू की गई। टोल फ्री नंबर 108 पर फोन कर प्रदेश भर में किसी भी समय पर एंबुलेंस सेवा हासिल की जा सकती है। यह देश की सबसे बड़ी आपातकालीन एंबुलेंस सेवा है। इस सेवा के अंतर्गत 1488 एंबुलेंस के बेड़े को शामिल किया गया है जो प्रदेश के हर जिले और ब्लाक तक निशुल्क सेवा प्रदान कर रहे हैं। इसके माध्यम से सिर्फ 20 मिनट पर मरीजों को एंबुलेंस सेवा मिल रही है। 108 एंबुलेंस से प्रदेश में 48 लाख से अधिक रोगियों को लाभ मिल चुका है। इनमें से कई ऐसे भी शामिल हैं, जिनके लिए यह एंबुलेंस सेवा जीवनदान बनी है।

दूसरी ओर, प्रदेश में 102 नेशनल एम्बुलेंस सेवा के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश के नाम उल्लेखनीय उपलब्धि है। इस सेवा के अंतर्गत प्रदेश में 1964 एंबुलेंस चलाई जा रही है।। 102 एंबुलेंस सेवा खासकर गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को लाभ पहुंचाने के मकसद से शुरू की गई है। इन दोनों एंबुलेंस सेवाओं को मिला प्रदेश में अब तक एक करोड़ 6 हजार से अधिक लोग को लाभ मिल चुका है।

गरीबों का निशुल्क इलाज

गंभीर और असाध्य रोगों मसलन किडनी, लीवर, हृदय व कैंसर से पीड़ित गरीब परिवारों को अखिलेश सरकार ने मुफ्त इलाज कराने की सुविधा दी है। वहीं, गरीबी रेखा से नीचे आने वाले बीपीएल कार्ड धारकों के लिए सभी इलाज और जांच सरकार ने फ्री कर दी है। इतना ही नहीं अगर बीपीएल परिवार का कोई सदस्य गंभीर रोगों से पीड़ित है तो उसके इलाज के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री राहत कोष से आर्थिक सहायत देने का भी इंतजाम किया है।

अस्पतालों में मिलने लगीं मुफ्त दवाएं

इलाज और जांच के बाद स्वास्थ्य के लिहाज से दूसरी महत्वपूर्ण बात होती है दवा की उपलब्धता। अखिलेश सरकार ने इसे जनसामान्य के लिए सुलभ बनाने के लिए अहम योजना शुरू की है। अब उत्तर प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में मरीजों को फ्री दवाएं, फ्री एक्सरे, फ्री पैथोलाॅजी जांच और फ्री अल्ट्रासाउण्ड की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। पहले जहां मरीजों को तीन दिन के लिए दवाएं दी जाती थीं, वहीं इस सुविधा को बढ़ाकर मरीजों को पांच दिन की मुफ्त दवा वितरित की जा रही है। कोई मरीज सुदूर इलाके का है और गंभीर रोग से पीड़ित है तो उसके इस योजना के तहत 15 दिन की दवाएं दी जा रही है।

भर्ती शुल्क समाप्त किया

अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों के लिए इलाज और दवा के बाद बड़ा खर्च उनके भर्ती शुल्क था। प्रदेश सरकार ने मरीजों और अपने परिवारीजनों को सहूलियत देते हुए यह भर्ती शुल्क माफ कर दिया है। इस संबंध में गड़बड़ी रोकने के लिए सरकार ने जनशिकायत निवारण प्रकोष्ठ में टोल फ्री नम्बर 1800 1805 145 की व्यवस्था की है। जनसामान्य इस नंबर पर फोन कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते है।

नवजात को बीमारियों के बचाने के लिए पेंटावैलेंट वैक्सीन

अखिलेश सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के तहत नवजात शिशुओं की सेहत का भी ख्याल रखा है। बच्चों को पांच जानलेवा बीमारियों- हिब बैक्टेरिया, डिप्थीरिया, काली खांसी, टिटनेस, हेपेटाइटिस बी से बचाने के लिए पेंटावैलेंट वैक्सीन का शुभारंभ किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनीसेफ और उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में इस वैक्सीन और आईपीची को लाॅन्च किया गया है। इससे साथ बच्चों को पोलियो वैक्सीन भी दी जा रही। यह वैक्सीन शिशुओं को केवल तीन बार लगाई जाती है। यह वैक्सीन बच्चों को हिब वायरस से होने वाले निमोनिया, मेनेन्जाइटिस, बैक्टीरेटिया, एपिग्लाटाइटिस, सेप्टिक यहां तक कि अर्थराइटिस से भी बचाता है।

किडनी रोगियों के लिए फ्री हीमो-डायलिसिस

अखिलेश सरकार ने व्यापक जनहित किडनी रोगियों के लिए ही-डायलिसिस की सुविधा को फ्री कर दिया है। ऐसे मरीज प्रदेश के 18 मंडलीय जनपदों के राजकीय चिकित्सालयों में यह सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। किडनी रोगियों को यह सुविधा उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार पीपीपी माॅडल पर चयनित राजकीय चिकित्सालयों में 180 हीमो-डायलिसिस मशीनें स्थापित करा रही है।

डाक्टरों की कमी दूर करने के लिए एमबीबीएस सीटें बढ़ाई

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का यह दृढ़ विश्वास है कि बेहतर इलाज व्यवस्था के लिए डाॅक्टरों की संख्या भी भरपूर होनी चाहिए। इसी बात को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने एमबीबीएस की सीटों में 600 की वृद्धि की है। वर्ष 2012 से पहले प्रदेश के मेडिकल काॅलेजों में एमबीबीएस की कुल 1140 सीटें थीं। ये बढ़ाकर अब 1740 कर दी गई हैं। इतना ही नहीं, वर्ष 2012 से पहले स्नातकोत्तर (एमडी और एमएस) पाठ्यक्रमों की कुल 603 सीटें थीं, जो बढ़ाकर अब 751 कर दी गई हैं। वर्ष 2012 से पहले सुपर स्पेशियलिटी यानी डीएम और एमसीएच पाठ्यक्रमों की कुल सीटें 45 थीं। इनमें भी 11 सीटों की वृद्धि की गई है।

लखनऊ में कैंसर संस्थान का निर्माण

कैंसर के बेहतर इलाज के लिए मरीजों को अभी तक प्रदेश के बाहर जाना पड़ता था। अखिलेश सरकार इस परेशानी को दूर करने के लिए और कैंसर रोगियों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए राजधानी लखनऊ में ही सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान का निर्माण करा रही है। चक गंजरिया में 100 एकड़ भूमि पर उच्च स्तरीय कैंसर संस्थान का निर्माण सिग्नेचर बिल्डिंग के रूप में कराए जाने का शासनादेश 26 फरवरी 2015 को जारी हो चुका है। इस कैंसर संस्थान के में करीब 854 करोड़ रुपये की लागत आएगी, जिसकी स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है।

 

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