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खो-खो खेल में शून्य से शिखर की ओर बलिया

बलिया : वैसे तो खो-खो खेल की शुरुआत महाराष्ट्र से हुई है, लेकिन प्रदेश में इसके प्रति जुनून पैदा करने के साथ ही युवाओं में जोश भरने का अगर कोई काम किया है तो वह पूर्व माध्यमिक विद्यालय बलिया, जिसे हम तहसीली स्कूल के नाम से जानते हैं का अहम रोल है। इस विद्यालय की खिलाड़ियों ने प्रदेश से लेकर देश में खो-खो खेल को न सिर्फ

एक नई पहचान दिलाने का काम किया है बल्कि नेशनल स्तर पर भी बलिया को खेल के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाई है।

वर्ष 2002 में बेसिक शिक्षा परिषद बलिया के जिला व्यायाम शिक्षक विनोद ¨सह ने तहसीली स्कूल में इस खेल की नींव रखी। आज इस विद्यालय की खिलाड़ी प्रदेश ही नहीं बल्कि भारतीय टीम का भी प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। हम बात कर रहे हैं साउथ एशियन चैंपियनशिप 2016 की गोल्ड मेडलिस्ट मृगेंदु राय एवं वर्तमान में यूपी टीम की कोच व मुख्यमंत्री के हाथों रानी लक्ष्मीबाई अवार्ड से सम्मानित प्रीति गुप्ता की, जिन्होंने खो-खो खेल को न सिर्फ राज्य स्तर पर बल्कि नेशनल स्तर पर भी एक नई ऊंचाई दी। इतना से ही तहसीली स्कूल का यह अभियान समाप्त नहीं हुआ है। अभी गत माह अक्टूबर 2017 में खेल निदेशालय उत्तर प्रदेश द्वारा कराए गए यूपी सीनियर खो-खो टीम के लिए सलेक्शन ट्रायल में भी पूर्व माध्यमिक विद्यालय बलिया (तहसीली स्कूल) से कुल सात खिलाड़ियों (6 बालिका व एक बालक) ने यूपी टीम में चयनित होकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया जो इससे पहले प्रदेश में कभी नहीं हुआ था कि एक ही विद्यालय से आधी प्रदेशीय टीम का चयन इस खेल में हुआ हो। इस तरह से यूपी की टीम महाराष्ट्र (कोल्हापुर) में सीनियर नेशनल खेलने गई और खो-खो खेल जगत में अपने अभूतपूर्व प्रदर्शन से अमिट छाप छोड़ कर वापस हुई। इसमें दिलचस्प बात यह रही कि यूपी महिला टीम की कोच प्रीति गुप्ता इसी तहसीली स्कूल की भूतपूर्व छात्रा है तो कप्तान अंजलि यादव वर्तमान छात्रा है।

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