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अखिलेसे के सोर बा, काम उनकर बेजोड़ बा

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आपन उत्तर प्रदेश में पहिला बार चुनावे में केहू पार्टी विकास के बात करत बा, बाकि भाजपा अउर बसपा त पहिले भी धरम जाति के बात कर रहे। त ए बार भी उ सबके पास बतावे इ खातिर कुछ नाही बा। दूसरा ओर हवें अखिलेस यादव, जे दिन रात खाली उत्तर प्रदेश के विकास के बारे में सोचत बानें। कइसे लइका-बच्चा के सेहत अच्छा हो, कइसे स्कूल-कॉलेज जाएं। कइसे नौकरी मिले। लड़कियन के पढ़ाई-बियाह के चिंता बा। छोटा सा उमिर में अखिलेस यादव मुख्यमंत्री बनने तब के सोचले रहे कि उत्तर प्रदेश में एतना काम होखी। अखिलेस उहो करके दिखा दिहने। अखिलेस के मुख्यमंत्री रहत उत्तर प्रदेश में जितना विकास के काम भइल बा ओतना त उत्तर प्रदेश में कबो नाही भइल।

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दूसरा ओर भाजपा वाला लोग बानें। काम-घाम कुछ नाही कइलें इ लोग बाकि चुनाव में सौहत्तर बात बनावत बानें। बलरामपुर के चुनावी सभा में त अखिलेस यादव प्रधानमंत्री मोदी के चुनौती दे दिहलें कि चाहें त विकास के बाते पर उनसे बहस कर लें। प्रधानमंत्री जी बताईं कि उत्तर प्रदेश खातिर का काम कइलें, अखिलेस यादव भी बतइहें कि उ कउन-कउन काम कइल हवें। पर मोदी जी के पास त काम गिनावे के हवे नाही त उ लोगन के भरमावे में जुटल बानें। जबकि अखिलेस भइया पांच साल में एतना काम करके दिखा दिहलें कि विपक्षी गितने रह गइल बानें। लागत बा चुनाव खतम हो जाई अउर उ लोग अखिलेस सरकार के कामें गिनत रह जहिएं। खैर हमनी के त काम से मतलब बा, जे काम करी उही राज करी। त आइल जाए तनि पता लगाइल जाए कि अखिलेस राज में उत्तर प्रदेश में कउन-कउन काम भइल कि देस-विदेस में नाम होत बा।

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अखिलेस यादव जब मुख्यमंत्री बनलें ओकरा पहिले बसपा के बहिन जी के राज रहे। मायावती जी के जमाना में सरकारी धन के खूब लूट-खसोट भइल रहे। एसे खजाना खाली रहे। अखिलेस के साथ मुश्किल-परेसानी इ रहे ही समाजवादी पार्टी के बड़ नेता लोग घोषण पत्र में बड़ा-बड़ा वादा कर दिहल रहे, बाकि खाली सरकारी खजाना  के बाद भी वादा पूरा करने के जिम्मेदारी अखिलेस पे आ गइल रहे। अखिलेस ऐेसे तनिको घबराइने नाहीं, बल्कि हर साल खातिर विकास के एजेंडा बनाइलें। फेर ओ एजेंडा पर काम सुरू कर दिहने। मन में विकास के इच्छा रहे त काम कइसे मुश्किल होत। एक-एक कर काम पूरा हो गइल। ए तरह अखिलेस यादव पहिला अइसन मुख्यमंत्री बन गइलें, जे योजना के शिलान्यास कइलें त उही योजना के पांच साल के भीतर उद्घाटन भी कइलें।

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अखिलेस यादव प्रदेश में बिजली के इसन जबरजस्त इंतजाम कर दिहलें कि वइसन त आजादी के बाद से उत्तर प्रदेश में कबो नाहीं भइल रहे। शहर में त 22 में 24 घंटा बिजली मिलत बा, बाकि अब गांवन में भी 24 घंटा तक बिजली के इंतजाम करे में जुटल बानें। आजादी के बाद से पिछला सरकार ले उत्तर प्रदेश में जितना बिजली सप्लाई होखत रहे, अखिलेस सरकार के पांच साल में ओसे दुगुना सप्लाई होखे लागल बा। चाहे कौनों धर्म के स्थान हो अखिलेस यादव के सरकार में 24 घंटा बिजली देवे के व्यवस्था भइल बा। बाकि मोदी जी त अंट-शंट आरोप लगइबे करिहें। लागत बा कि केंद्र के मंत्री, अधिकारी लोग  उनके सही जानकारी ही नाही देला। अगर देत हो त ऐतना बड़ा पद पर बइठ के मोदी जी ई जनि कहत कि मथुरा के ओ गांवें में उनके सरकार में बिजली आइल जो गांव में त 35 साल पहिला से बिजली रहे।

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समाजवादी पेंशन के बारे में के जानत रहे कि इ इतना बड़ा काम के योजना बन जाई। 55 लाख औरतन इ योजना से फायदा उठावत बानीं। नमक-तेल के इंतजाम संग दर-दवा, लइकन-बच्चा के कापी-किताब अउर हर छोट-बड़ काम में इहे 500 रुपया काम आवत बा। अब ते अखिलेस घोषणा कइले हवें कि 500 नाहीं 1000 रुपया मिली अउर जे पेंशन से छूट गइल बा ओकरो के पेंशन से जोड़ल जाई। अउर त अउर सब पेंशन के रकम बढ़ाके 1000 रुपया कर दिहल जाई- चाहे उ विधवा पेंशन होखे, विकलांग पेंशन, चाहे कउना दूसर।

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नोटबंदी से जब जनता के बड़ा परेसानी उठावे के पड़ल त भाजपा के लोग कहे लागल की मोबाइल के बैंक बना ल। लेकिन मोबाइल के देई, इ त मोदी जी बतइवे नाहीं करलें। त हम बतावत बानीं। आपन अखिलेश भइया उत्तर प्रदेश में स्माटफोन बांटें जात बानें। इ मोबाइल से लोग-बाग सरकार से सीधा-सीधा जुड़ जाइहें। सरकारी योजना के बारे में हर जानकारी उनके इ स्मार्टफोन पे मिल जाई। लइकन के पढ़े से लेके, किसान के खेती-किसानी बाजार के जानकारी त लड़कियन के सुरक्षा अउर सेहत के बात भी ऐही फोन पे मिल जाई।

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अखिलेस यादव के मंसा लोगन के बीच डिजिटल पुल बनावे के ह। एहि खातिर उ सब सरकारी विभागन के ऑनलाइन करे जात बनाने। एहसे कामकाज में परदर्शिता रही, भ्रष्टाचार दूर होखी। पुलिस के 100 नंबर वाला काम भी बड़ा नाम करत बा। अब थाना के भूमिका कम हो गइल बा। लोग-बाग 100 नंबर पे शिकायत करत बानें त 15 से 20 मिनट में पुलिस मौका पर पहुंचत बा। 108 एंबुलेंस के त जवाब नाहीं। न जाने केतना लोगन के जान बचइलस बा। अखिलेस यादव अब त गाय-भैंसन खातिर इसन ही व्यवस्था करे जात बानें। माने जानवर बीमार बा त फोन करा, डॉक्टर और दवाई घरे पर हाजिर।

कुल मिलाकर एक बात समझ में आवत बा कि अखिलेस यादव जनता के जीवन आसान बनावे के बारे में सोचत बानें। बाकि उत्तर प्रदेश में उनके काम बोलत बा। अउर लोग-बाग बोलत बा कि अखिलेस हवें सानदर, जबरजस्त… जिंदाबाद।

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