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बीजेपी के ध्रुवीकरण पर भारी पड़ रहा अखिलेश यादव का विकास कार्य

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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा पर जनता को जाति और धर्म के आधार पर बांटने का आरोप लगाया है। जबकि सपा ने अपने शासनकाल में कभी भी भेदभाव की राजनीति नहीं की। हर जाति और धर्म के व्यक्ति को समान सुविधाएं देने का प्रयास किया। लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दीपावली और रमजान पर विद्युत आपूर्ति का मुद्दा उठाकर जनता को धर्म के आधार पर बांटने का काम किया है। जबकि सपा सरकार ने उनके संसदीय क्षेत्र वाराणसी में 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करवाई है। तब भी इस तरह का बयान उनकी मंशा को स्पष्ट कर रहा है। यदि मोदी जी सही हैं, तो वह गंगा की कसम खा कर कहें कि बनारस में 24 घंटे की बिजली नहीं मिल रही है।

विकास के नाम पर अखिलेश यादव मांग रहे वोट

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यूपी चुनाव में एक तरफ अपने काम के सहारे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव चुनाव प्रचार कर रहे हैं। वह जनता को अपनी योजनाओं का लाभ बताते हैं और दोबारा सरकार बनने पर क्या काम वह करेंगे। उसके बारे में भी वह बात करते हैं। इस दौरान वह अपने भाषण के दौरान बेहद संतुलित और सौम्य रहते हैं। वह कहते हैं कि अभी तक उनकी सरकार ने 55 लाख महिलाओं को जोड़ा है । आने वाले दिनों में वह इस योजना का लाभ 1 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंचाएंगे साथ ही वह 500 रुपये के बजाय 1000 रुपये देने का काम करेंगे। इस स्कीम पर कुछ जन विरोधी ताकतों ने सुप्रीम कोर्ट में केस किया था। जहां सुप्रीम कोर्ट ने इस भी इस योजना की तारीफ की थी।

अखिलेश यादव ने युवाओं को मुख्यधारा और बदलते दौर के चलने के भी हिमायती रहे हैं। उन्होंने अपनी सरकार में 18 लाख युवाओं को लैपटॉप देने का काम किया है। जिससे सूचना क्रांति के साथ आज का युवा जो गरीब परिवारों से आता था। वह लैपटॉप से अपना भाग्य बदल रहा है। इस योजना को झुनझुना बताने वाली बीजेपी ने इसे अपने घोषणा पत्र में शामिल किया है। यहीं सीएम अखिलेश ने मिड डे मील के साथ हफ्ते में एक दिन बच्चों को फल और दूध देने का काम पहले से ही कर रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने वादा किया है कि दोबारा सरकार बनी तो उनकी सरकार गरीब बच्चों को घी और मिल्क पाउडर देने का काम करेगी।

विकास पर चर्चा करने से भाग रही बीजेपी

Bharatiya Janata Party (BJP) President Amit Shah (R) talks with Indian Prime Minister Narendra Modi at a BJP National Council meeting at Jawaharlal Nehru Stadium in New Delhi on August 9, 2014. Leaders of India's ruling Bharatiya Janata Party called on followers to gear up for key state elections in order to extend the Hindu nationalist movement's grip on the country. AFP PHOTO/RAVEENDRAN (Photo credit should read RAVEENDRAN/AFP/Getty Images)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद फतेहपुर की जनसभा में कहा कि गांव में अगर कब्रिस्तान बनता है तो वहां श्मशान भी बनना चाहिए। अगर रमज़ान में बिजली मिलती है तो दिवाली पर भी मिलनी चाहिए। जब पश्चिम उत्तर प्रदेश में चुनाव था तो भाजपा के संगीत सोम और योगी आदित्यनाथ जैसे नेता अपनी सभा में हिंदू मुसलमान की बात करते थे। लेकिन जब मध्य उत्तर प्रदेश और पूर्वी उत्तर प्रदेश की सीटें दांव पर है तो कुछ वैसी ही भाषा का इस्तेमाल प्रधानमंत्री भी कर रहे हैं।

मुख्तार अब्बास नकवी जैसे मुस्लिम नेता नरेंद्र मोदी की इस बात को ‘सबका साथ, सबका विकास’ कहकर संभालने की कोशिश करते हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश भाजपा के नेताओं को लगता है कि अब संभलकर नहीं खुलकर बोलने का सिग्नल मिल चुका है। भाजपा के प्रदेश स्तर के नेता यह कहते सुनाई देते हैं कि प्रधानमंत्री ने चुनाव प्रचार की लाइन तय कर दी है। जब कब्रिस्तान की बात होगी तो श्मशान की बात होगी, हिंदू की बात होगी तो मुसलमान की बात होगी।

 

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