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विकास रथयात्रा विशेष: अखिलेश शुरू कर रहे विकास रथ की सवारी, यूपी खेलेगा तरक्की की अगली पारी

 

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01 November 2016

सत्ता का रास्ता कभी आसान नहीं होता है। इसके लिए बड़े संघर्ष करने पड़ते हैं। तमाम झंझावातों के बीच रास्ता निकालकर मिशन को कामयाब बनाने के लिए दिन-रात और जी-जान से जुटना होता है। ये परिस्थितियां मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सामने भी थीं। इसके बावजूद अपनी नीतियों और कार्यक्रमों से उन्होंने पिछली सरकार से विरासत में मिले बदहाल उत्तर प्रदेश को विकास के रास्ते पर ले जाने में विजय हासिल की है। यहीं वजह है कि अखिलेश यादव ने अपने चुनावी समर का शंखनाद करने के लिए सूत्र वाक्य ‘विकास के विजय की ओर’ रखा है।

अखिलेश यादव ने 2012 में मुख्यमंत्री के तौर पर उत्तर प्रदेश की बागडोर अपने हाथों में लेने के साथ हर साल विकास का एक एजेंडा तय किया और उसे पूरे करने में जुट गए। इससे विकास कार्यों को निर्धारित समय में और गुणवत्तापूर्ण तरीकों से पूरा करने में सहूलियत हुई। वर्तमान में भी सरकार 2016-17 के लिए तय किए गए विकास के एजेंडे पर काम कर रही है। इसमें कृषि, बिजली, अवस्थापना सुविधाओं का सृजन, मानव संसाधन विकास, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, नगर व ग्रामीण विकास, श्रम, कमजोर वर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, किसानों और नौजवानों को बेहतर संसाधन मुहैया कराने का प्रयास सहित प्रशासन तंत्र को कुशल, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के प्रयासों को शामिल किया गया है।

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उत्तर प्रदेश में विकास की गंगा बहाकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यह जाता दिया है कि इच्छाशक्ति और ईमानदार कोशिशों से बदहाल हो चुके उत्तर प्रदेश को भी संवारा जा सकता है। जनता की खुशहाली लौटाई जा सकती है और निवेशकों-पर्यटकों का विश्वास जीता जा सकता है। उनके विकास कार्यों का ही नतीजा है कि जनता आज विकास से उत्तर प्रदेश के विजय की ओर आशा भरी नजरों से देख रही है। जनता की यह उम्मीद यूं ही नहीं है। समाजवादी सरकार ने पिछले साढ़े चार साल में उत्तर प्रदेश में जैसे विकास कार्य किए हैं, वैसा अभी तक उत्तर प्रदेश में किसी अन्य दल की सरकारों ने नहीं किया। विकास कार्यों को रिकाॅर्ड समय में पूरा किया जा रहा है। लखनऊ मेट्रो आकार ले चुकी है। कानपुर में इसका आगाज हो चुका है। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर नवंबर तक गाड़ियां फर्राटा भरने लगेंगी तो समाजवादी पूर्वांचल एक्सप्रेस वे भी निर्माण की ओर गतिमान है। सभी जिला मुख्यालयों को फोर लेन से जोड़ा जा रहा है। तो गांव-गांव संपर्क मार्गों से जुड़ रहे है। ये भी प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों को तेजी से बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगी, जिससे प्रदेशवासियों के जीवनस्तर में काफी सकारात्मक बदलाव दिख रहे हैं और आने वाले में और बेहतर बदहाल दिखेंगे।

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अखिलेश सरकार में किए गए ऐतिहासिक कार्यों में स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए काम बेहद अहम हैं। उत्तर प्रदेश में दस मिनट के भीतर एंबुलेस उपलब्ध होना सपने के जैसा था। केंद्र सरकार के असहयोगी रवैये के बावजूद अखिलेश सरकार ने इस संभव बनाया, बल्कि समाजवादी 108 एंबुलेंस सेवा के रूप में उत्तर प्रदेश को देश का सबसे बड़ा आपातकालीन चिकित्सा परिवहन बेड़ा मुहैया कराया।  यूपी में चार साल के दौरान 11 नए मेडिकल काॅलेज खोले गए। जबकि इससे पहले प्रदेश में सिर्फ 5 मेडिकल काॅलेज थे। इलाज मुफ्त कर गरीबों के साथ जनसामान्य के लिए स्वास्थ्य सहूलियतों उपलब्ध कराई गई। यह अपने आप में मिसाल है।

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अखिलेश यादव सरकार ने जहां प्रदेश को तरक्की के रास्ते पर ले जाने के कई अच्छे प्रयास किए हैं वहीं प्रशासनिक दृष्टि से देखें तो यह उत्तर प्रदेश की सफलतम सरकार है, जिसने अपने कार्यों से दूसरे राज्यों के लिये आदर्श और मानक तय किये हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की कोशिश रही है कि समाज का हर वर्ग योजनाओं से लाभान्वित हो। जनता के बीच अखिलेश की छवि बेदाग और ईमानदार मुख्यमंत्री की है। एसोचैम का भी कहना है कि अखिलेश सरकार ने अपने कार्यकाल के बाद के दो वर्षों में उद्योग क्षेत्र को बढावा देने के लिये सार्थक प्रयास किये हैं। प्रदेश सरकार उद्यमियों को सूबे में अच्छा माहौल देने में जरूर कामयाब रही है।

किसानों को खुशहाल बनाने के लिए अखिलेश सरकार ने सिंचाई के कुल 700 करोड़ रुपये माफ किए। सिंचाई का शुल्क माफ होने से करीब ढाई करोड़ किसानों के लिए अतिरिक्त बचत संभव हो सकी। इसके अलावा पूरे प्रदेश में 12.43 लाख हेक्टेयर खेतों में सिंचाई का पानी पहुंचा गया। दूसरी तरफ यूपी सहकारी कृषि विकास बैंक से लिए गए 50 हजार रुपये तक के कर्ज माफ कर उत्तर प्रदेश सरकार ने 7 लाख 86 हजार किसानों को राहत दी है। किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिल सके, इसलिए सरकार ने बड़े शहरों में एग्रीमाॅल खोले। तो कृषक दुर्घटना बीमा योजना एक लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी।

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प्रदेश सरकार ने पशुधन को बढ़ावा देने के लिए कामधेनु योजनाएं शुरू की। कामधेनु, मिनी कामधेनु और माइक्रो कामधेनु योजनाओं से जहां गांवों में लोगों को रोजगार का बेहतर अवसर मिला है, वहीं दुग्ध उत्पादन में उत्तर प्रदेश देश में नंबर 1 हो गया। इन योजनाओं से प्रदेश रोजाना करीब 10 लाख लीटर का उत्पादन हो रहा है।

गरीब परिवारों के साथ-साथ महिलाओं की बेहतरी के लिए सरकार ने समाजवादी पेंशन योजना शुरू की। इससे वर्तमान में 55 लाख परिवार लाभांवित हो रहे हैं। कन्या विद्याधन से गरीब परिवारों की मेधावी छात्राओं के लिए 12वीं के बाद पढ़ाई को आसान बनाया गया है। अब तक करीब आठ लाख छात्राओं को इस योजना का लाभ दिया जा चुका है। वीमेन पावर लाइन 1090 की शुरुआत अखिलेश सरकार की यह पहल महिला सुरक्षा की दिशा में बेहद सराहनीय कदम है। इससे अब तक करीब पांच लाख 58 हजार शिकायतों का पूरी तरह समाधान किया जा चुका है। वहीं दूसरी ओर, वरिष्ठ नागरिकों के लिए सरकार ने समाजवादी श्रवण यात्रा शुरू की है।

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युवाओं को हुनरमंद बनाने के साथ उनके लिए रोजगार आसान बनाने के लिए प्रदेश सरकार देश का सबसे कामयाब कौशल विकास मिशन संचालित कर रही है। इस मिशन के जरिए सरकार 2016-17 तक कुल 23.18 लाख युवकों को हुनरमंद बनाया जा चुका है। जबकि एक लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार प्रदान किया जा चुका है। वहीं फ्री लैपटॉप वितरण योजना के अन्तर्गत 12वीं कक्षा पास करने वाले 15 लाख से ज्यादा छात्र-छात्राओं को तकनीकी की नई दिशा से जोड़ा जा चुका है।

उत्तर प्रदेश बिजली संकट कभी गंभीर चुनौती हुआ करती थी। लेकिन अखिलेश सरकार की कोशिशों से आज उत्तर प्रदेश इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर है। पिछले चार वर्षों में प्रदेश में एक दर्जन से ज्यादा पावर प्लांट या तो स्थापित किए गए हैं, या इसकी तैयारियां अंतिम दौर में हैं। सोलर पावर के क्षेत्र में भी जबर्दस्त काम हुए हैं।

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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ को पर्यावरण अनुकूल वातावरण देने के लिए लखनऊ में मेट्रो की नींव डाली। लखनऊ मेट्रो सिस्टम पूर्ण होने के पश्चात देश की सबसे तेज और सबस किफायती तेज गति आवागमन प्रणाली होगी। इसके साथ ही कानपुर में भी मेट्रो की नींव रखी जा चुकी है। तो बुनियादी ढांचे से प्रदेश के छोटे बड़े हिस्सों को जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आगरा लखनऊ एक्सप्रेस-वे के सपने का भी हकीकत में बदला है। विकास की ओर उन्मुख उत्तर प्रदेश का रूपक बन चुके इसी एक्सप्रेस वे से अपनी विकास रथयात्रा का आगाज करेंगे। यह एक्सप्रेस-वे दो प्रमुख शहरों, लखनऊ और आगरा के अलावा 8 जिलों को जोड़ता है। यानी इन इस एक्सप्रेस वे से 10 जिलों का विकास होगा। इसके साथ ही पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का भी आगाज हो गया है। पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का निर्माण होने से बलिया से लेकर गाजियाबाद तक विकास सुनिश्चित हो सकेगा।

इस तरह से देखा जाए तो पिछले साढ़े चार वर्षों में उत्तर प्रदेश में जितने काम हुए उतना देश के किसी राज्य में नहीं हुआ। इसका नतीजा है कि उत्तर प्रदेश आज देश के प्रगतिशील राज्यों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा है। प्रदेश की जनता के सामाने विकास का यही रोल माॅडल लेकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अगले पांच साल में प्रदेश के विकास का रोडमैप अब जनता के सामने ले कर जा रहा है। विकास रथयात्रा के माध्यम से वह जनता को बताएंगे कि जिस प्रदेश विरासत में मिले बदहाल और कर्जदार उत्तर प्रदेश को उन्हें अपने हौसलों, फैसलों और कार्यक्रमों से विकास के एक नए मुकाम पर स्थापित किया है, उसी सोच व दृष्टि से अगले पांच साल में उत्तर प्रदेश को तरक्की के नए शिखर पर स्थापित करने के लिए तत्पर हैं।

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