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अखिलेश यादव ने घर से ही की महिला सशक्तिकरण की शुरूआत

ay with family

अच्छे काम की शुरूआत घर से ही होती है। उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की बात करें तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के संदर्भ में भी यह बात सामने आती है। आम परिवारों की तरह ही अखिलेश यादव भले ही सूबे के मुख्यमंत्री हैं, लेकिन परिवार में पत्नी डिंपल यादव का स्थान विशेष है। वे न सिर्फ परिवार और अपने संसदीय क्षेत्र के विकास का जिम्मा बखूबी उठाती हैं, बल्कि कई अहम मसलों पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को भी सुझाव देती हैं।

अखिलेश यादव ने अपनी कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से हर संभव प्रयास किया कि समाज में महिलाओं का सम्मान बना रहे, साथ ही बढ़ता रहे। इसी तरह आशा केंद्र खोलकर उन्होंने महिलाओं को एक ही छत के नीचे हर तरह की सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने की सुविधा दे दी। दरअसल मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में महिलाओं को मान-सम्मान और आत्मविश्वास बढ़ाने वाली और उनकी तरक्की सुनिश्चित करने वाली योजनाओं को विशेष प्राथमिकता दी है। समाजवादी पेंशन योजना, विधवा पेंशन योजना या समाजवादी श्रवण यात्रा- अखिलेश यादव में बतौर मुख्यमंत्री प्रदेश की बालिकाओं, युवतियों और महिलाओं के चेहरे पर चमक और ओठों पर मुस्कान बिखेरने का काम किया है। समाजवादी पेंशन योजना में परिवार की महिला मुखिया के खाते में सीधे पैसा देकर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करने का काम किया। समाजवादी श्रवण यात्रा में परिवार के बुर्जुग माता-पिता जो अभी तक आर्थिक संसाधनों की तंगी के कारण तीर्थ यात्रा के लिए मन मसोस कर रह गए थे, उनको सरकारी खर्चे पर तीर्थ यात्रा करा कर उनके जीवन को सार्थक कर दिया। यूपी जैसे बड़े राज्य का मुख्यमंत्री रहते हुए अखिलेश की विनम्रता और संवेदनात्मक पहलुओं को कोई चुनौती नहीं दे सकता।

साल 2012 में अखिलेश यादव जब मुख्यमंत्री बने तो वीमेन पाॅवर लाइन शुरू करने का आइडिया खुद डिंपल यादव ने दिया था। आज वीमेन पाॅवर लाइन 1090 की सफलता से पूरा देश वाकिफ है। 6 लाख से ज्यादा महिलाओं की शिकायतों को समाधान कर इस पाॅवर लाइन ने कीर्तिमान भी स्थापित किए है। 1090 के रूप में सूबे के शहर से गांव तक की महिलाओं को सुरक्षा का मजबूत हथियार मिला है। इसके वे खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

इसी तरह थानों में महिला प्रकोष्ण की स्थापना और हौसला पोषण अभियान की शुरूआत करने की प्रेरणा भी अखिलेश यादव को घर से ही मिली। सिर्फ पत्नी डिंपल के लिए ही सीएम अखिलेश आदर का भाव नहीं रखते है, बल्कि बेटियों कोे प्यार के साथ घर में वाजिब सम्मान मिलता है। उनके करीब रह चुके लोगों का कहना है कि मां मालती देवी की उन्होंने खूब सेवा की थी। मां, मातृत्व और हर नारी के प्रति इसी आदर और सम्मान के भाव के चलते उन्होंने रानी लक्ष्मी बाई अवार्ड की शुरूआत की। ये अवार्ड उन महिलाओं को तो प्रोत्साहित करता ही है जो समाज में कुछ अच्छा काम कर रही हैं। साथ ही प्रदेश ही करोड़ों दूसरी महिलाओं को भी प्रेरित कर रहा है।

बेटियां अगर शिक्षित होती हैं तो पूरा परिवार शिक्षित होता है। अखिलेश यादव ने इस बात को समझा और बेटियों को अनमोल धन कन्या विद्याधन का तोहफा दिया। 30 हजार रुपये की एकमुश्त रकम मिलने से उन परिवारों की बेटियों के लिए भी उच्च शिक्षा की राह आसान  हो गई जो घर की आर्थिक स्थिति के चलते अपने सपनों को पूरा नहीं कर सकती थीं। पूूरे प्रदेश में करीब सात लाख बेटियां इस योजना से लाभांवित हो रही हैं। दूसरी ओर देश की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा योजना समाजवादी पेंशन चलाकर भी सीएम अखिलेश यादव ने महिला सशक्तिकरण के प्रयास किए हैं। इस योजना का लाभ परिवार की महिला मुखिया को दिया जाता है। प्रदेश में करीब 55 लाख परिवार इस योजना से आच्छादित हो चुके हैं। वहीं जब लोहिया ग्रामीण आवास की लाभ देने की बात आई तो भी परिवार की महिला सदस्य के नाम ही आवास दिए गए।

आशा ज्योति केंद्र की मदद से महिलाओं को एक छत के नीचे सभी विभागों की सुविधाएं एक साथ मिल रही है। आशा ज्योति केन्द्रों पर हेल्पलाइन सेवाएं (1090 वूमेन पावर लाइन, 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन, 108 समाजवादी स्वास्थ्य सेवा) आपस में जुड़ी हुई हैं। इन केंद्रों में पुलिस व कानूनी मदद से लेकर चिकित्सा सुविधा तक देने की व्यवस्था की गई है। बैकिंग सुविधा व प्रशिक्षण हब भी यहां स्थापित किए गए है। इसी तरह राज्य सरकार ने रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान कोष की स्थापना की है। लड़कियों को सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए जहां सरकार रानी लक्ष्मी बाई वीरता पुरस्कार दे रही है, वहीं लड़कियों की पढ़ाई जारी रखने के लिए ‘हमारी बेटी-उसका कल योजना और बालिकाओं को कन्या विद्याधन भी उपलब्ध करा रही है, जिससे लड़कियां अपनी पढ़ाई जारी रख सकें। इसके पहले सरकार आशीर्वाद योजना के तहत छात्राओं को 20-20 हजार रुपये की एफडी व साइकिल बांट चुकी है।

प्रदेश सरकार की ओर से जो लाखों निःशुल्क लैपटॉप बांटे गये हैं, उनमें से बड़ी संख्या में लैपटॉप छात्राओं को दिए गए हैं। गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने के लिए ‘102’ और इमरजेंसी में अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 नेशनल एम्बुलेंस सेवा की उपलब्धियों का पूरा देश बखान कर रहा है। इसी तरह राज्य सरकार प्रतिवर्ष महिलाओं को यश भारती तथा रानी लक्ष्मीबाई वीरता सम्मान से सम्मानित कर रही है।

वैसे तो ये उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण के कुछ उदाहरण मात्र हैं। उत्तर प्रदेश में ऐसी कई योजनाएं और कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं जो महिलाओं की तरक्की, उनकी सुरक्षा व सम्मान के बारे में अखिलेश यादव की गंभीरता और उनकी सोच को इंगित करते हैं।

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