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रोजगार देने में भी अखिलेश यादव ने कायम की बादशाहत

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30 January, 2017

जनता जनार्दन जब कोई अपना नुमाइंदा चुनती है तो उसकी कोशिश होती है कि खाली हाथों को काम मिले, भूखे पेट को रोटी मिले और सम्मान के साथ जिंदगी जीने का रास्ता मिले। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लोकतंत्र की इन सभी कसौटियों पर खरे उतरते दिखाई दे रहे हैं। समाजवादी पेंशन योजना और खाद्य सुरक्षा की योजनायें चला कर जहां सबको भोजन देने के प्रयास किये तो वहीँ पुलिस व्यवस्था को आधुनिक बना कर आम जन को सम्मान से जीने का रास्ता तैयार किया। रोजगार देने के मामले में तो उन्होंने जबरदस्त कामयाबी हासिल की है ।

उत्तर प्रदेश सरकार के एक आंकड़े के अनुसार मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल के दौरान अब तक करीब 5 लाख से ज्यादा लोगों को सरकारी नौकरी का तोहफा दिया जा चुका है। यह आंकड़े यह बताते हैं की जनता ने जिस विश्वास और उम्मीद के साथ अखिलेश यादव को अपना मुख्यमंत्री, अपना रहनुमा चुना था वह आज पूरी तरह से कामयाब होते दिख रहे हैं।

एक ऐसा प्रदेश जो कि मायावती के दौर तक बीमारू राज्य में शामिल था, आज पूरे भारत का सितारा बन उसके माथे पर चमक रहा है इसके पीछे अखिलेश यादव की दिन-रात की गई मेहनत, समाजवादी पार्टी की नीतियां और ज्यादा से ज्यादा काम कर दिखाने की इच्छा शक्ति रही है।

उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने प्रदेश के सभी विभागों के प्रमुख सचिवों को यह आदेश दिया है अब तक जितने भी अभ्यर्थी चयनित हो चुके हैं उनको जल्दी से जल्दी नियुक्ति पत्र थमा कर उनके हाथों को रोजगार दे दिया जाए।

आइए हम नजर डालते हैं कुछ आंकड़ों पर और बात करते हैं कि किस किस विभाग में कितनी कितनी नौकरी अब तक दी गई और यकीन मानिए कि यह उत्तर प्रदेश में एक रिकॉर्ड है इतनी नौकरियां इतने रोजगार इसके पहले कभी किसी सरकार में लोगों को नहीं दिए गए।

  • बेसिक शिक्षा विभाग में 2,79,530
  • पुलिस विभाग (भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड) में 48,967
  • अधीनस्थ चयन सेवा आयोग में 33,706
  • लोक सेवा आयोग में 26,721
  • माध्यमिक शिक्षा में 15,378
  • राजस्व विभाग-राजस्व परिषद में 14,126
  • चिकित्सा एवं स्वास्थ्य में 11,416
  • उप्र माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में 6,005
  • उप्र पावर कारपोरेशन लि में 5,207
  • चिकित्सा शिक्षा में 5,052
  • ऊर्जा विभाग में 4241
  • सहकारिता में 2353
  • उप्र राज्य विद्युत उत्पादन निगम में 1,971
  • पशुधन में 1,109
  • नगर विकास में 642
  • उच्च शिक्षा विभाग में 579
  • सिंचाई विभाग में 438
  • पंचायती राज विभाग में 203
  • आवास एवं शहरी नियोजना में 114
  • उप्र सहकारी चीनी मिल संघ लि. में 29
  • राज्य सम्पत्ति में 22
  • उप्र अधीनस्थ चयन सेवा आयोग के माध्यम से समाज कल्याण विभाग में 332
  • आयुक्त हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग में 120
  • चकबन्दी आयुक्त में 3215
  • प्रमुख अभियन्ता, लोक निर्माण विभाग में 787
  • कमिशनर व्यापार कर में 1171
  • परिवहन निगम में 1690
  • होम्यापैथी में 346

ये आंकड़े तो एक बानगी भर है। लेकिन अब इतना तय है कि लोकतंत्र की चौखट पर अखिलेश यादव ने अपना रुतबा और सम्मान दिनों दिन बढाया है, और आने वाले विधानसभा चुनावों में इसका फायदा समाजवादी पार्टी को मिलना तय है।

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