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अखिलेश यादव को है पिछली सफलता दोहराने की पूरी उम्मीद

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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों की तैयारी चल रही है। अखिलेश अपनी छवि इस तरह गढ़ चुके हैं कि राज्य के विकास के लिये वो अपरिहार्य हैं। वह अपनी सरकार की उपलब्धियों के दम पर लोगों में वे विश्वास कायम कर चुके हैं कि उन्हें उत्तर प्रदेश की उन्नति से कोई परिस्थिति नहीं रोक सकती है।

अखिलेश सरकार के कामकाज का विश्लेषण किया जाये तो पता चलाता हैं कि आर्थिक और सामाजिक मोर्चे पर उत्तर प्रदेश ने अखिलेश सरकार में पिछली सरकार में बेहतर प्रदर्शन हुए। अखिलेश सरकार में हुए विकास कार्यों से एसोचैम ने भी दो अंकों में विकास दर हासिल करने ही क्षमता का उल्लेख किया था। अखिलेश सरकार के समय में कृषि की वृद्धि दर शानदार रही। सेवा क्षेत्र में भी विकास दर 7.85 फीसदी रही। वहीं राजकोषीय घाटे के मोर्चे पर अखिलेश सरकार का प्रदर्शन अपनी पूर्ववर्ती सरकार से बेहतर रहा।

लखनऊ विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के पूर्व प्रोफेसर एस के द्विवेदी कहते हैं, अखिलेश सरकार की छवि साफ सुथरी है और उसने कुछ बड़ी परियोजनाएं शुरू की हैं। जो उत्तर प्रदेश के द्रुत विकास में महत्वपूर्ण साबित हुई हैं। सपा ने पिछले विधानसभा चुनावों में छात्रों को मुफ्त लैपटॉप बांटने का वादा किया था और माना जाता है कि इस वादे के दम पर पार्टी सत्ता में आई थी। मतदाताओं का कहना है कि सपा स्मार्टफोन बांटने का अपना वादा पूरा करेगी क्योंकि वह 18 लाख मुफ्त लैपटॉप बांट चुकी है। अखिलेश की नजर 41 लाख नए मतदाताओं पर है जिनकी उम्र 18-19 साल है। उनका यह दाव पिछले विधानसभा चुनाव में सफल रहा था और पार्टी ने 403 में से 224 सीटें जीती थी। अखिलेश को इस बार भी पिछली सफलता को दोहराने की उम्मीद है।

उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव देश के चुनावी खेल के लिहाज से सेमीफाइनल मानाजा रहा है। इस बार यूपी का मुख्यमंत्री कौन होगा इसे लेकर भी गाँव की चौपालों से लेकर शहर के गली मोहल्लों तक अटकलों का दौर जारी है। लोगों के अपने अपने मत हैं, अपनी अपनी वजहें पर इस बीच ख़ुफ़िया विभाग ने पूरे प्रदेश में जनता के बीच जो सर्वे करवाया और उसके जो परिणाम निकल सामने आये वो अखिलेश यादव के लिए खुशखबरी लेकर आये हैं। ख़ुफ़िया विभाग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इसमें कोई शक नहीं है कि समाजवादी पार्टी की सरकार फिर से बन रही है और अखिलेश यादव को भारी जनसमर्थन मिल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार अकेले दम पर समाजवादी पार्टी को 200 से ज्यादा सीटें मिलती दिख रही है।

पिछले विधानसभा चुनाव परिणामों पर नज़र डालें तो सपा को कुल 403 में से 224 सीटों पर शानदार विजय मिली थी और करीब 108 सीटें ऐसी रही थीं जहाँ सपा दूसरे नंबर पर रही थी। अब अगर ऐसा होता है कि भाजपा, कांग्रेस, सपा और बसपा अलग अलग होके चुनाव लड़ें तो भी रिपोर्ट के अनुसार समाजवादी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी। वहीं अगर कांग्रेस और सपा का गठबंधन हो जाए तो उस स्थिति में सपा को 270 से ज्यादा सीटें मिलेंगी, और अगर ऐसा होता है तो इसमें सबसे ज्यादा नुकसान भाजपा और बसपा का होगा जबकि सबसे ज्यादा फायदा सपा को मिलेगा। और इस गठबंधन को 300 से भी ज्यादा सीटें मिलेंगी। कुल मिलाकर समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव की लहर पूरे उत्तर प्रदेश में छा चुकी है। ऐसी हालत में अखिलेश यादव का दुबारा उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है।

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