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नोटबंदी से निपटने के लिए सीएम अखिलेश का बड़ा फैसला, ग्रामीण इलाकों में चलेंगे कैश वैन

2016-11-14

नोटबंदी से आ रही दिक्कत को देखते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सभी डीएम को बैंकों द्वारा मोबाइल कैश वैन चलाने का निर्देश दिया है। ताकि ग्रामीण इलाकों के लोगों को राहत मिल सके। साथ ही सीएम ने निर्देशित किया है कि जिन इलाकों में बैंकों की शाखाएं नहीं हैं, वहां कैम्प लगा कर लोगों की मदद की जाय। मुख्यमंत्री ने सभी कमीश्नरों को इस व्यवस्था की निगरानी का निर्देश दिया है।

नोटबंदी से लोगों को भारी असुविधा

भारत सरकार ने 8 नवंबर से 500 और 1000 के नोट बंद कर दिए हैं। जिससे लोगों को दैनिक जीवन के निर्वाह में भारी असुविधा हो रही है। पांच सौ और एक हजार की नोटबंदी के बाद सिर्फ 100 और 2000 के नोट ही प्रचलन में हैं। सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक एटीएम से एक दिन में महज ढाई हजार जबकि बैंक से दस हजार रुपए ही निकल सकते हैं। जो लोगों की जरूरत के मुताबिक नाकाफी साबित हो रहे हैं। नोट बदलने और निकालने के लिए बैंकों और एटीएम के सामने लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है।

बुजुर्गों और महिलाओं को भारी दिक्कत

नोटबंदी से सबसे ज्यादा दिक्कत महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को हो रही है। घंटों लाइन में लगने के बाद भी जब ट्रांजैक्शन नहीं हो पा रहा है तब ये समस्या और भी बढ़ जा रही है। उन महिलाओं की तो और भी हालत खस्ता है जो बच्चों के साथ अकेली हैं, वो बच्चे को देखें या बैंक और एटीएम में लाइन लगाएं?

शादी-विवाह वाले घरों में मची हाय तौबा

नोटबंदी का असर शादी-विवाह वाले घरों में देखा जा रहा है। जिसकी बेटी-बहन की शादी है वो शादी की तैयारी करे या बैंक में लाइन लगाए? कई जगहों पर तो ये भी देखने को मिल रहा है कि जिस लड़के या लड़की की शादी वो हल्दी लगाने के बाद लाइन में लगा है। सरकार को इन विकल्पों के बारे में सोचना चाहिए था।

मरीजों के तीमारदारों को भारी असुविधा

नोटबंदी से मरीजों के साथ उनके तीमारदारों को भारी असुविधा हो रही है। सरकार ने इलाज और दवाई में खर्च के लिए पांच सौ और एक हजार के नोट स्वीकार करने की सहूलियत तो दी है। लेकिन उनके साथ जो तीमारदार हैं उनका क्या ?  उनके सामने दिक्कत ये है कि वो अपने मरीज को देखें या बैंक में लाइन लगाएं?  सरकार लोगों को धैर्य रखने की सलाह दे रही है कि जल्दी ही सब सामान्य हो जाएगा, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक सौ पच्चीस करोड़ की आबादी वाले देश में इतने बड़े फैसले के साइड इफेक्ट पर विचार क्यों नहीं किया गया? और अगर विचार किया गया तो चूक कहां हो गई?

– वृजनन्दन चौबे, गेस्ट राइटर

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