Uttar Hamara logo

एक विनम्र योद्धा के रूप में उभरे हैं अखिलेश यादव

Article 31

18 January 2017

उत्तर प्रदेश का चुनाव दिलचस्प मोड़ लेता जा रहा है। और इसमें सबसे खूबसूरत बात है इस बार सियासत में नयापन का आभास। करीब दो माह से चल रहे इस सियासी संग्राम में अखिलेश यादव जिस विनम्र योद्धा के रूप में उभर कर सामने आए हैं, वह निश्चित तौर पर यूपी की राजनीति को नई दिशा देने का संकेत है। अखिलेश यादव के उभार के साथ यह सिर्फ समाजवादी पार्टी में नए युग का सूत्रपात ही नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश या यूं कहें पूरे देश की राजनीति को नए काल में प्रवेश करने की दस्तक है।

चुनाव आयोग द्वारा समाजवादी पार्टी के सिंबल, नाम और अध्यक्ष पद को लेकर अखिलेश के पक्ष में निर्णय देने के बाद उनकी तरफ से जो पहला बयान आया, वह गौर करने वाला है। अखिलेश यादव ने कहा- ‘मैं इस जीत से खुश नहीं, मगर ये लड़ाई जरूरी थी। वह (मुलायम सिंह यादव) मेरे पिता हैं और मेरे लिए हमेशा ही आदरणीय हैं।’ चुनाव आयोग का फैसला आने के बाद अखिलेश यादव अपनी पत्नी सांसद डिंपल यादव के साथ उनसे मिलने पहुंचे और आशीर्वाद लिया। इससे पहले तमाम द्वंद्व के बीच भी अखिलेश यादव और डिंपल यादव ने अपने समर्थकों को साफ तौर पर हिदायद दी थी कि ये संघर्ष मूल्यों का है न कि मान-अपमान था। इसलिस किसी भी तरह नेता जी मुलायम सिंह यादव और चाचा शिवपाल यादव का अपमान नहीं होना चाहिए। इस सकारात्मक और ईमानदार सोच का ही परिणाम रहा कि विवाद का पटाक्षेप होते ही सबकुछ पहले की तरह सामान्य हो गया। हां, निश्चित तौर पर इसमें मूल्यों की जीत हुई।

akhilesh-yadav-mulayam-singh-yadav_

भारत का मतदाता हमेशा नएपन को महत्व देता है। राजीव गांधी ने जब 21वीं सदी का हिन्दुस्तान बनाने की बात कही हो या फिर नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव में बड़े -बड़े सपने दिखाए हों, जनता को इसमें नया दिखा तो वोट की शक्ल में उन्हें हर सिर आंखों में चढ़ाया। दूर की बात क्यों करें। पिछले विधानसभा चुनाव में भी समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश की जनता के सामने विकास का स्पष्ट रोडमैप रखा था। जनता ने इस पर अटूट विश्वास जताते हुए पार्टी को पूर्ण बहुमत की सरकार दी। लेकिन यह भी गौर करने की बात रही है जब जब जनता का भरोसा टूटा है तो जनता ने उन पार्टियों को आंख दिखाने से भी गुरेज नहीं किया है। आज के परिदृष्य में बीजेपी के संदर्भ में ये बातें काफी हद तक दिखती हैं, क्योंकि जैसे बड़े-बड़े सपने नरेंद्र मोदी ने दिखाए थे, वो हकीकत के धरातल पर उतर नहीं सके। इससे उलट अखिलेश यादव के खिलाफ उत्तर प्रदेश में कहीं भी एंटी इनकंबेन्सी फैक्टर काम करता नहीं दिखाई देता है। चुनाव से पूर्व किए  गए हर सर्वेक्षण में यह बात भी साफ तौर पर सामने आई है कि अखिलेश यादव निर्विवाद रूप में प्रदेश की जनता की पहली पसंद हैं।

Akhilesh Yadav, Chief Minister of the northern state of Uttar Pradesh and the son of Samajwadi Party (SP) chief Mulayam Singh Yadav, waves at his supporters during a Rath Yatra, or a chariot journey, as part of an election campaign in Lucknow, India November 3, 2016. REUTERS/Pawan Kumar

बहरहाल इस जीत के बाद अखिलेश के सामने विरोधियों के वार से दो-चार होने की चुनौती है। उसमें प्रथम दृष्टया अखिलेश ही आगे दिख रहे हैं। अब जैसा कि समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने भी बेटे को चुनाव में फतह का आशीर्वाद दे दिया है तो पार्टी में विवाद का भी पटाक्षेप हो गया है। ऐसे में अखिलेश यादव के सामने इस चुनाव में राह काफी हद तक निष्कंटक दिखाई दे रही है। इसकी वजह यह है कि बसपा के पास जनता को देने के लिए कुछ भी नया नहीं है और मायावती सरकार में हुए भ्रष्टाचार को भी जनता आज तक भुला नहीं पाई है। वहीं बीजेपी के पास नरेंद्र मोदी के चेहरे के अलावा कुछ भी नहीं है। नरेंद्र मोदी का चेहरा भी पार्टी इतना भुना चुकी है कि लोगों को उसमें कुछ नयापन नजर नहीं आता है। बीजेपी की इस लाचारी को समझा जा सकता है। क्योंकि पार्टी के पास उत्तर प्रदेश में अखिलेश की बराबरी करने लायक कोई नेता नहीं है। न ही केंद्र की ढाई साल की सरकार में बीजेपी ने उत्तर प्रदेश के लिए ऐसा कोई कमाल का काम हीं किया है, जिसके दम पर वोट मांगा जा सके।

इसके विपरीत अखिलेश यादव राजनीति में नयापन, जोशीले और लकीर से हटकर काम करने वाले युवा नेता के तौर पर स्थापित हो चुके है। तरक्की से यूपी की तस्वीर बदलने की उनकी चाहत ने अखिलेश यादव को जनता के करीब ला दिया है। युवाओं के बीच तो वे पहले से ही चहेते रहे हैं। कुल मिलाकर ब्रांड अखिलेश उनके हाथ तुरुप का पत्ता लगा हुआ है और इसके भरोसे वे अपने सारे दांव चल रहे हैं। जाति-समुदाय की दीवार को लांघते हुए उन्हें यह साबित कर दिया है कि अखिलेश यादव सभी को साथ लेकर और सर्वसमाज के विकास के पैरोकार हैं।

उत्तर हमारा

2 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Uttar Hamara

Uttar Hamara

Uttar Hamara, a place where we share latest news, engaging stories, and everything that creates ‘views’. Read along with us as we discover ‘Uttar Hamara’

Related news