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परिवार है जिसका उत्तरप्रदेश, वो हैं अखिलेश

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नए साल की शुरुआत होते ही उत्तरप्रदेश समेत देश के कई राज्यों में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज जाएगा। चुनाव नजदीक देखकर राजनीतिक दल तमाम हथकंडे अपना रहे हैं, ताकि वो ये साबित कर सकें कि जनता के असली हमनवा वही हैं। इन सबके बीच मौजूदा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने काम-काज और नीतियों की बदौलत लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं। आम तौर पर ऐसा होता है कि 5 साल के कार्यकाल के बाद एंटी इन्कम्बेन्सी फैक्टर हावी होने लगता है। लेकिन उत्तरप्रदेश में जनता के दिलों पर सिर्फ अखिलेश यादव का नाम छाया हुआ है।

हाल के दिनों में कई ओपिनियन पोल आए हैं जिनमें अखिलेश यादव को नंबर वन बताया गया है। ओपिनियन पोल के साथ ही जनता के बीच जिस तरह से अखिलेश यादव की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। उससे विपक्ष का हैरान होना स्वाभाविक है। लिहाजा हमने ये समझने का प्रयास किया कि आखिरकार क्यों अखिलेश हैं नंवर वन?

पारिवारिक नेता की छवि

अखिलेश यादव उत्तरप्रदेश के सबसे युवा मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने राज्य के हर क्षेत्र, वर्ग एवं समुदाय की बेहतरी के लिए कल्याणकारी नीतियां तय की हैं। इससे भी ज्यादा उनकी छवि एक पारिवारिक नेता की है। तमाम व्यस्तताओं के बावजूद भी उन्होंने पारिवारिक दायित्वों का बखूबी निर्वाह किया है। महिला कल्याण से लेकर बाल कल्याण एवं बुजुर्गों के बेहतर जीवन के लिए उनके द्वारा तय की गई योजनाएं ये साबित करती हैं कि सीएम अखिलेश यादव अपने परिवार की ही तरह राज्य के 22 करोड़ लोगों का खयाल रखते हैं। शायद यही वजह उन्हें औरों से अलहदा बनाती है।

तीव्र विकास के लिए मुकम्मल प्रयास

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राज्य में विकास की गति को धार दी है। देश में सबसे जल्दी तैयार होने वाली लखनऊ मेट्रो, सबसे लंबा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे, डायल-100 जैसी परियोजनाओं को तैयार कराने में अखिलेश यादव ने जिस सक्रियता का परिचय दिया है उससे राज्य की जनता काफी खुश हैं। इसके अलावा उन्होंने ऊर्जा, निवेश, स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर नीतियां बनाकर प्रदेश में विकास की गति को आगे बढ़ाया है वह भी एक प्रमुख कारण है कि लोग उन्हें दोबारा सीएम को रूप में देखना चाहते हैं। ताकि राज्य की विकास की रफ्तार यूंही जारी रहे।

युवा कल्याण के प्रति सजग

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव उत्तरप्रदेश की राजनीति में सबसे युवा चेहरा हैं। आज युवाओं के सामने सबसे बड़ी समस्या बेहतर शिक्षा और रोजगार की है। जिसे सीएम ने बखूबी समझा है। और इस दिशा में बेहतर नीति और नीयत का परिचय दिया है। चाहे वह कौशल विकास के जरिए युवाओं को ट्रेनिंग दिलाकर उन्हें रोजगार दिलाने की बात हो या फिर 15 लाख लैपटॉप देकर तकनीकि शिक्षा से जोड़ने की बात हो हर कदम पर सीएम युवाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हुए हैं। शायद यही वजह है कि मौजूदा युवा उनमें अपना अक्श देखता है।

किसान कल्याण के प्रति समर्पित

राज्य का कल्याण वहां के किसान और नौजवान की खुशहाली में निहित होती है। इस बात को उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बखूबी समझते हैं। यही वजह है कि किसानों की कर्ज माफी, मुफ्त सिंचाई, आबपाशी शुल्क से मुक्ति और किसान सर्वहित बीमा योजना जैसी नीतियां राज्य में लागू है। पहले खाद बीज के लिए किसानों को लाठियां खानी पड़ती थीं। पैसा दलालों की जेब में जाता था लेकिन जबसे राज्य में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर स्कीम) लागू है किसानों की सीधे लाभ मिल रहा है, उन्हें उनका हक मिल रहा है। किसान मंडी, किसान बाजार जैसी योजनाओं का भी लाभ मिल रहा है। शायद यही वजह है कि सीएम किसानों के बीच लोकप्रिय हैं। और राज्य का किसान चाहता है कि वो वो दुबारा सीएम बनें।

सभ्य एवं सौम्य नेता की छवि

वर्तमान राजनीतिक परिवेश में जिस तरह से गाली-गलौच और असंसदीय भाषा का चलन बढ़ा है उससे अखिलेश यादव अलहदा हैं। पूरे कार्यकाल में उन्हें आपा खोते हुए नहीं देखा गया है। विपक्ष के तमाम आरोपों का उन्होंने जिस विनम्रता के साथ जवाब दिया है वह राजनीतिक दलों के लिए नजीर है। प्रदेश की जनता ने उन्हें पीपुल सीएम का दर्जा दिया है। चाहे वह जनता दरबार के जरिए लोगों की समस्याओं को तत्काल सुलझाने की बात हो या फिर सोशल मीडिया पर मिली खबरों पर एक्शन लेने की बात हो । अखिलेश यादव सबसे आगे रहे हैं। शायद यही वजह है कि वह जनता की पहली पसंद बन गए हैं।

राज्य में लचर विपक्ष

जानकारों के मुताबिक अखिलेश यादव के पहले नंबर पर आने की एक वजह यह भी है कि उत्तरप्रदेश की वर्तमान राजनीति में विपक्ष बेहद कमजोर हो गया है। 2014 के लोकसभा में तूफानी जीत हासिल करने वाली बीजेपी की हालत ये है कि उसे राज्य में सीएम कैंडिडेट खोजना पड़ रहा है। बीएसपी के अंदरूनी कलह ने उसे पहले ही हाशिए पर खड़ा कर दिया है। जबकि भ्रष्टाचार के तमाम आरोपों में घिरी कांग्रेस पार्टी रेस में सबसे पीछे खड़ी दिखाई दे रही है। 

– वृजनन्दन चौबे, गेस्ट राइटर

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