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मेडिकल व्यवस्था को और बेहतर बनाने में जुटी अखिलेश सरकार

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17 August 2016

उत्तर प्रदेश सरकार ने हमेशा से आम जनता के लिए काम किया है. इसी सिलसिले में अखिलेश सरकार ने एक अहम फैसला लिया है. राज्‍य सरकार ने अपने 16 लाख कर्मचारियों को कैशलेस इलाज देने का वादा किया है. अखिलेश सरकार के इस फैसले से असाध्‍य रोगों का इलाज नहीं करा पाने वाले लोगों को भारी राहत मिलने वाली है। इससे बेहतरीन अस्‍पतालों में कर्मचारी और उनके आश्रितों को मुफ्त इलाज से बड़ा फायदा होगा। एक तय प्रीमियम पर मेडिक्लेम कार्ड कर्मचारियों को मिलेगा। इसमें उनके खुद के अलावा परिवार के सभी आश्रितों को भी चिकित्सा में बिना पेमेंट किए इलाज की सुविधा मिल जाएगी।

उपचार में भी समाजवाद 

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उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार की बुनियाद ही समाजवाद है। जोकि सरकार के विकास कार्यों से ही साफ़ झलकता है। सरकार की पहली प्राथमिकता में आम जनता आती है। राज्य सरकार का सपना है कि उसके प्रदेश के नागरिक हमेशा स्वास्थ्य चिंताओं से दूर रहें। इसके लिए सरकार लगातार कोशिश भी कर रही है।

सितम्बर के पहले हफ्ते से शुरू हो सकती है योजना

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अखिलेश सरकार बहुत जल्द ही इसके लिए कर्मचारी कल्याण निगम, कार्मिक विभाग, कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों की सलाह पर इस संबंध में शासनादेश को फाइनल कर के बहुत जल्द ही लागू करेगी. इस सुविधा को देने की शुरुआत के लिए शासनदेश सितंबर के पहले सप्‍ताह में जारी कर दिया जाएगा। राज्य सरकार के मुख्य सचिव दीपक सिंघल ने कर्मचारियों को लिखित में आश्वासन दिया है कि अगले 15 दिन में कैशलेस इलाज का इंतजाम होगा। इस योजना से लाभ केवल 16 लाख लोगों तक ही सीमित नहीं होगा। बल्कि प्रदेश भर के करीब 70 लाख छोटे बड़े कर्मचारियों को इस योजना का लाभ होगा. कुल मिलाकर प्रदेश की आबादी का एक अच्छा खासा हिस्सा अब बेहतरीन इलाज के लिए आर्थिक संकट से नहीं जूझेगा. उसको सरकार की ओर से केवल एक व्यक्ति के प्रीमियम पर मुफ्त इलाज की सुविधा मिलेगी।

भर्ती होने पर मिलेगी सुविधा

कैशलेस इलाज की सुविधा के लिए जरूरी होगा कि लाभार्थी कर्मचारी या उसके परिवारीजन अस्पताल में कुछ दिनों के लिए भर्ती रहें। ओपीडी के जरिए इलाज कराने पर होने वाले खर्च का भुगतान इस बीमा के माध्यम से नहीं किया जाएगा। इसके अलावा कॉस्मेटिक सर्जरी, दांत के इलाज, सौंदर्य से जुड़े इलाज और अन्य लग्जरी मेडिकल फेसेलिटी के लिए यह सुविधा नहीं दी जाएगी।

मेडिकल क्लेम में भ्रष्टाचार पर लगेगी रोक

सरकारी कर्मचारियों को इलाज का खर्च मिलने में भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है। अपने ही विभाग में कर्मचारियों को क्लेम पाने के लिए कई स्तर पर घूस देनी पड़ती है। इसके अलावा कई भ्रष्ट कर्मचारी गलत तरीके से मेडिक्लेम हासिल करने की कोशिश करते हैं। इसके अलावा कर्मचारी पर कोई अतिरिक्त बोझ भी नहीं पड़ेगा।

इससे पहले सरकार ने डायलिसिस को मुफ्त किया 

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उत्‍तर प्रदेश के मण्डल मुख्यालयों पर स्थापित सरकारी चिकित्सालयों में किडनी रोगियों की सुविधा के लिए निःशुल्क डायलिसिस मशीन लगाने का निर्णय लिया है। जिससे किडनी के रोगियों को डायलिसिस के लिए दूसरे शहरों की तरफ नहीं जाना पड़ेगा। इससे उनके समय और धन दोनों की बचत होगी। राज्‍य सरकार अपने इसी उद्देश्य को पूरा करने के तहत राजधानी में कैंसर इंस्टीट्यूट की स्थापना भी कर रही है।

समाजवादी सरकार बेहतर चिकित्सा सुविधा को प्रतिबद्ध

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ऐसा नहीं है सिर्फ अखिलेश यादव ही चिकित्सा सुविधा बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। इससे पहले भी जब समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने अपने कार्यकाल के दौरान अस्पताल की पर्ची का शुल्क घटाकर एक रुपये कर दिया था। मौजूदा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सरकारी अस्पताल में सभी प्रकार की जांच निःशुल्क कर दिया है। यह प्रक्रिया आमजन में लोकप्रयिता का बड़ा कारण बनी है। इस तरह की सोच को आगे बढ़ाते हुए समाजवादी सरकार प्रदेशवासियों को आने वाले समय में निःशुल्क जांच सुविधा भी उपलब्ध कराने की कोशिश में है।

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