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अखिलेश सरकार ने दूर की किडनी मरीजों की मुश्किलें, अपने ही इलाके में कराएँ डायलिसिस

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July 27, 2016

उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार की बुनियाद ही समाजवाद है। जोकि सरकार के विकास कार्यों से ही साफ़ झलकता है। सरकार की पहली प्राथमिकता में आम जनता आती है। राज्य सरकार का सपना है कि उसके प्रदेश के नागरिक हमेशा स्वास्थ्य चिंताओं से दूर रहें। इसके लिए सरकार लगातार कोशिश भी कर रही है। इसी कड़ी में सरकार ने अगस्त महीने से उत्‍तर प्रदेश के मण्डल मुख्यालयों पर स्थापित सरकारी चिकित्सालयों में किडनी रोगियों की सुविधा के लिए निःशुल्क डायलिसिस मशीन लगाने का निर्णय लिया है। जिससे किडनी के रोगियों को डायलिसिस के लिए दूसरे शहरों की तरफ नहीं जाना पड़ेगा। इससे उनके समय और धन दोनों की बचत होगी। राज्‍य सरकार अपने इसी उद्देश्य को पूरा करने के तहत राजधानी में कैंसर इंस्टीट्यूट की स्थापना भी कर रही है।

समाजवादी सरकार बेहतर चिकित्सा सुविधा को प्रतिबद्ध

ऐसा नहीं है सिर्फ अखिलेश यादव ही चिकित्सा सुविधा बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। इससे पहले भी जब समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने अपने कार्यकाल के दौरान अस्पताल की पर्ची का शुल्क घटाकर एक रुपये कर दिया था। मौजूदा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सरकारी अस्पताल में सभी प्रकार की जांच निःशुल्क कर दिया है। यह प्रक्रिया आमजन में लोकप्रयिता का बड़ा कारण बनी है। इस तरह की सोच को आगे बढ़ाते हुए समाजवादी सरकार प्रदेशवासियों को आने वाले समय में निःशुल्क जांच सुविधा भी उपलब्ध कराने की कोशिश में है।

समाजवादी एम्बुलेंस सेवा बड़ी राहत

अखिलेश यादव सरकार चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग सुदूर ग्रामीण अंचलों तक स्वास्थ्य सेवाओं को विस्तार करने में सफल रही है। 102 एवं 108 एम्बुलेंस सेवाचर्चा में है। इन एम्बुलेंस के माध्यम से गरीब एवं दूरदराज के इलाकों में रहने वाले रोगियों एवं गर्भवती माताओं को काफी सहूलियतें मिली हैं। मौजूदा व्‍यवस्‍था चिकित्सा एवं स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सेवाओं को राज्य सरकार आम जनता तक पहुंचाने में पूरी तरह सफल रही है।

साल में दो बार स्कूलों में मेडिकल कैंप

इस योजना का उद्देश्य नवजात और बच्चों के स्वास्थ्य की देखरेख के उचित मानदंड स्थापित करना है। इसके तहत 14 साल से कम उम्र के स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए यूपी के सभी 820 ब्लॉकों में 2 डॉक्टरों और 2 पैरा मेडिकल कर्मचारी की टीम गठित की गई हैं। ये टीम साल में दो बार हर स्कूल में मेडिकल कैंप लगाकर बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करती है और जरूरत पड़ने पर उनका इलाज भी करती हैं। मेडिकल कैंप में बच्चों के लंबाई, वजन और खान-पान का रिकार्ड तैयार किया जाता है और दांतों व आंखों की जांच भी की जाती हैं।

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सरकार करती है इलाज पर खर्च

योजना के तहत स्कूली बच्चों में खून की कमी दूर करने के लिए आयरन की गोलियां और क्रीमिनाशक बांटी जाती हैं। जांच में यदि बीमारी गंभीर पाई जाती है तो बच्चे को विशेषज्ञ को दिखाया जाता हैं। फिर भी हालत में सुधार नहीं हाने पर उसे बड़े अस्पताल में रेफर किया जाता है। बच्चे के इलाज में जो भी खर्च आता है, उसे सरकार वहन करती है।

योजना की कार्य प्रणाली

योजना में सबसे पहले आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और एएनएम गांव-गांव में घूमकर बच्चों का डाटा बैंक तैयार करती हैं। इसमें आयोडीन, फोलिक एसिड की कमी और आंख आदि की जांच की जाती है। बच्चों की बीमारी की रिपोर्ट तैयार कर हेल्थ कार्ड बनाया जाता है। जिससे बच्चे का नियमित इलाज किया जा सके। चिकित्सक और पैरामेडिकल टीम को रिपोर्ट भेजी जाती है। जिले में एक चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ की प्रशिक्षित टीम एंबुलेंस के साथ सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात रहती है। बच्चों की बीमारी की जांच कर उसे विशेषज्ञ चिकित्सकों को दिखाया जाता है। स्थिति गंभीर होने पर बच्चे को बीमारी के बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पताल में रेफर किया जाता है। इलाज में आने वाले खर्च को एनआरएचएम के तहत प्रदेश सरकार द्वारा वहन किया जाता है।

 

उत्तर हमारा

3 Comments

  • धर्मेन्द्र मलिक says:

    बहुत अच्छा कार्य कर रही है सरकार ।

  • धर्मेन्द्र मलिक राष्ट्रीय महासचिव प्रभारी युपी says:

    मा०मुख्य मन्त्री जी को बहुत बहुत बधाई ।

  • lal ji yadav says:

    bahut achha kaam kar rahi hai Sarkar..

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