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लैपटॉप और विद्याधन के बाद अब फ्री चरखा भी देगी अखिलेश सरकार

साबरमती के गांधी आश्रम में रखा गया चरखा Photo_ Wikipedia

साबरमती के गांधी आश्रम में रखा गया चरखा Photo_ Wikipedia

May 26, 2016

‘जनसाधारण पैसे की कमी से इतना कष्ट नहीं भोगते हैं, जितना काम की कमी से भोगते हैं। उनके लिए श्रम ही धन है। यदि कोई करोड़ों लोगों के लिए उनके घर में काम जुटा दे तो कहना चाहिए कि वह उनके लिए रोटी-कपड़ा या यों कहिए कि रुपये जुटा देता है। चरखा उनके लिए ऐसा ही श्रम सुलभ कर देता है।’

महात्मा गांधी, ग्राम स्वराज में

महात्मा गांधी द्वारा उनकी बहुचर्चित पुस्तक ग्राम स्वराज में लिखी गई यह बात आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी तब थी। समय के साथ हमारे देश के नीति नियंताओं ने इस बात को भुला दिया, लेकिन उत्तर प्रदेश को आधुनिकता के नए दौर में स्थापित कर रहे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव दस फलसफे को नहीं भूले। तभी तो उन्होंने लैपटॉप और विद्याधन के बाद अब फ्री चरखा देने की घोषणा की है। इतना ही नहीं खादी को नया कलेवर देने के लिए सरकार ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) के साथ एक समझौता भी किया है।

सर्वोदय आश्रम, एटा, उत्तर प्रदेश Photo__thehindu.com

सर्वोदय आश्रम, एटा, उत्तर प्रदेश Photo__thehindu.com

स्वावलंबन का नया अध्याय बनाएगा चरखा

फ्री समाजवादी चरखा अब रोजगार और स्वावलंबन का नया अध्याय गढ़ेगा। दरअसल चरखा एक उपकरण ही नहीं है, यह आजादी के संघर्ष जमाने से देशवासियों को रोजगार दिला रहा है और स्वावलंबन का प्रतीक है। अब यही चरखा उत्तर प्रदेश में तरक्की की नई इबारत लिखेगा। मुख्यमंत्री की घोषणा सिर्फ मुफ्त चरखा बांटने तक सीमित नहीं हैं, अलबत्ता इसके बहाने उन हजारों बेरोजगारों व बुनकरों के साथ हथकरघा उद्योग की दशा सुधारने की ओर गंभीर कदम है।

Photo_daijiworld.com

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सप्ताह में एक दिन सब पहनें खादी

इस योजना का सबसे बड़ा पहलू है मुख्यमंत्री की प्रदेश की जनता से वह अपील, जिसमें उन्होंने लोगों से सप्ताह में एक दिन खादी पहनने का अनुरोध किया है। निःसंदेह यह दूरगामी संदेश देता है। इसके आमजन में खादी के प्रति रूझान बढ़ेगा और हथकरघा उद्योग और उससे जुड़े लोग मजबूत होंगे। 27 मई को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने आवास निफ्ट के सहयोग से आयोजित खादी कार्यक्रम के शुभारंभ के अवसर पर यह अपील की। उन्होंने कहा कि खादी को बढ़ावा देना हम सबकी जिम्मेदारी है। खादी से लाखों लोगों को रोजगार मिलता है।

Photo_ reuters

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राजनीति में आने के साथ सीएम ने अपना लिया खादी

खादी की तारीफ करते हुए सीएम ने कहा, ‘खादी से गांधी जी की याद आती है। मैं जबसे राजनीति में आया हूं, खादी के मोटे धागे का कुर्ता-पायजामा पहनता हूं।’ सीएम ने कहा कि खादी को बढ़ावा देने के लिए धागा उद्योग को विकसित करने का काम किया जा रहा है। इसके अलावा खादी उद्योग के लिए नई-नई मशीनों की खरीददारी की जा रही है। हर खादी केन्द्र में काम करने वाले व्यक्तियों और कच्चा माल से खादी के कपड़े कम समय में तैयार करने के लिए मशीनों की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है।

Photo_ exoticindiaart.com

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खादी की ब्रांडिंग पर सरकार का जोर

मुख्यमंत्री ने खादी और हथकरघा उद्योगों के प्रोत्साहन देने की अपनी योजना का भी खुलासा किया। उन्होंने बताया कि खादी की मार्केटिंग और व्यापक स्तर पर कारोबार के अवसर उपलब्ध करवाकर इसे मौजूदा दौर के बाजार और मांग के हिसाब से लाने की कोशिश की जा रही है। इसी वजह से सरकार ने तमाम कोशिशें करके लंबित भुगतान करवाया है।

यूपी में और खुलें निफ्ट जैसी संस्थाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में निफ्ट रायबरेली की तरह खादी को बढ़ावा देने वाली अधिक से अधिक संस्थाओं को खोलने की जरूरत महसूस की जा रही है। लखनऊ और नोएडा में भी निफ्ट के सेंटर खुलने चाहिए। प्रदेश सरकार इसके लिए सभी संसाधन मुहैया कराएगी। इसके लिए उन्होंने केन्द्र सरकार में संबंधित मंत्रालय को पत्र भी लिखा है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया। इसके बाद भी उनकी सरकार खादी उद्योग में लगे लोगों को रोजगार दिलाने के लिए फ्री में चरखा बांटने का निर्णय लिया है। इसी मकसद से चरखा योजना की शुरुआत की जा रही है।

Photo_indiantextilemagazine.in

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झांसी, बांदा में चरखा योजना की शुरुआत

चरखा योजना के तहत बुंदेलखंड क्षेत्र पर विशेष फोकस करते हुए सीएम ने झांसी और बांदा में इस योजना को शुरू कर दिया है। इस मौके पर उन्होंने कहा कि खादी को स्थान देना हम सबकी जिम्मेदारी है। इस दौरान सीएम की तरफ से बांदा और झांसी के लिए 25 और 50 चरखे भी वितरित करने के साथ सैंपल बुक का विमोचन भी किया। वहीं, सीएम अखिलेश ने खादी से बनी जैकेट भी पहनकर देखी।

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