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उत्तर प्रदेश की 1090 वूमेन पॉवर लाइन पूरे देश के लिए उदाहरण

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28 October 2016

ऐसे दौर में जब महिलाओं की सुरक्षा पूरे देश में चुनौती बनी हुई है उत्तर प्रदेश सरकार की 1090 वूमेन पॉवर लाइन की सफलता पूरे देश को राह दिखा रही है। याद कीजिए दिसंबर 2012 का निर्भया कांड जब देश भर में एक ऐसी योजना की मांग जोर पकड़ रही थी जिससे युवतियों और महिलाओं को सुरक्षा का कारगर हथियार मिल सके। दिल्ली सहित कई राज्यों में निर्भया एप जैसे तमाम सेवाओं को लॉन्च कर इस दिशा में कदम तो बढ़ाया गया। लेकिन इस घटना से चंद महीने पहले उत्तर प्रदेश में जब 1090 वीमेन पॉवर लाइन की शुरूआत की गई तो इस बात का अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता था कि यह सेवा किस कदर सफलता के परचम लहराएगी, क्योंकि ऐसी ही दूसरी योजनाएं लगातार फेल हो रहा थीं। आज इस योजना के चार साल बाद 5 लाख 58 हजार से ज्यादा शिकायतों का पूरी तरह समाधान कर 1090 वूमेन पॉवर लाइन न सिर्फ उत्तर प्रदेश की युवतियों और महिलाओं को सुरक्षा देने में कामयाब हुई है, बल्कि इस योजना के माध्यम से उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है तो अपराधियों और मनचलों को दुस्साहस की कमजोर हुआ है।

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हाल में ही इस सेवा को मजबूती प्रदान करते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस सेवा के अंतर्गत 29 कांस्टेबल, 01 हेड कांस्टेबल, 06 सब इंस्पेक्टर श्रेणी के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नियुक्त किया है। महिलाओं को बेहतर शिक्षा एवं सुरक्षा तथा विकास का पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। वहीं ‘1090’ वूमेन पॉवर लाइन की सफलता से प्रभावित होकर अन्य राज्य भी इस योजना को अपनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार से सहयोग हासिल कर रहे हैं।

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1090 वूमेन पॉवर लाइन की सफलता के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने वूमेन सिक्योरिटी एप ‘1090’ भी शुरू किया था। यह मोबाइल एप्लीकेशन भी प्रभावी ढंग से काम कर रहा है। इसके माध्यम से बड़ी संख्या में महिला उत्पीड़न सम्बन्धी शिकायतों का समाधान किया गया है और कई मामलों में प्राथमिक रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई है। महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की शिकायत ऑनलाइन दर्ज किए जाने की भी व्यवस्था की गई है। इसके अतिरिक्त भी प्रदेश सरकार महिलाओं के कल्याण एवं सुरक्षा के लिए कई योजनाएं चला रही है, जिनमें कन्या विद्या धन योजना, समाजवादी पेंशन योजना, ‘108’ समाजवादी एम्बुलेंस सेवा, निःशुल्क लैपटॉप वितरण योजना, रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान कोष इत्यादि शामिल हैं।

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1090 वूमेन पॉवर लाइन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट रहा है। पॉवर लाइन के अब तक के आंकड़ों पर गौर करें तो 15 नवंबर, 2012 से लेकर 30 जून 2016 तक इस पॉवर लाइन पर कुल 5,64,370 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें 5,58,000 शिकायतों का समाधान फौरी तौर पर किया गया। भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी व वूमेन पॉवर लाइन 1090 के प्रमुख पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) नवनीत सिकेरा कहते हैं, “आप सोच नहीं सकते कि ‘महिला पॉवर लाइन 1090’ ने महिलाओं को कितनी ताकत दी है। राज्य के छोटे से छोटे कस्बे से महिलाओं की शिकायतें आ रही हैं। इसका मतलब साफ है कि यह पावर लाइन पूरे उत्तर प्रदेश में महिलाओं का विश्वास जीतने में सफल हो रही है।”

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अब कोशिश है कि पीक ऑवर यानी शाम 5 बजे से 9 बजे तक में शिकायतों के वेटिंग रिस्पांस को ‘जीरो’ तक लाया जाए। वैसे जैसे जैसे शिकायतें बढ़ेंगी, पॉवर लाइन की मैनपावर की ताकत भी बढ़ाई जाएगी। वहीं डीजीपी जावीद अहमद के निर्देश के बाद इसकी एक शाखा नोएडा में भी खोलने की तैयारी है। इधर, आंकड़ों के मुताबिक, वूमेन पॉवर लाइन में 4,95,195 शिकायतें फोन पर परेशान करने और छेड़छाड़ की हैं, जबकि इस दौरान 23,259 सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं के उत्पीड़न की घटना सामने आई हैं। पिछले छह महीनों के दौरान सोशल वेबसाइसट्स पर उत्पीड़न की 8,445 शिकायतें आई हैं। इसके अतिरिक्त घरेलू हिंसा की 7,734 शिकायतें महिला पॉवर लाइन पर दर्ज की गईं।

उत्तर प्रदेश के जिन जिलों से सबसे अधिक शिकायतें आई हैं, उसमें लखनऊ सबसे ऊपर है। इस दौरान लखनऊ में छेड़छाड़ की 1,11,768 शिकायतें दर्ज की गईं। शिकायत करने वालों में 20,275 कामकाजी महिलाएं व 34,426 गैरकामकाजी महिलाएं शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 57,067 छात्राओं की शिकायतें महिला पॉवर लाइन 1090 पर दर्ज की गई हैं। लखनऊ के बाद दूसरा नंबर कानपुर नगर, तीसरे स्थान पर इलाहाबाद, चौथे पर बनारस और पांचवें स्थान पर आगरा है। सबसे कम शिकायतें जिन जिलों से आई हैं, उनमें श्रावस्ती सबसे ऊपर है। यहां से उत्पीड़न की सिर्फ 766 शिकायतें ही दर्ज की गई हैं। दूसरे स्थान पर कासगंज, तीसरे पर चित्रकूट, चौथे स्थान पर ललितपुर व पांचवें स्थान पर कौशांबी हैं। इससे स्पष्ट है कि 1090 वूमेन पॉवर लाइन अपने मकसद में पूरी तरह कामयाब है।

 

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